शपथ के 4 घंटे बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का पहला फैसला, रात 10 से सुबह 6 बजे तक नहीं बजेंगे लाउड स्पीकर
Rahul Garhwal | Dec 13, 2023, 24:00 IST
शपथ के 4 घंटे बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का पहला फैसला, रात 10 से सुबह 6 बजे तक नहीं बजेंगे लाउड स्पीकर
मध्यप्रदेश में सीएम मोहन यादव का पहला फैसला, गृह विभाग ने जारी किया प्रशासकीय आदेश, अब ध्वनि प्रदूषण अधिनियम में बनेंगे नियम।
BHOPAL. मध्यप्रदेश में अब रात 10 बजे से सुबह 6 बजे लाउड स्पीकर बजाए तो खैर नहीं। नवनियुक्त मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की लाइन पर चलते हुए शपथ लेने के 3 घंटे बाद कड़ा कदम उठाया और गृह विभाग को आदेश दिए। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने आनन-फानन में मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम-1985 में प्रशासकीय आदेश जारी कर दिए। ये सीएम पद की शपथ लेने के बाद मोहन यादव का पहला आदेश है।
![WhatsApp Image 2023-12-13 at 6.46.47 PM (1).jpeg]()
केंद्र सरकार का कानून
इसके बाद मुख्यमंत्री को बताया गया कि प्रशासकीय आदेश को कोई भी कोर्ट में घसीट सकता है। लिहाजा, इसे ध्वनि प्रदूषण अधिनियम 2000 में नियम बनाकर लागू करना बेहतर होगा। केंद्र सरकार का कानून है, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे लागू करने के लिए जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। गृह विभाग के आदेश के बाद अब प्रदूषण विभाग नए सिरे से नियम बना रहा है। नियमों में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रदेश के किसी भी हिस्से में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउड स्पीकर चलते पाए गए तो जुर्माना या जेल भेजने तक की सजा हो सकती है। ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) 2000 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने चार अलग-अलग प्रकार के क्षेत्रों के लिए ध्वनि मानदंड रखा है। इसमें इंडस्ट्रियल, कमर्शियल, रेसीडेंसियल और सुनसान इलाकों का पैमाना है।
जानिए क्या है नियम...
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक, हार्न्स के लिए 125 डेसिबल अधिकतम सीमा है, जबकि दो पहिया वाहनों के लिए 105 डेसिबल। कानूनन इससे अधिक की आवाज पर लाइसेंस जब्त हो सकता है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के उल्लंघन पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
तेज मतलब कितनी तेज
जिस आवाज को सुनते हुए आप असहज महसूस ना करें, वो स्तरीय माना जाता है। इसके अलावा अगर आप किसी आवाज से कानों में या सिर में तकलीफ महसूस करें या अहसज हो जाएं तो वो शोर है।
WHO का अध्ययन भी जान लीजिए
विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अगर आवाज का स्तर 70 डेसिबल से कम है तो इससे किसी भी सजीव को कोई नुकसान नहीं है, लेकिन अगर कोई 80 डेसिबल से अधिक की आवाज में 8 घंटे से अधिक समय तक रहता है तो ये खतरनाक हो सकता है।
WhatsApp Image 2023-12-13 at 6.46.47 PM (1).jpeg
केंद्र सरकार का कानून
इसके बाद मुख्यमंत्री को बताया गया कि प्रशासकीय आदेश को कोई भी कोर्ट में घसीट सकता है। लिहाजा, इसे ध्वनि प्रदूषण अधिनियम 2000 में नियम बनाकर लागू करना बेहतर होगा। केंद्र सरकार का कानून है, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे लागू करने के लिए जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। गृह विभाग के आदेश के बाद अब प्रदूषण विभाग नए सिरे से नियम बना रहा है। नियमों में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रदेश के किसी भी हिस्से में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउड स्पीकर चलते पाए गए तो जुर्माना या जेल भेजने तक की सजा हो सकती है। ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) 2000 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने चार अलग-अलग प्रकार के क्षेत्रों के लिए ध्वनि मानदंड रखा है। इसमें इंडस्ट्रियल, कमर्शियल, रेसीडेंसियल और सुनसान इलाकों का पैमाना है।
जानिए क्या है नियम...
- औद्योगिक क्षेत्र के लिए लिए यह 75 डेसिबल दिन के समय और रात में 70 डेसिबल।
- वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए 65 डेसिबल दिन के समय और रात में 55 डेसिबल।
- आवासीय क्षेत्र के लिए 55 डेसिबल दिन में और 45 डेसिबल रात में।
- साइलेंस जोन के लिए 50 डेसिबल दिन में और 40 डेसिबल रात में।
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक, हार्न्स के लिए 125 डेसिबल अधिकतम सीमा है, जबकि दो पहिया वाहनों के लिए 105 डेसिबल। कानूनन इससे अधिक की आवाज पर लाइसेंस जब्त हो सकता है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के उल्लंघन पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
तेज मतलब कितनी तेज
जिस आवाज को सुनते हुए आप असहज महसूस ना करें, वो स्तरीय माना जाता है। इसके अलावा अगर आप किसी आवाज से कानों में या सिर में तकलीफ महसूस करें या अहसज हो जाएं तो वो शोर है।
WHO का अध्ययन भी जान लीजिए
विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अगर आवाज का स्तर 70 डेसिबल से कम है तो इससे किसी भी सजीव को कोई नुकसान नहीं है, लेकिन अगर कोई 80 डेसिबल से अधिक की आवाज में 8 घंटे से अधिक समय तक रहता है तो ये खतरनाक हो सकता है।
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari