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News in Short
- मध्य प्रदेश सरकार ने नई ताप विद्युत परियोजनाओं से 4000 मेगावाट बिजली खरीदने की मंजूरी दी है।
- मुख्यमंत्री निवास में तीन कंपनियों के साथ बिजली आपूर्ति अनुबंध (PSA) किए जाएंगे।
- तीन कंपनियों को 3200 मेगावाट बिजली परियोजनाएं मिलीं, और ग्रीनशू विकल्प से 800 मेगावाट अतिरिक्त मिलेगा।
- ये ताप विद्युत परियोजनाएं अनूपपुर जिले में स्थापित की जाएंगी।
- इन परियोजनाओं से 60 हजार करोड़ का निवेश, 8000 रोजगार अवसर और 2030 से नियमित बिजली आपूर्ति होगी।
News in Detail
मध्य प्रदेश की बिजली जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने नई ताप विद्युत परियोजनाओं से 4000 मेगावाट बिजली खरीदने की मंजूरी दे दी है।
इस फैसले के तहत मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास, समत्व भवन में तीन बड़ी कंपनियों के साथ बिजली आपूर्ति अनुबंध (PSA) किए जाएंगे। इससे न सिर्फ बिजली संकट हल होगा, बल्कि निवेश और रोजगार के नए मौके भी मिलेंगे।
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कैसे हुआ डेवलपर्स का चयन?
राज्य शासन की मंजूरी के बाद, एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने DBFOO मॉडल (डिजाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन) के तहत प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया पूरी की।
इस प्रक्रिया के दौरान कुल 3200 मेगावाट क्षमता के लिए तीन कंपनियां चुनी गईं, और ग्रीनशू विकल्प के तहत 800 मेगावाट अतिरिक्त भी आवंटित किया गया।
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किस कंपनी को कितनी बिजली परियोजना मिली?
निविदा प्रक्रिया के बाद निम्नलिखित कंपनियों को परियोजनाएं सौंपी गईं-
हिंदुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड – 800 मेगावाट
टरेंट पावर लिमिटेड – 1600 मेगावाट
अदानी पावर लिमिटेड – 800 मेगावाट
ग्रीनशू विकल्प के तहत अतिरिक्त – 800 मेगावाट (अदानी पावर)
सभी कंपनियां अपनी-अपनी SPV (स्पेशल पर्पस व्हीकल) के माध्यम से बिजली आपूर्ति अनुबंध करेंगी।
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अनूपपुर बनेगा नया पावर हब
राज्य की सभी प्रस्तावित ताप विद्युत परियोजनाएं अनूपपुर जिले में स्थापित की जाएंगी। इससे यह इलाका आने वाले सालों में ऊर्जा उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
मुख्य फायदे एक नजर में
इन परियोजनाओं से राज्य को कई स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है-
लगभग 60 हजार करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष निवेश होगा।
3000 प्रत्यक्ष रोजगार, 5000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे।
2030 से नियमित बिजली आपूर्ति की संभावना
उद्योग, कृषि और शहरी जरूरतों को मिलेगा स्थायी समाधान
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क्यों अहम है यह फैसला?
बढ़ती आबादी, उद्योगों और विकास योजनाओं के बीच बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह दीर्घकालिक बिजली समझौता मध्यप्रदेश को ऊर्जा के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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