MP Export Ranking : एक्सपोर्ट बढ़ने की बजाय 623 करोड़ रुपए घट गया, 13वें से खिसककर पहुंचा 15वें स्थान पर

किसी राज्य के राजस्व में आयात और निर्यात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में मध्य प्रदेश के निर्यात से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पिछले पांच साल से निर्यात के मामले में बढ़त बना रहा राज्य इस बार दो पायदान पीछे हो गया है। 

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Sandeep Kumar
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BHOPAL. साल 2023-24 में एमपी का एक्सपोर्ट ( Export ) 65 हजार 2 सौ 55 करोड़ रहा। यह पिछले साल के मुकाबले 623 करोड़ रुपए कम है। एमपी 13 वें स्थान से खिसककर सभी राज्यों में एक्सपोर्ट के मामले में खिसककर 15 वें स्थान पर आ गया है। हरियाणा और ओडिशा जैसे छोटे राज्य भी एक्सपोर्ट के मामले में मध्य प्रदेश के आगे हैं। हाल ही में जारी हुई डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड ( डीजीएफटी ) और डायरेक्टर जनरल ऑफ कमर्शियल इनफार्मेशन एंड स्टेटिस्टिक्स की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है। साल 2022 -23 में प्रदेश ने 65,878 करोड़ का एक्सपोर्ट किया था। देश से पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 36 लाख करोड़ का एक्सपोर्ट हुआ है। हालांकि इसमें प्रदेश का योगदान इसमें 1.80% ही है। प्रदेश में फार्मा 5 सालों से सबसे बड़ा एक्सपोर्ट सेक्टर बना हुआ है। इसके अलावा कपड़े, अनाज, हैवी मशीनरी, एल्युमीनियम और प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का भी एक्सपोर्ट होता है।

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2030 का टारगेट

पिछले दो सालों में मध्य प्रदेश से सबसे अधिक एक्सपोर्ट अमेरिका और बांग्लादेश को किया जा रहा है। चीन, नीदरलैंड और यूएई को भी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं। अमेरिका को 12 हजार 6 सौ 00 करोड़ तो बांग्लादेश को 5524 करोड़ का सामान एक्सपोर्ट किया गया। डीजीएफटी का टारगेट है कि मप्र से साल 2030 तक 4 लाख करोड़ का एक्सपोर्ट हो। इसके लिए एक्सपोर्ट को 6 सालों में 6 गुना तक बढ़ाना होगा। फेडरेशन ऑफ एमपी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ( Federation of MP Chamber of Commerce and Industry ) के अध्यक्ष आरएस गोस्वामी ने कहा कि एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए हाई वैल्यू प्रोडक्ट्स को बढ़ाना होगा। वही राज्य आगे बढ़ रहे हैं जो इज ऑफ डूइंग बिजनेस में तेजी से काम कर रहे हैं। मप्र को भी ऐसा ही करना होगा।

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इनका फायदा नहीं

पिछले एक साल से जिलों में एमपीआईडीसी ( MPIDC ) और एमएसएमई ( MSMIE) विभाग मिलकर एक्सपोर्ट प्रमोशन चलाते रहे हैं। इन कार्यक्रमों में इस बात पर फोकस रहता है कि व्यावसायियों को एक्सपोर्ट के लिए प्रेरित करें। एक्सपर्ट की सहायता से जाने कि जिले से क्या एक्सपोर्ट हो सकता है। जीआई टैग और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में भी जुड़े उत्पादों के एक्सपोर्ट का प्रयास हो रहा है। पिछले साल गेहूं, चावल और प्याज जैसी कमोडिटीज पर निर्यात प्रतिबंध लगे होने से कुछ दिक्कत आई। हालांकि अन्य सेक्टरों में अच्छा काम हुआ। हम 2030 तक 4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट टारगेट की तरफ बढ़ रहे हैं।

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