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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
1. सागर जिले के गोदाम से छत्तीसगढ़ के व्यापारी को नकली सरसों बेचने की जांच अटक गई है।
2. पुलिस के हाथ नकली सरसों बेचने वालों का सुराग नहीं लगा है और न कोई आरोपी पकड़ा गया है।
3. नेफेड और मार्कफेड जैसी संस्थाओं की खरीद और नीलामी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
4. मध्य प्रदेश से अनाज, दलहन और तिलहन की खरीदी से व्यापारी दूरी बना सकते हैं।
5. नकली सरसों बेंचने वाले गिराह की जालसाजी प्रदेश की साख को भी दागदार कर रही है।
INTRO
BHOPAL. नकली सरसों बेचकर नेफेड, मार्कफेड और एमपी वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन को चूना लगाने वालों का अब तक सुराग नहीं लगा है। वहीं कमीशनखोरी के लालच में उलझे मार्कफेड और सहकारी समितियों के अधिकारी-कर्मचारी भागते फिर रहे हैं। मिलावटी सरसों की जालसाजी ने जहां सहकारिता विभाग और खरीद केंद्र के अधिकारी- कर्मचारियों को मुश्किल में डाल दिया है। वहीं पुलिस अधिकारी भी इस गुत्थी को सुलझाने से कोसों दूर हैं।
काली सरसों की मिलावट खोरी से दो करोड़ से ज्यादा की ठगी, बोरियों से किसान कोड का गायब होना, सर्वेयर की रिपोर्ट सब संदेह के दायरे में हैं। सवाल यह भी उठ रहा है नकली सरसों की पहचान क्यों नहीं की जा सकी।
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News in Detail :
द सूत्र की पड़ताल में नकली या मिलावटी सरसों की पूरी जानकारी सामने आई है। हर किसी की जिज्ञासा है नकली सरसों कैसे बनाई गई और उसे खरीद केंद्र तक लाकर कैसे बेंचा गया। राजस्थान, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के कई क्षेत्रों में नकली सरसों बनाकर जालसाजी की जा रही है।
जालसाजों का गिरोह पहले बड़े छन्नों से मिट्टी के महीन दाने बनाते हैं और फिर उसे जिप्सम, सीमेंट के पावडर में डालकर मिला देते हैं। इससे मिट्टी के दानों पर सरसों के रंग की तरह परत चढ़ जाती है। इन दानों को सुखाने के बाद बोरियों में भरकर अलग- अलग राज्यों में असली सरसों में मिलाकर बेंच दिया जाता है।
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मध्य प्रदेश की सहकारी साख पर बट्टा
छत्तीसगढ़ की फर्म को नकली सरसों बेंचने से मध्य प्रदेश की सहकारी संस्थाओं की साख पर बट्टा लगा है। समर्थन मूल्य पर अनाज, तिलहन और दलहन की खरीद को लेकर सहकारी समितियां पहले से ही संदेह के दायरे में रही हैं। ऐसे में अब दूसरे राज्यों की व्यापारिक फर्मों को नकली या मिलावटी जिंस की बिक्री प्रदेश की व्यावसायिक साख को दागदार कर रही है। इससे भविष्य में प्रदेश से अनाज, तिलहन या दूसरी जिंस खरीदने वाली कंपनियां किनारा कर सकती है।
कमीशन के लालच में फंसे जिम्मेदार
सागर जिले की सहकारी समितियां बीते सालों में समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर खूब चर्चा में रही हैं। व्यापारियों से कमीशन वसूलकर घटिया और अमानक अनाज की खरीदी के कई मामलों में सागर की सहकारी समितियों पर केस भी दर्ज हैं। सहकारी समितियों की इन्हीं कारगुजारियों की जानकारी जुटाकर जालसाज नकली सरसों लेकर सागर पहुंचे थे। समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीदी को लेकर रहली के छिरारी और खैराना उप केंद्र के कर्मचारी उनके कमीशन के झांसे में फंस गए। गुपचुप तरीके से हजारों क्विटंल नकली सरसों खरीदकर उसे गोदाम में जमा भी करा दिया। उन्हें अपनी कारगुजारी पकड़ में न आने का भरोसा था लेकिन छत्तीसगढ़ के व्यापारी ने उनकी हेराफेरी पकड़ ली।
बोरियों से कैसे गायब हुए कोड
समर्थन मूल्य के खरीदी केंद्र पर किसान से अनाज खरीदने के समय उन पर कोड का लेवल चस्पा किया जाता है। यह किसान कोड यह तय करता है कि अनाज, तिलहन या दलहन की खरीदी किसान से ही की गई है। खरीदी शुरू होने के समय यह कोड रजिस्टेशन के दौरान किसानों को जारी किया जाता है।
हजारों क्विटंल नकली सरसों खरीदते समय सैकड़ों बोरियां किसान कोड के बिना ही वेयर हाउस में जमा कराई गईं। इसी वजह से वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। क्योंकि किसान कोड के बिना इस लाट में एक भी बोरी जमा ही नहीं की जा सकती थी।
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अफसरों के लालच से लगी चपत
नकली सरसों बेंचने मामले की पड़ताल करते हुए द सूत्र ने सहकारिता विभाग के अफसर, तिलहन कारोबारियों से जानकारी जुटाई। इसके अलावा मिलावटी सरसों के पुराने केस भी खंगाले हैं। मध्य प्रदेश में सालभर पहले चंबल अंचल में व्यापारी ने नकली सरसों पकड़कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। सागर जिले के खरीद केंद्रों पर मिलावटी सरसों बेंचने का यह दूसरा मामला है जिसमें पुलिस ने केस दर्ज किया है।
पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया है लेकिन केवल खरीदी करने वाले सरकारी कर्मचारी और अधिकारी ही नामजद आरोपी बना पाई है। उन मिलावटखोरों की कोई जानकारी नहीं जुटा पाई है जो खरीद केंद्र पर सरसों बेंचकर लाखों का फटका लगा गए। प्रारंभिक जांच में नकली सरसों की खरीदी से सरकार को एक से दो करोड़ रुपए की चपत लगने का अंदेशा है।
बच निकले जालसाज, फंसें जिम्मेदार
नेफेड यानी नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के लिए 2024-25 में एमपी मार्कफेड ने सरसों की खरीदी की थी। रहली की सहकारी समिति छिरारी और उपकेंद्र खैराना पर 8950 क्विटंल सरसों समर्थन मूल्य योजना के तहत खरीदा गया। रहली के गोदाम में रखे सरसों को नेफेड ने राजनांदगांव की फर्म मेसर्स शिवशक्ति सागर ट्रेडिंग कंपनी को नीलाम किया था। जब सरसों कंपनी के पास पहुंची तो फर्जीवाड़ा सामने आ गया।
कंपनी की आपत्ति के बाद नेफेड के अधिकारी रंजीत कुमार सिंह ने बेंची गई सरसों और रहली के गोदाम में रखी बोरियों की जांच कराई गई। एक्सपर्ट ने जैसे ही सरसों के दानों कों पानी में डाला मिलावटखोरी का भेद खुल गया।
अब हेराफेरी में शामिल सहकारी समिति छिरारी के संचालक विजय कुमार जैन, सहकारी समिति उपकेन्द्र खैराना संचालक जगदीश लोधी, नेफेड सर्वेयर अभिषेक दुबे, पुष्पेन्द साहू, वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन की तत्कालीन शाखा प्रबंधक वर्षा तोमर की तलाश जारी है। जबकि लाखों का चूना लगाने वाले जालसाजों की कोई खबर ही नहीं है।
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पुलिस जांच से सच आएगा बाहर
मार्कफेड के जिला प्रबंधक रोहित सिंह बघेल ने नकली सरसों के मामले पर कहा कि मामला उनके कार्यभार संभालने से पहले का है। समर्थन मूल्य पर नेफेड के सर्वेयरों के परीक्षण के बाद ही सरसों खरीदी गई थी और उसे नेफेड को सौंपकर गोदाम में रखवाया गया था। तब इस पर कोई सवाल नहीं उठे। अब मामला पुलिस की जांच में है। नकली सरसों कहां से आया यह जांच के बाद ही खुलासा हो सकेगा।
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