एमपी में मदरसों पर बड़ा खुलासा, शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही आई सामने!

मध्य प्रदेश में संचालित मदरसों (Madrasas) की स्थिति के बारे में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। राज्य में कुल 1096 पंजीकृत मदरसे हैं, लेकिन सरकारी विभाग के पास इन मदरसों के भवन स्वामियों की कोई जानकारी नहीं है।

author-image
Sourabh Bhatnagar
New Update
madhya pradesh madrasas building owner records missing

मध्य प्रदेश में मदरसों की स्थिति:

  1. 1096 पंजीकृत मदरसों के भवन स्वामियों का रिकॉर्ड नहीं है।

  2. 14 वर्षों के निरीक्षण में कोई कमी नहीं पाई गई।

  3. मदरसों को 25 हजार रुपये का अनुदान मिलता है, लेकिन उपयोग पर निगरानी नहीं।

  4. पंजीकरण के लिए भवन दस्तावेज अनिवार्य, लेकिन सत्यापन नहीं हुआ।

  5. भोपाल में 417 और इंदौर में 37 मदरसे हैं।

मदरसों की जानकारी में भारी गड़बड़ी

Bhopal. यह जानकारी विधानसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि विभाग मदरसों के भवन मालिकों का डेटा एकत्रित नहीं करता है।

शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

विदिशा (Vidisha) जिले के कई मदरसे पिछले कुछ वर्षों में विवादों में रहे हैं। इसके बावजूद, 2012 से जनवरी 2026 तक यानी 14 सालों में शिक्षा विभाग ने इन मदरसों का कई बार निरीक्षण किया है।

हालांकि, इन निरीक्षण रिपोर्ट्स में किसी भी मदरसे में कोई भी कमी दर्ज नहीं की गई। तालीमुल कुरआन से लेकर मदरसा मरियम तक के मदरसों के निरीक्षण में कमियों वाले कॉलम में ‘निरंक’ (0) लिखा गया है। 

यह स्थिति शिक्षा विभाग (MP Education Department) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है।

मदरसों के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि

प्रदेश में अनुदान प्राप्त मदरसों को हर साल मरम्मत, मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए प्रति मदरसा 25 हजार रुपए तक का अनुदान दिया जाता है। निरीक्षण के दौरान यह भी देखा जाता है कि क्या इस राशि का सही उपयोग बच्चों की सुविधाओं पर किया गया है या नहीं।

हालांकि, विभाग के पास मदरसों की वास्तविक स्थिति का सही रिकॉर्ड नहीं होने के कारण इस राशि के इस्तेमाल पर नियंत्रण और निगरानी में कमी हो सकती है।

क्या कहते हैं मदरसा बोर्ड के नियम

मध्यप्रदेश मदरसा बोर्ड (Madarsa Board) के नियमों के मुताबिक, किसी नए मदरसे के पंजीकरण के लिए उसके भवन से जुड़े दस्तावेज देना जरूरी होता है। अगर मदरसा अपने निजी भवन में चल रहा है, तो बिजली का बिल देना होता है। अगर किराए के भवन में चल रहा है, तो वैध किरायानामा पोर्टल पर अपलोड करना पड़ता है।

लेकिन सवाल ये है कि, विभाग के पास भवन मालिकों (mp madarsa news) का रिकॉर्ड ही नहीं है, तो पंजीकरण के समय दिए गए दस्तावेज़ों का सही-सही सत्यापन कैसे किया गया? ये एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

प्रदेश में मदरसों की स्थिति

प्रदेश में सबसे ज्यादा 417 मदरसे भोपाल (Bhopal) में हैं, जबकि इंदौर (Indore) में यह संख्या 37 है। इन आंकड़ों के बीच, विभाग की लापरवाही और भवन स्वामियों का रिकॉर्ड न होना बहुत ही गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

इस मामले में उचित जांच और सुधार की आवश्यकता है ताकि इन मदरसों (madarsa survey news) का सही तरीके से निरीक्षण और पंजीकरण हो सके।

FAQ

एमपी में कितने मदरसे हैं ?
मध्य प्रदेश (एमपी) में कुल 1096 पंजीकृत मदरसे हैं।
एमपी में मदरसों को कितनी अनुदान राशि मिलती है और उसका उपयोग किस पर होता है?
मध्य प्रदेश में हर मदरसे को प्रति वर्ष 25 हजार रुपए का अनुदान मिलता है। इसका उपयोग मरम्मत, मेंटेनेंस और बच्चों की सुविधाओं में किया जाता है।

ये खबरें भी पढ़ें...

इंदौर में छात्रवृत्ति घोटाला: खंडहर और मैदान को मदरसा दिखाकर लाखों की ठगी, 27 संस्थान संदिग्ध

एमपी में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल आज से : मरीजों को होगी भारी परेशानी

इंदौर की जबरन कॉलोनी के मकान में चल रहा अवैध मदरसा

एमपी के मदरसों में 556 हिंदू बच्चों के धर्मांतरण का आरोप, NHRC ने एमपी सरकार से मांगा जवाब

MP के मदरसों में अब राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत, आधुनिक शिक्षा अनिवार्य

स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह mp madarsa news madarsa survey madarsa survey news madarsa MP Education Department मध्यप्रदेश मदरसा बोर्ड मदरसा
Advertisment