मध्यप्रदेश में 10 साल में दो हजार करोड़ खर्च कर लगाए 42 करोड़ पौधे, फिर भी घट गई हरियाली, अभियान पर उठे सवाल

Sanjay Dhiman | Aug 05, 2025, 18:00 IST
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Photograph: (the sootr)

सरकार के पौधरोपण अभियान पर सवाल उठे हैं। एक तरफ तो 10 सालों में लगभग 42 करोड़ पौधे लगाए गए, लेकिन हरियाली में गिरावट आई है। खुला और सामान्य सघन वन में कमी आई है। वहीं, अति सघन वन का दायरा बढ़ा है।

मध्यप्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए योजनाएं तो कई चलाई जा रही है, लेकिन इनके फायदे कम और इनपर खर्च अधिक हो रहा है। यहीं कुछ हुआ है राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे पौधरोपण अभियान में बीते कुछ वर्षो में।

मध्यप्रदेश सरकार ने पौधरोपण के लिए दस साल में लगभग 42 करोड़ रुपए खर्च कर दिए, इधर परिणाम उल्टे मिले। इन दस सालों में प्रदेश में हरियाली घट गई। इन परिणामों के बाद प्रदेश सरकार के पौधरोपण अभियान पर सवाल उठ रहे है।

पौधरोपण की स्थिति और परिणाम

मध्य प्रदेश के वन विभाग के मुताबिक, विभाग ने 10 सालों में 41.83 करोड़ पौधे लगाए। इस पर कुल खर्च 2,091 करोड़ रुपए आया। लेकिन आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से 2023 तक सामान्य सघन वन के घनत्व में 1393.36 वर्ग किमी की गिरावट आई। वहीं, खुले वन क्षेत्र में 612.34 वर्ग किमी की बढ़ोत्तरी हुई। यानी, वे इलाके जिनमें पौधे नहीं हैं, उनका दायरा बढ़ा है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब वन विभाग ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं।

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हरियाली में गिरावट क्यों?

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सघन वन क्षेत्र (अति सघन, सामान्य सघन, और खुले वन) में कुल 388.56 वर्ग किमी की गिरावट आई है। जबकि अति सघन वन श्रेणी में 392.31 वर्ग किमी की वृद्धि देखी गई है। इसका मतलब यह है कि पौधरोपण के बावजूद, खुला वन क्षेत्र बढ़ा है, जो कि हरियाली के लिए शुभ संकेत नहीं है। ऐसा क्यों हुआ? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मौसम की अनियमितताएं, वन क्षेत्र की देखरेख की कमी, और अधिक पौधों की उचित वृद्धि का न होना प्रमुख हैं।

5 पॉइंट्स में समझें पूरी खबर



  • 41.83 करोड़ पौधे लगाए गए: वन विभाग ने 10 सालों में 41.83 करोड़ पौधे लगाए, जिन पर 2,091 करोड़ रुपये खर्च हुए।
  • हरियाली में गिरावट: 2015-2023 के बीच सामान्य सघन वन के घनत्व में 1,393.36 वर्ग किमी की गिरावट आई, जबकि खुले वन क्षेत्र में 612.34 वर्ग किमी की वृद्धि हुई।
  • अति सघन वन में वृद्धि: अति सघन वन क्षेत्र में 392.31 वर्ग किमी की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि अन्य वन श्रेणियों में कमी आई है।
  • मंत्री का दावा: वन मंत्री दिलीप अहिरवार ने विधानसभा में दावा किया कि 5 साल में 16.32 करोड़ पौधे लगाए गए, जिनकी जीवित रहने की दर 89.05% रही।
  • किसी प्रकार की जानकारी की कमी: ग्राम वन समितियों द्वारा खर्च किए गए धन और प्रोजेक्ट्स की जानकारी स्पष्ट नहीं दी गई है।

वन मंत्री के दावों पर सवालिया निशान

वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने मध्यप्रदेश विधानसभा में दावा किया था कि 5 सालों में 16.32 लाख पौधे लगाए गए। हालांकि इसपर उठे सवालों का वे संतोषजनक जबाव नहीं सके। इस मामले में रोचक बात यह है कि इन पौधों की जीवित रहने की दर 89.05 प्रतिशत रही है, लेकिन इसके बाद भी प्रदेश के वन क्षेत्र में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। अब सवाल यह उठते है कि क्या इन पौधों की सही देखभाल नहीं हो पाई? इन सवालों ने मंत्री के दावे पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

एक पौधा लगाने का खर्च 50 रुपए

एक पौधा लगाने पर औसतन 50 रुपए खर्च आता है। यदि हम इसकी डिटेल में बात करें, तो पौधे की कीमत लगभग 14 रुपए होती है। गड्ढा खुदाई पर न्यूनतम 16 रुपए, परिवहन पर 10 रुपए और सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग और मजदूरी का खर्च अलग से होता है। इस तरह से 41.83 करोड़ पौधे लगाने पर कुल खर्च 2,091 करोड़ रुपए आया है, जो कि बड़ी राशि है।

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राज्य का वन क्षेत्र और पौधरोपण की रफ्तार

मध्य प्रदेश के वन क्षेत्र की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। एमपी वन विभाग के अनुसार प्रदेश में 94,689 वर्ग किमी वन क्षेत्र है, जो प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 30.72% है। हालांकि, पौधरोपण अभियान ने इस क्षेत्र में कुछ हद तक सुधार किया है, लेकिन सामान्य सघन वन के घनत्व में गिरावट और खुले वन के बढ़ते दायरे ने सरकारी प्रयासों की वास्तविकता पर सवाल खड़ा किया है।

प्रदेश में पौधरोपण के आंकडे़

साल (Year)लगाए गए पौधे (Planted Trees)
2015-164,22,11,115
2016-174,51,59,156
2017-185,88,39,400
2018-195,43,71,563
2019-203,34,29,268
2020-213,86,00,000
2021-223,02,77,626
2022-233,43,03,260
2023-243,66,69,917
2024-254,45,26,048
कुल (Total)41,83,87,353


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