एमपी में सुसाइड के आंकड़े डराने वाले, चार साल में हजारों मौत, नशा, कर्ज और मोबाइल सबसे बड़े कारण
Aman Vaishnav | Mar 01, 2026, 09:52 IST
madhya pradesh suicide cases report data analysis
मध्य प्रदेश में पिछले चार वर्षों में आत्महत्या के मामलों ने सबको दहला दिया है। विधानसभा में पेश आंकड़े बताते हैं कि 56 हजार से ज्यादा लोगों ने सुसाइड किया है। प्रदेश की इस गंभीर स्थिति को समझने के लिए पूरी खबर आखिरी तक पढ़ें।
मध्य प्रदेश में खुदकुशी के मामलों ने सबको चौंका दिया है। विधानसभा में पेश किए गए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। पिछले चार सालों (1 जनवरी 2022 से अब तक) में राज्य के 56 हजार 128 लोगों ने सुसाइड किया है।
इन मौतों की वजह काफी डरावनी है
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हम आंकड़ों को आसान शब्दों में समझें, तो इन घटनाओं के पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं।
हर जगह की स्थिति एक जैसी नहीं है। रीवा और शिवपुरी की बात करें, तो वहां शराब की लत और दहेज के लिए उत्पीड़न सबसे बड़ी समस्याएं बनकर उभरी हैं।
मध्य प्रदेश से एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है। पिछले 4 सालों में राज्य में जितनी भी आत्महत्याएं हुई हैं, उनमें से लगभग 2.2% (यानी 1,200 से ज्यादा) मौतों की वजह मोबाइल की लत, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया रही है।
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मध्य प्रदेश में सरकारी अफसरों की प्रताड़ना से तंग आकर जान देने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में 50 से ज्यादा ऐसी घटनाएं दर्ज हुई हैं, जहां लोगों ने अफसरों के बर्ताव से परेशान होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया है।
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जिलावार जानें मौत के आंकड़े
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इन मौतों की वजह काफी डरावनी है
- नशे की लत: जिला-वार रिपोर्ट बताती है कि 5 हजार से ज्यादा लोगों ने सिर्फ नशे की वजह से आत्महत्या की है।
- कर्ज और तंगी: करीब 4 हजार से ज्यादा लोग ऐसे थे जो पैसों की तंगी या सिर पर चढ़े कर्ज का बोझ नहीं सह पाए थे।
- डिप्रेशन: मानसिक तनाव और डिप्रेशन की वजह से 7 हजार से ज्यादा लोगों ने मौत को गले लगा लिया है।
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मामलों की मुख्य वजहें
- सबसे बड़ा कारण: लगभग हर 100 में से 16 मामले घर के झगड़ों और पारिवारिक अनबन की वजह से होते हैं।
- मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य: 14% लोग डिप्रेशन का शिकार हैं। वहीं 11% लोग पुरानी या लंबी बीमारी से परेशान होकर ऐसा कदम उठाते हैं।
- नशा और कर्ज: 9% मामलों की जड़ नशे की लत है। वहीं 7% लोग पैसों की तंगी या भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं।
- अन्य कारण: करीब 5% लोग अकेलेपन से जूझ रहे थे। 4% मामलों की वजह प्रेम प्रसंग (Love affairs) रही हैं।
इलाकों का हाल
मोबाइल और गेमिंग की लत जान पर भारी
इस रिपोर्ट की बड़ी बातें:
- छोटे शहरों में भी फैला खतरा: पहले माना जाता था कि यह समस्या सिर्फ बड़े शहरों (जैसे इंदौर-भोपाल) तक सीमित है। अब सागर, मुरैना और हरदा जैसे छोटे शहरों में भी ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
- ऑनलाइन फ्रॉड का डर: आंकड़ों के मुताबिक लगभग 3% लोग ऐसे थे जो ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुए थे। समाज में बदनामी के डर से उन्होंने अपनी जान दे दी थी।
- बदलते हालात: यह डेटा साफ इशारा कर रहा है कि स्क्रीन और इंटरनेट का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल खतरनाक है। यह अब एक गंभीर मानसिक और सामाजिक समस्या बन चुका है।
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सरकारी सिस्टम से परेशान होकर खुदकुशी के बढ़ते मामले
- पुलिस का रोल: इन 50 मामलों में से 22 मामले सीधे तौर पर पुलिस की प्रताड़ना से जुड़े हैं।
- प्रभावित जिले: ग्वालियर, रीवा, भिंड, बड़वानी और धार जैसे जिलों में इस तरह के केस सबसे ज्यादा सामने आए हैं।
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जिलावार जानें मौत के आंकड़े
| रैंक | शहर | खुदकुशी के मामले |
| 01 | सागर | 🔴 2,451 |
| 02 | भोपाल | 🟠 2,005 |
| 03 | खरगोन | 🟠 2,004 |
| 04 | धार | 🟡 1,963 |
| 05 | ग्वालियर | 🟡 1,718 |
| 06 | विदिशा | 🟢 1,550 |
| 07 | सीधी | 🟢 1,516 |
| 08 | सतना | 🟢 1,497 |
| 09 | सिंगरौली | 🟢 1,489 |
| 10 | रीवा | 🟢 1,465 |
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