कांग्रेस विधायक की इच्छा रह गई अधूरी, मैहर में ही बनेगा कलेक्टोरेट भवन

मैहर जिले के संयुक्त कलेक्टोरेट भवन को अमरपाटन में बनाने मांग हाईकोर्ट में टिक नहीं सकी। कांग्रेस विधायक के राज्यपाल को पत्र लिखने के बावजूद सरकार ने फैसला नहीं बदला।

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Neel Tiwari
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Collectorate building will be built in Maihar only

Photograph: (the sootr)

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NEWS IN SHORT

  • ग्राम धतूरा में कलेक्टोरेट निर्माण के विरोध में दाखिल PIL वापस
  • कांग्रेस विधायक ने राज्यपाल को पत्र लिखकर की थी अमरपाटन की पैरवी
  • सरकार ने याचिका को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया
  • हाईकोर्ट ने कहा-नई जगह पर निर्माण से विकास और रोजगार बढ़ेगा
  • कोर्ट के रुख के बाद याचिकाकर्ताओं ने खुद वापस ली याचिका

NEWS IN DETAIL

JABALPUR. मैहर जिले में संयुक्त कलेक्टोरेट भवन के स्थान चयन को लेकर चला आ रहा विवाद बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में खत्म हो गया। ग्राम धतूरा में प्रस्तावित कलेक्टोरेट भवन के विरोध में दाखिल जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। कोर्ट के इस रुख के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस ले ली। 

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80% आबादी को नजर अंदाज करने का आरोप

याचिका मैहर के अधिवक्ता प्रदीप तिवारी, आनंद कुमार श्रीवास्तव और समाजसेवी पुष्पेंद्र सिंह की ओर से दाखिल की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि प्रशासन ने जिले की 80 प्रतिशत आबादी की सुविधा को नजरअंदाज किया है। एक दुर्गम, असंतुलित और अव्यवहारिक स्थान ग्राम धतूरा का चयन किया है। 

याचिका में कहा गया था कि अमरपाटन, रामनगर, नादन और बेदरा जैसे दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के लोगों को  कलेक्टोरेट पहुंचने में परेशानियों का सामना करना पडे़गा। जिससे समय, दूरी और खर्च कई गुना बढ़ जाएगा।

मैहर में कलेक्टोरेट भवन बनाने की थी मांग

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि अमरपाटन और रामनगर ब्लॉक में कुल 370 गांव स्थित हैं। यहां 1.24 लाख से अधिक अनुसूचित जाति-जनजाति आबादी और लगभग 3.90 लाख की कुल जनसंख्या निवास करती है।

इसके बावजूद कम आबादी वाले क्षेत्र में कलेक्टोरेट भवन बनाए जाने का निर्णय बहुसंख्यक लोगों के हितों के खिलाफ है। याचिका में उल्लेख किया गया कि रात के समय सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण ग्रामीणों को मजबूरन मैहर में रुकना पड़ेगा। इससे उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानियां बढ़ेंगी।

कांग्रेस विधायक लिख चुके हैं राज्यपाल को पत्र

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार विरोध और ज्ञापन दिए जाने का भी जिक्र याचिका में किया गया था। कांग्रेस विधायक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने इस संबंध में राज्यपाल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग किए जाने की बात भी सामने आई। 

विधायक ने पत्र में कलेक्टोरेट भवन को अमरपाटन क्षेत्र के समीप स्थानांतरित करने की मांग की थी। ताकि बहुसंख्यक ग्रामीण आबादी को राहत मिल सके। हालांकि, राज्यपाल को पत्र भेजे जाने और कई स्तरों पर मांग उठने के बावजूद सरकार ने अपने निर्णय में कोई बदलाव नहीं किया।

सरकारी अधिवक्ताओं ने किया पुरजोर विरोध

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह और अधिवक्ता आकाश मालपानी ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह जनहित याचिका वास्तव में राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। एक स्थानीय कांग्रेस विधायक की मंशा के तहत दाखिल की गई है, जो चाहते हैं कि संयुक्त कलेक्टोरेट मैहर के बजाय अमरपाटन में बने। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि प्रशासनिक और विकास से जुड़े फैसलों में न्यायालय को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

नए क्षेत्र में बना कार्यालय तो होगा क्षेत्र का विकास

हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि कलेक्टोरेट भवन का निर्माण किसी नई जगह पर होता है, तो इससे क्षेत्र का विकास होगा और रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। अदालत ने प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप से इनकार किया और याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने याचिका वापस ले ली, और कलेक्टोरेट भवन का निर्माण ग्राम धतूरा में ही जारी रहेगा।

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कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए याचिका वापस

कोर्ट के इस रुख के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से जनहित याचिका वापस ले ली गई। इसके साथ ही यह साफ हो गया कि कांग्रेस विधायक की तमाम कोशिशों के बावजूद संयुक्त कलेक्टोरेट भवन मैहर जिले में ही ग्राम धतूरा में बनाया जाएगा, न कि अमरपाटन में।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट PIL जनहित याचिका मैहर राज्यपाल को पत्र अमरपाटन कांग्रेस विधायक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह
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