मनरेगा का डिजिटल डाका: फोटोशॉप से मस्टर रोल-एआई से मजदूर, पंचायतों में भ्रष्टाचार की नई गारंटी

Sanjay Sharma | Feb 13, 2026, 14:44 IST
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मध्य प्रदेश में मनरेगा योजना के तहत सॉफ्टवेयर और एआई के जरिए मस्टर रोल पर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए, अधिकारी कार्रवाई को लेकर चुप हैं।

News In Short

  • भले ही मनरेगा का नाम बदल गया, लेकिन भ्रष्टाचार की कहानी वही पुरानी है।
  • सॉफ्टवेयर और एआई की मदद से उनके चेहरे मस्टर रोल पर चिपकाए।
  • सिंगरौली से सिवनी और सागर से मंदसौर तक पोर्टल पर तस्वीरों में फर्जीवाड़ा।
  • कांग्रेस इस योजना में मस्टर रोल के फर्जीवाड़े पर सवाल उठा चुकी है।
  • अफसर नहीं बता पा रहे कि कितने मामलों में एक्शन हुआ है।

News In Detail

BHOPAL. विख्यात साहित्यकार विलियम शेक्सपियर ने कहा था, नाम में क्या रखा है? मध्य प्रदेश की पंचायतों में यह कहावत आज बिल्कुल सटीक बैठ रही है। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर भले ही 'जीरामजी' कर दिया गया हो। लेकिन सिस्टम की रगों में दौड़ता भ्रष्टाचार का 'डीएनए' आज भी वही पुराना है। जहां योजना का मकसद गरीब के हाथ को काम देना था। वहीं अब पंचायतों ने तकनीक को ही भ्रष्टाचार का हथियार बना लिया है।

द सूत्र की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि प्रदेश की पंचायतों में मजदूरों को पसीना बहाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। क्योंकि सॉफ्टवेयर और एआई (AI) के जादू से उनके चेहरे मस्टर रोल पर चिपकाए जा रहे हैं। सिंगरौली से लेकर सिवनी और सागर से लेकर मंदसौर तक, सरकारी पोर्टल पर अपलोड की गई तस्वीरें धांधली की गवाही दे रही हैं।

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कहीं एक ही फोटो को दो अलग-अलग मस्टर में इस्तेमाल किया गया है, तो कहीं पुरानी तस्वीरों के प्रिंटआउट की फोटो खींचकर हाजिरी भर दी गई। डिजिटल इंडिया के इस दौर में पंचायतों ने एडिटिंग और कट-पेस्ट के जरिए लाखों रुपए हड़पने की गारंटी खोज निकाली है। उसने प्रशासनिक कसावट के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

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रोजगार देने में जमकर धांधली

द सूत्र ने प्रदेश के ज्यादातर जिलों में पाया कि पंचायतों द्वारा मजदूरों को रोजगार देने की आड़ में बेधड़क धांधली हो रही है। खेत तालाब, नाला बंधान, सीसी सड़क, ग्रेवल रोड, ग्रामीण लाइब्रेरी और अमृत सरोवर जैसे कामों केवल सॉफ्टवेयर से तैयार फोटोग्राफ में ही नजर आ रहे हैं। इनकी जमीनी हकीकत और वास्तविकता कुछ और ही है।

कांग्रेस ने हाल ही में इस योजना में मस्टर रोल के फर्जीवाड़े पर सवाल खड़े कर, एआई से तैयार फोटोग्राफ के आधार पर भुगतान के आरोप लगाए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सिंगरौली जिले की पंचायतों में भ्रष्टाचार पर टिप्पणी की है।

द सूत्र ने कांग्रेस के आरोपों की तस्दीक करते हुए न केवल सिंगरौली, बल्कि प्रदेश के कई जिलों की जानकारी जुटाई तो हैरान कर देने वाले तथ्य सामने आए हैं। मस्टर रोल तैयार करने में पंचायतों की कारगुजारी को जनपद के अधिकारी नजरअंदाज कर कर रहे हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी से एक-एक पंचायत से लाखों रुपए का गोलमाल हो रहा है।

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हर जिले में हो रही गड़बड़ी

सबसे पहले बात करते हैं, सिंगरौली और सिवनी जिले की उन पंचायतों की। जिनमें रोजगार गारंटी योजना जीरामजी को लेकर कांग्रेस नेताओं ने टिप्पणी की है। मनरेगा के ऑनलाइन अटेंडेंस पोर्टल की पड़ताल की गई, जिसमें पाया कि 10 फरवरी को जिले की केवलारी जनपद की बावली पंचायत के सिंदरसी में कच्ची नाली निर्माण के मस्टर डाले गए हैं। पोर्टल पर मस्टर के साथ दो फोटो अपलोड किए गए हैं। ये दोनों फोटो ही मस्टर में मजदूरी की उपस्थिति को संदेह में डाल रहे हैं।

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एक फोटो में आठ मजदूर दिख रहे हैं, जबकि दूसरे में इनकी संख्या दस है। मस्टर में भी 10 जॉब कार्ड दर्ज किए गए हैं। सिवनी जिले की ही छपारा जनपद में लाटगांव पंचायत में सर्रा से चिखली मार्ग पर रिपटा निर्माण का मस्टर भी हेराफेरी की आशंका को मजबूत करता है। मंगलवार 10 फरवरी के इस मस्टर पर 10 मजदूरों के नाम दर्ज हैं। इसमें जो दो फोटो सुबह 10 बजे और शाम 5 बजे अपलोड किए हैं इनमें संख्या 9 और 8 ही है। यही नहीं दोनों फोटो में मजदूरों के चेहरे भी बदले गए हैं।

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तकनीकी के सहारे घपलेबाजी

अब सिंगरौली जिले की पंचायतों की स्थिति भी देख लीजिए। सिंगरौली के चितरंगी जनपद पंचायत बरहट में अमराहवा टोला में तालाब निर्माण के लिए 2 फरवरी को मस्टर डाला गया है। इसमें 10 मजदूरों को काम करता दिखाया गया है। इसके साथ जो फोटो अपलोड किया गया है, वह पहले से खींची गई प्रिंटेड तस्वीर है। पोर्टल पर अपलोड इस फोटो को देखकर आसानी से समझा जा सकता है।

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सिंगरौली के बरारिहवा में नाला बंधान के मस्टर में तीन फोटो एक साथ अपलोड किए गए हैं। पहले चित्र में दो नाबालिग बच्चे भी नजर आ रहे हैं। वहीं, दूसरा चित्र एक कमरे में बैठे पांच लोगों का है जिसे सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार किया गया है। इस फोटो का फर्श भी इसकी गवाही दे रहा है। वहीं तीसरा चित्र देखकर ही पता चलता है कि इसमें अलग- अलग काम कर रहे लोगों को सॉफ्टवेयर की मदद से एक साथ जोड़ा गया है।

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जरा देखिए भ्रष्टाचार की कहानी कैसी है

सिंगरौली और सिवनी ही, नहीं पूरे प्रदेश की पंचायतों में जीरामजी (VB-G RAM G)की आड़ में जमकर हेराफेरी हो रही रही है। इसके कुछ उदाहरणों से समझें कि आप मजदूरों को काम के सहारे आजीविका देने वाली योजना में भ्रष्टाचार का दीमक कैसे व्यवस्था को चट कर रहा है।

दो मस्टर रोल, एक फोटो

1. सागर जिले की टेहरा टेहरी पंचायत में 2 फरवरी को बड़ी वीर में अमृत सरोवर निर्माण के दो मस्टर डाले हैं। मस्टर रोल नंबर 21069 में मजदूरों की संख्या 10 है जिनमें तीन महिलाएं शामिल हैं। वहीं मस्टर रोल नंबर 21072 में दर्ज 10 मजदूरों में दो महिलाएं हैं। अब चौंकाने वाली बात ये है कि इन दोनों मस्टर के दो अलग-अलग फोटो बिलकुल एक ही स्थान पर खड़े होकर खींचे गए हैं। इनमें एक भी महिला नजर नहीं आ रही है। उससे भी बड़ी बात ये है कि दोनों फोटो में न तो इंच भर जगह बदली है न ही मजदूरों का क्रम और स्थिति।

प्रिंटेड फोटो अपलोड की

2. मंदसौर में तो जीरामजी योजना में हद दर्जे की कारगुजारी की जा रही है। पड़ताल में पता चला है कि 2 फरवरी को भानपुरा जनपद की निवाली पंचायत में निस्तार तालाब निर्माण में हेराफेरी हुई है। गुलाबनगर में इस तालाब के लिए 2 फरवरी को पंचायतकर्मी बजरंग प्रजापति ने मस्टर डाला है। इसके साथ दोपहर 1.36 बजे जो फोटो अपलोड की गई है, वह बरसात के दिनों में खींची गई तस्वीर है। फोटो का प्रिंट मुड़ने की वजह से इसकी सिलवटें साफ नजर आ रही हैं जो कि मस्टर फर्जी होने का इशारा करती हैं।

सॉफ्टवेयर की घटिया कारगुजारी

3. मंदसौर जिले की सीतामऊ जनपद की पंचायतों की कारस्तानी बड़े-बड़े घपलेबाजों को भी शर्मिंदा करने वाली है। भागोर पंचायत में खेल मैदान निर्माण के लिए 2 फरवरी को डाले गए मस्टर रोल के साथ दो फोटो अपलोड किए गए हैं। जिस दूसरे फोटो को अपलोड किया गया है उसमें 10 मजदूर दिख रहे हैं लेकिन यह फोटो सॉफ्टवेयर की घटिया कलाकारी का नमूना है। एडिटेड फोटो में साफ नजर आ रहा है कि लोगों के चित्र काट-छांटकर कैसे चिपकाए गए हैं। इनके चेहरों के आकार के अनुपात से ही स्थिति साफ हो जाती है।

मस्टर रोल भ्रष्टाचार का पिटारा

प्रदेश में ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने वाले मस्टर रोल को भ्रष्टाचार का पिटारा बना दिया गया है।

1 फरवरी को मध्य प्रदेश के जिलों में 27 हजार 643 मस्टर डाले गए जिनमें 2 लाख 25 हजार 627 ग्रामीणों को काम दिया गया।

2 फरवरी को 27 हजार 998 मस्टर डालकर 2 लाख 27 हजार 275 लोगों की मजदूरी दिखाई गई है।

3 फरवरी को 28 हजार 950 मस्टर पर 2 लाख 35 हजार 493 को मजदूरी दी गई।

4 फरवरी को मस्टर रोल की संख्या 28 हजार 855 और मजदूरों का आंकड़ा 2 लाख 34 हजार 517 दर्ज किया गया।

5 फरवरी को 28 हजार 913 मस्टर रोल पर 2 लाख 33 हजार 733 मजदूरों को काम पर उपस्थित दर्ज किया गया।

6 फरवरी को 28 हजार 498 मस्टर पर 2 लाख 28 हजार 456 मजदूरों को काम करता दिखाया गया।

7 फरवरी को मस्टर रोल का आंकड़ा बढ़कर 31 हजार 343 और मजदूरों की संख्या 2 लाख 54 हजार 230 पहुंच गई।

8 फरवरी को 30 हजार 312 मस्टर रोल पर 2 लाख 46 हजार 230 मजदूर काम पर पहुंचे।

9 फरवरी को 30 हजार 407 मस्टर रोल पर मजदूरों का आंकड़ा 2 लाख 45 हजार 229 रहा है।

10 फरवरी को प्रदेश के 52 जिलों में चल रहे 6 हजार 726 कामों के लिए 30 हजार 237 मस्टर अपलोड किए गए हैं।

जिनके माध्यम से 2 लाख 43 हजार 824 मजदूरों को काम देने का दावा किया गया है। जबकि मस्टर रोल की पड़ताल करें तो उनसे ग्रामीणों को काम देने से ज्यादा पंचायतकर्मियों की कमाई की कहानी सामने आती हैं।

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आरोप, पूरे प्रदेश में हो रहा भ्रष्टाचार

कांग्रेस नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि पूरे प्रदेश में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में भ्रष्टाचार हो रहा है। फर्जी मस्टर डालकर मजदूरों के हिस्से की मजदूरी हड़पी जा रही है।

मस्टर के साथ जो फोटो अपलोड किए गए हैं वे सॉफ्टवेयर से एडिट किए गए हैं। पंचायतों में मस्टर के नाम पर हो रही हेराफेरी पर सरकार चुप है। अधिकारी जमकर जेबें भर रहे हैं। कांग्रेस पंचायतों के भ्रष्टाचार का मुद्दा विधानसभा में भी मजबूती के साथ उठाएगी।

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अफसर नहीं बता पाए कितने मामलों में एक्शन

पंचायत एवं ग्रामीण विकास संचालनालय कमिश्नर छोटे सिंह का कहना है कि मनरेगा पोर्टल पर मस्टर रोल और फोटो अपलोड करने की निगरानी मनरेगा सीईओ के निर्देशन में होती है। इसमें सीधे तौर पर संचालनालय या विभाग का दखल नहीं होता है। पंचायतों में मस्टर के नाम पर हो रही हेराफेरी पर कार्रवाई के सवाल पर वे चुप्पी साध गए।
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मनरेगा सीईओ का क्या कहना है

सीईओ अविप्रसाद का कहना था कि पोर्टल पर अपलोड हो रहे मस्टर और फोटो की जांच कराई जाती है। इसमें जहां भी गड़बड़‍ी पकड़ में आती है संबंधित जिला और जनपद स्तर के अधिकारियों के माध्यम से कार्रवाई कराई जाती है। हांलाकि वे यह नहीं बता पाए कि बीते महीनों में प्रदेश के ऐसे कितने मामलों में कार्रवाई की गई है।
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