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BHOPAL. मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने अन्नदाताओं के हित में बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा में वंदे मातरम् गायन के साथ अहम कैबिनेट बैठक शुरू हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कई बड़े फैसले लिए गए।
बैठक का मुख्य फोकस किसानों पर था। किसानों के लिए बोनस और भावांतर राशि मंजूर की गई। इसके अलावा, कई कृषि योजनाओं को अगले पांच सालों तक बढ़ाया गया है।
उड़द और सरसों उत्पादकों की चांदी
सीएम मोहन यादव ने कैबिनेट में लिए गए फैसले की जानकारी विधानसभा में दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मोल दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। कैबिनेट ने उड़द के उपार्जन पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने का प्रस्ताव मंजूर किया है।
इसके साथ ही, सरसों उत्पादकों के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू की जाएगी। राज्य में सरसों उत्पादन में 28 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इसे देखते हुए, 71 लाख टन उत्पादन के आधार पर भुगतान व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज विधानसभा में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' गायन के साथ कैबिनेट की बैठक प्रारंभ हुई। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल शामिल हुए। @DrMohanYadav51@rshuklabjp#CabinetMPpic.twitter.com/pFxB1katkz
— Public Health & Medical Education Department, MP (@healthminmp) February 24, 2026
अगले पांच साल तक जारी रहेंगी पांच बड़ी योजनाएं
किसानों के दीर्घकालिक लाभ को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने पांच प्रमुख कृषि योजनाओं को 2031 तक जारी रखने का फैसला किया है। इन योजनाओं के संचालन के लिए अगले पांच सालों में 10 हजार 520 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। ये योजनाएं एक अप्रैल 2026 से शुरू होकर 2031 तक किसानों को मदद करेंगी।
आधुनिक सिंचाई और पोषण पर होगा जोर
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए दो हजार 400 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इससे किसानों को स्प्रिंकलर और ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक सिंचाई सुविधाओं के लिए अनुदान मिलेगा।
इसके साथ ही, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत तीन हजार 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य धान, गेहूं, दलहन और मोटे अनाज की पैदावार बढ़ाना है। साथ ही, मिट्टी की उर्वरता को भी सुधारने की योजना है।
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प्राकृतिक खेती और तिलहन को मिलेगा बढ़ावा
पर्यावरण और सेहत को ध्यान में रखते हुए नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के लिए एक हजार 10 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। यह योजना प्रदेश को रसायन मुक्त खेती की ओर ले जाएगी।
इसके अलावा, खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - ऑयल सीड योजना में एक हजार 800 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे तिलहन उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
किसानों के मुद्दों पर होगा विशेष सत्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने न केवल फंड दिया, बल्कि किसानों की समस्याओं पर विचार करने के लिए एक विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा है। इस सत्र में वर्तमान योजनाओं की समीक्षा और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य प्रदेश के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
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