मुरैना के लाखों किसानों की जमीन पर फिर संकट के बादल, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
Ratan Kumar Mishra | Jul 13, 2026, 17:13 IST
Photograph: (the sootr)
मुरैना के 61 गांवों की भूमि पर अटल प्रोग्रेस वे परियोजना के तहत अधिग्रहण का खतरा। एनएचएआई ने पुराने गजट के आधार पर आदेश दिया, किसानों में नाराजगी।
ऐसे समझें पूरा मामला..
- भूमि संकट: अटल प्रोग्रेस-वे से मुरैना के 61 गांवों की उपजाऊ जमीन पर संकट गहराया।
- भारी विरोध: किसानों की 90% बहुफसली खेती बचाने के लिए सड़क बीहड़ से निकालने की मांग।
- बयानों में अंतर: पीडब्ल्यूडी मंत्री ने एलाइनमेंट बदलने का वादा किया, पर एनएचएआई पुराने गजट पर अड़ी
- सख्त पाबंदियां: प्रशासन ने इन प्रभावित गांवों में जमीनों की रजिस्ट्री और नई बोरिंग पर रोक लगाई।
- आंदोलन की चेतावनी: मांग पूरी न होने पर किसान सभा ने दोबारा बड़ा आंदोलन शुरू करने की धमकी दी।
मुरैना जिले में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। जौरा क्षेत्र के 61 गांवों के करीब एक लाख, सात हजार किसान परेशान हैं। वजह है अटल प्रोग्रेस वे यानी चंबल एक्सप्रेस वे परियोजना।
अटल प्रोग्रेस वे क्या है
इस निर्माण के लिए बीच में आने वाली जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। यह अधिग्रहण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ – National Highways Authority of India) अधिनियम 1956 की धारा 3(A) के तहत होगा।
पहले क्या हुआ था
चंबल घाटी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने आंदोलन किया। यह मामला मध्य प्रदेश विधानसभा तक पहुंचा।
22 अप्रैल 2026 को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी – Public Works Department) के मंत्री राकेश सिंह ने विधानसभा में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इस बैठक में एलाइनमेंट बदलने का फैसला लिया गया था। सरकार ने कहा था कि सड़क बीहड़ों से निकाली जाएगी। साथ ही दोनों तरफ औद्योगिक गलियारा नहीं बनाया जाएगा। इस आश्वासन के बाद किसानों ने विरोध रोक दिया था।
अब क्यों भड़का विवाद
यह आदेश विधानसभा में दी गई जानकारी से बिलकुल अलग है। इसी वजह से किसानों की नींद उड़ गई है। उन्हें लगता है कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है।
किसानों की मांग
उन्होंने स्थानीय विधायक से मांग की है कि वे विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएं। चंबल घाटी बचाओ संघर्ष समिति और किसान सभा के पदाधिकारियों ने भी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि सड़क को समतल और बहुफसली जमीनों से निकाला गया तो वे फिर आंदोलन करेंगे। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुरूप ही कार्रवाई हो।
रजिस्ट्री-बोरिंग पर रोक
61 गांवों की सूची
FAQ
- अटल प्रोग्रेस वे परियोजना क्या है?
यह राजस्थान के कोटा से शुरू होकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक जाने वाली एक ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना है। इसे चंबल एक्सप्रेस वे भी कहा जाता है। - मुरैना के कितने गांव प्रभावित होंगे?
जौरा क्षेत्र के 61 गांवों की जमीन इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की जानी है। इससे करीब एक लाख, सात हजार किसान प्रभावित होंगे। - किसान विरोध क्यों कर रहे हैं?
सरकार ने विधानसभा में एलाइनमेंट बदलने का आश्वासन दिया था। लेकिन एनएचएआई ने पुराने गजट के आधार पर आदेश जारी कर दिया, जिससे किसान नाराज हैं।
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