एमपी के बरगी डायवर्जन टनल प्रोजेक्ट में 59 करोड़ का खेला, CBI और ED को शिकायत

Sanjay Dhiman | Jul 13, 2026, 18:31 IST
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Photograph: (the sootr)

बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट की स्लीमनाबाद टनल में 59 करोड़ के गलत भुगतान का आरोप लगा है। आरटीआई से खुलासा होने के बाद मामला सीबीआई और लोकायुक्त तक पहुंच गया है।

मध्यप्रदेश की बरगी डायवर्जन परियोजना काफी महत्वपूर्ण सिंचाई योजना है। यह परियोजना कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य नर्मदा नदी के पानी को जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाना है।

इस परियोजना के तहत स्लीमनाबाद में बड़ी टनल बनाई जा रही है। इस टनल निर्माण की लागत समय के साथ काफी बढ़ गई है। शुरुआती अनुमान करीब 800 करोड़ रुपए था। वर्तमान में इसकी लागत लगभग 2000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।

परियोजना में देरी और तकनीकी समस्याओं के कारण कई सवाल उठते रहे हैं। अब भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी विवाद सामने आया है।

59 करोड़ भुगतान पर उठे सवाल

बरगी डायवर्जन परियोजना की स्लीमनाबाद टनल को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि टर्न-की अनुबंध होने के बाद भी अतिरिक्त भुगतान किया गया।

आरटीआई एक्टिविस्ट नीरज मिश्रा ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में करीब 59 करोड़ रुपए के भुगतान पर सवाल उठाए गए हैं।

उनका आरोप है कि परियोजना में ठेकेदार को कई खर्च खुद उठाने थे। इसके बावजूद कुछ कामों के लिए सरकारी राशि से भुगतान किया गया। यह शिकायत लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ और सीबीआई तक पहुंचने की बात कही गई है।

टर्न-की अनुबंध पर विवाद

बरगी डायवर्जन परियोजना का काम पटेल-एसईडब्ल्यू जेवी कंपनी को दिया गया था। यह काम टर्न-की अनुबंध के तहत किया गया था।

टर्न-की अनुबंध में ठेकेदार की जिम्मेदारी ज्यादा होती है। इसमें डिजाइन, निर्माण और तकनीकी जोखिम ठेकेदार को संभालने होते हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे अनुबंध में अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी कंपनी की थी। इसके बावजूद कुछ भुगतान सरकारी स्तर से किए गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।

DMRC की भूमिका पर सवाल

शिकायत के अनुसार वर्ष 2021 में NVDA ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को तकनीकी सलाहकार बनाया था। इसके बाद DMRC की सलाह के आधार पर कई तकनीकी काम किए गए। इनमें पानी निकालने का काम और टनल बोरिंग मशीन की मरम्मत शामिल थी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन कामों के लिए ठेकेदार को अतिरिक्त भुगतान मिला। उनका कहना है कि टर्न-की अनुबंध के नियमों के अनुसार यह खर्च ठेकेदार को उठाना था।

CAG ने भी पकड़ी वित्तीय अनियमितता

देश की सबसे बड़ी जांच संस्था कैग (CAG) ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है। कैग ने 31 मार्च 2023 तक के परियोजना रिकॉर्ड की जांच की थी। जांच के बाद कैग ने करीब 100 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता पकड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार अनुबंध की शर्तों और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। कैग ने साफ कहा कि फोर्स मेज्योर क्लॉज में सिर्फ समय बढ़ाने का नियम है। इसमें ठेकेदार को अलग से कोई भी पैसा देने का प्रावधान बिल्कुल नहीं था।

एक दिन में हुई अनुशंसा पर विवाद

शिकायत के अनुसार 4 मार्च 2023 को तकनीकी राय मांगी गई थी। उसी दिन DMRC की ओर से अनुशंसा पत्र जारी किया गया। इसके बाद भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

NVDA ने आरोपों को बताया गलत

NVDA के तत्कालीन चीफ इंजीनियर राममणि शर्मा ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि विशेषज्ञों की नियुक्ति नियमों के अनुसार की गई थी। उन्होंने बताया कि DMRC के इंजीनियर तकनीकी सलाह के लिए जुड़े थे। उनके अनुसार परियोजना में विशेषज्ञों की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि सभी कामों के लिए जरूरी स्वीकृति ली गई थी। विभाग का कहना है कि शिकायतकर्ता को पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है।

जांच के बाद साफ होगी स्थिति

बरगी डायवर्जन परियोजना मध्यप्रदेश की बड़ी जल परियोजनाओं में शामिल है। इसलिए इससे जुड़े हर वित्तीय मामले पर निगरानी जरूरी है। फिलहाल भुगतान विवाद को लेकर आरोप और विभागीय जवाब सामने हैं। जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

FAQ

  1. बरगी डायवर्जन टनल परियोजना क्या है?
    बरगी डायवर्जन परियोजना मध्यप्रदेश की बड़ी सिंचाई योजना है। इसमें स्लीमनाबाद टनल का निर्माण शामिल है। इसका उद्देश्य नर्मदा नदी के पानी को क्षेत्रों तक पहुंचाना है।
  2. बरगी डायवर्जन टनल भुगतान विवाद क्या है?
    बरगी डायवर्जन टनल भुगतान विवाद 59 करोड़ रुपए के कथित अतिरिक्त भुगतान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि टर्न-की अनुबंध के बावजूद राशि जारी की गई।
  3. CAG ने बरगी डायवर्जन परियोजना पर क्या आपत्ति जताई?
    CAG रिपोर्ट में परियोजना की वित्तीय प्रक्रिया और अनुबंध नियमों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि अंतिम स्थिति जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई से स्पष्ट होगी।
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