MP BJP की कोर ग्रुप बैठक में मंत्रियों ने अफसरों पर उठाए सवाल, संगठन की गुटबाजी पर भी हुई चर्चा
Sumit Kumar | Oct 02, 2026, 14:01 IST
एमपी बीजेपी की कोर ग्रुप बैठक में अफसरों के रवैये, प्रशासनिक कामकाज और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
मध्य प्रदेश भाजपा की पहली कोर ग्रुप बैठक में सत्ता और संगठन से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। बैठक में प्रदेश सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने प्रशासनिक कामकाज, अफसरों के रवैये और संगठन की अंदरूनी स्थिति को लेकर अपनी बात रखी। बैठक में नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी भी मौजूद रहे।
MP BJP की बैठक में क्या मुद्दे आए सामने
भाजपा प्रदेश कार्यालय, भोपाल में आज भाजपा प्रदेश कोर कमेटी की बैठक संपन्न हुई। pic.twitter.com/p4kPZPzaZc
— BJP Madhya Pradesh (@BJP4MP) September 30, 2026
डिप्टी सीएम ने अफसरों के रवैये पर उठाए सवाल
उन्होंने एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के घर में घुसने से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया। शुक्ला ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर प्रशासन को सावधानी से काम करना चाहिए।
इसी चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब महत्वपूर्ण विभाग आपके पास है, तब कफ सिरप जैसी घटना कैसे हो जाती है।
आज भाजपा प्रदेश कार्यालय, भोपाल में प्रदेश कोर कमेटी की बैठक संपन्न हुई।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) September 30, 2026
बैठक में प्रदेश की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन, जनहित से जुड़े विषयों और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री एवं नवनियुक्त प्रदेश… pic.twitter.com/1fbX1S6zS7
शिवराज ने कलेक्टरों के प्रोटोकॉल पर उठाया मुद्दा
उनकी बात के बाद अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय पर भी चर्चा हुई। बैठक में यह बात सामने आई कि प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
तीन महीने में गुटबाजी खत्म करने का निर्देश
उन्होंने कहा कि पहले बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करें। इसके बाद भी कोई नेता या पदाधिकारी नहीं मानता है, तो उसका नाम और मोबाइल नंबर प्रदेश नेतृत्व तक भेजा जाए।
होर्डिंग और महंगे गिफ्ट पर भी निर्देश
उन्होंने जेसीबी से फूल बरसाने और महंगे गिफ्ट देने जैसी परंपराओं को बंद करने की बात भी कही। संगठन को ज्यादा अनुशासित और सादगीपूर्ण तरीके से काम करने का संदेश दिया गया।
सरकारी योजनाओं पर संगठन की भी जवाबदेही
नए प्रभारी और सह प्रभारी रेखा वर्मा का पहला दौरा भी वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के साथ बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद पर केंद्रित रहा। इससे साफ है कि नेताओं से लेकर बूथ स्तर तक संगठन की कार्यप्रणाली को एक लाइन में लाने पर जोर है।
अब असली चुनौती निर्देश लागू करने की
नाम और मोबाइल नंबर ऊपर भेजने की व्यवस्था जवाबदेही तय करने में मदद कर सकती है। साथ ही नेतृत्व के सामने यह चुनौती भी रहेगी कि इसका इस्तेमाल वास्तविक अनुशासनहीनता की रिपोर्टिंग के लिए हो, न कि स्थानीय प्रतिद्वंद्विता के लिए।
निकाय चुनाव, फिर 2028 की बड़ी परीक्षा
आने वाले चुनावों के लिहाज से भी ये निर्देश महत्वपूर्ण हैं। तीन महीने बाद असली तस्वीर इससे साफ होगी कि कितने विवाद सुलझे, कितने मामलों में कार्रवाई हुई और संगठनात्मक निर्देशों का कितना पालन हुआ।
बैठक का फोकस संगठन और प्रशासन दोनों पर
आने वाले महीनों में अब निगाह इस बात पर रहेगी कि बैठक में दिए गए निर्देशों का जमीन पर कितना पालन होता है।
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