धर्मांतरण रोकने के लिए संविधान में हो बदलाव, सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा
Aman Vaishnav | Mar 28, 2026, 12:28 IST
mp bjp sansad sumer singh solanki conversion reservation
मध्य प्रदेश के बीजेपी सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने राज्यसभा में धर्मांतरण का मुद्दा उठाया। सोलंकी ने कहा कि अब पूरे देश में एक कड़ा कानून बनाने की जरूरत महसूस हो रही है।
एमपी से बीजेपी सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने शुक्रवार 27 मार्च को धर्मांतरण को लेकर सदन में आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म परिवर्तन करेंगे उन्हें आरक्षण का फायदा नहीं मिलना चाहिए। धर्मांतरित लोग आरक्षण की सुविधा पर डाका डाल रहे हैं।
सोलंकी ने यह बात आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए रखी। उन्होंने कहा कि किसी ने धर्मांतरण किया तो उसे आदिवासी आरक्षण से बाहर कर उसे डी-लिस्टिंग किया जाए। उनके मुताबिक सरकार को इस मुद्दे पर सख्त कानून बनाना चाहिए।
सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने शून्य काल में यह मुद्दा उठाकर कहा कि देश में सभी को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है।
वहीं सोलंकी ने ये भी कहा कि अगर किसी को छल, दबाव या प्रलोभन देकर धर्म बदलवाया जाता है तो यह एक कानूनी अपराध है। सोलंकी ने कहा की कि धर्मांतरण को रोकने के लिए संविधान में बदलाव किया जाए।
बीजेपी के मध्य प्रदेश से सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा कि जो आदिवासी समाज के लोग धर्म बदलते हैं, उनका आरक्षण खत्म हो जाना चाहिए। उन्हें डी-लिस्ट कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये लोग जनजाति समाज के हक पर डाका डाल रहे हैं।
राज्यसभा में सोलंकी ने कहा कि कई राज्यों में धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं। अब पूरे देश में एक कड़ा कानून बनाने की जरूरत महसूस हो रही है। इससे आदिवासी समाज के अधिकारों और उनकी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा हो सकेगी।
सोलंकी ने 24 मार्च 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी वर्ग के मामले में दिए गए फैसले का स्वागत किया। इसमें कहा गया था कि अगर किसी ने धर्म बदला तो उनका आरक्षण खत्म हो जाएगा।
सोलंकी ने कहा कि इस तरह का कानून जनजाति समाज के धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए भी होना चाहिए और उन्हें घर वापसी का मौका मिलना चाहिए।
सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा कि आज धर्मांतरण हमारे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है। हमें इस पर गंभीरता से सोचना पड़ेगा। आदिवासी समाज हमेशा से सनातन धर्म, संस्कृति और परंपराओं को मानता आया है। धर्मांतरण के कारण आज उनकी पहचान खतरे में है। यह हम सभी के लिए चिंता की बात है।
सोलंकी ने कहा कि आज धर्मांतरण के लिए छल, डर, आर्थिक लालच, नौकरी, इलाज, शिक्षा का बहाना और अंधविश्वास फैलाने जैसी विधियों का इस्तेमाल हो रहा है। यहां तक कि शादी और सामूहिक धर्मांतरण भी हो रहे हैं जो संगठित अपराध की श्रेणी में आते हैं।
यह सब कुछ कई राज्यों में चल रहा है। इससे जनजाति संस्कृति, परंपराएं और रीति-रिवाजों को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। कई सामाजिक संगठनों और आदिवासी नेताओं ने इस धर्मांतरण को रोकने की मांग की है।
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सोलंकी ने यह बात आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए रखी। उन्होंने कहा कि किसी ने धर्मांतरण किया तो उसे आदिवासी आरक्षण से बाहर कर उसे डी-लिस्टिंग किया जाए। उनके मुताबिक सरकार को इस मुद्दे पर सख्त कानून बनाना चाहिए।
धर्मांतरण रोकने के लिए संविधान में बदलाव
वहीं सोलंकी ने ये भी कहा कि अगर किसी को छल, दबाव या प्रलोभन देकर धर्म बदलवाया जाता है तो यह एक कानूनी अपराध है। सोलंकी ने कहा की कि धर्मांतरण को रोकने के लिए संविधान में बदलाव किया जाए।
जनजाति समाज का हक मारा जा रहा
धर्मांतरण रोकने के लिए कानून की जरूरत
सोलंकी ने 24 मार्च 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी वर्ग के मामले में दिए गए फैसले का स्वागत किया। इसमें कहा गया था कि अगर किसी ने धर्म बदला तो उनका आरक्षण खत्म हो जाएगा।
सोलंकी ने कहा कि इस तरह का कानून जनजाति समाज के धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए भी होना चाहिए और उन्हें घर वापसी का मौका मिलना चाहिए।
डरा धमकाकर हो रहा धर्मांतरण- सोलंकी
सोलंकी ने कहा कि आज धर्मांतरण के लिए छल, डर, आर्थिक लालच, नौकरी, इलाज, शिक्षा का बहाना और अंधविश्वास फैलाने जैसी विधियों का इस्तेमाल हो रहा है। यहां तक कि शादी और सामूहिक धर्मांतरण भी हो रहे हैं जो संगठित अपराध की श्रेणी में आते हैं।
यह सब कुछ कई राज्यों में चल रहा है। इससे जनजाति संस्कृति, परंपराएं और रीति-रिवाजों को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। कई सामाजिक संगठनों और आदिवासी नेताओं ने इस धर्मांतरण को रोकने की मांग की है।
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