भाजपा कार्यसमिति में फिर VIP एंट्री! जमीनी कार्यकर्ता इंतजार में, पूर्व कांग्रेसियों को बड़ी जिम्मेदारी
Ramanand Tiwari | Jun 24, 2026, 08:15 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति में 17 मंत्रियों और पूर्व कांग्रेस नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिलीं। इससे जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और संगठनात्मक संतुलन पर सवाल उठे।
करीब 11 महीने के इंतजार के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मध्य प्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति घोषित कर दी है। लेकिन सूची सामने आते ही संगठन के भीतर एक पुरानी बहस फिर तेज हो गई है।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा में वर्षों से मेहनत करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की तुलना में प्रभावशाली नेताओं और दल बदलकर आए चेहरों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है?
नई कार्यसमिति में प्रदेश सरकार के 17 मंत्रियों को जगह दी गई है। वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए कई नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इससे संगठन के भीतर कार्यकर्ता बनाम प्रभावशाली नेताओं की चर्चा तेज हो गई है।
नई कार्यसमिति की सबसे चर्चित बात कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले नेताओं की मजबूत मौजूदगी रही। कभी भाजपा के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने वाले और भाजपा की नीतियों के मुखर आलोचक रहे कई नेता अब संगठन की सबसे प्रभावशाली इकाई का हिस्सा बन गए हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे सुरेश पचौरी को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। वहीं छिंदवाड़ा के वरिष्ठ नेता और कमलनाथ के करीबी माने जाने वाले दीपक सक्सेना को भी यही जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रदेश कार्यसमिति में कांग्रेस से भाजपा में आए कई प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी, दीपक सक्सेना, अखंड प्रताप सिंह, तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, ऐदल सिंह कंसाना, उदय प्रताप सिंह, रक्षा पिरोनिया, गिर्राज दंडोतिया, ओपीएस भदौरिया, इमरती देवी और महेंद्र सिंह सिसौदिया जैसे नाम प्रमुख हैं।
संगठन के भीतर चर्चा इस बात की भी है कि वर्षों तक बूथ, मंडल और जिला स्तर पर काम करने वाले अनेक कार्यकर्ता आज भी बड़े पदों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, दल बदलकर आए नेताओं को लगातार संगठन और सत्ता दोनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती दिखाई दे रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का नेतृत्व चुनावी मजबूती और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है।
हालांकि, इससे उन कार्यकर्ताओं में असंतोष की भावना भी पैदा हो सकती है जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हैं।
प्रदेश में कई मंडल और निगमों में नियुक्तियों को लेकर पहले से ही खींचतान की चर्चा है। कई वरिष्ठ नेता अपने समर्थकों को जिम्मेदारी दिलाने की कोशिशों में जुटे बताए जाते हैं। ऐसे माहौल में कार्यसमिति की सूची ने यह संदेश भी दिया है कि संगठन अभी भी प्रभावशाली चेहरों को साधने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
बीजेपी कार्यसमिति से एक बात साफ दिखाई देती है कि भाजपा अब उन नेताओं को पूरी तरह अपने संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा मान रही है जो कभी कांग्रेस की पहचान हुआ करते थे।
पार्टी नेतृत्व उन्हें केवल चुनावी सहयोगी नहीं बल्कि संगठन का स्थायी चेहरा बनाने की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या भविष्य में संगठन उन जमीनी कार्यकर्ताओं को भी समान अवसर देगा, जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी पद के पार्टी का झंडा उठाया?
ये खबरें भी पढ़ें...
नई व्यवस्था: मोहन यादव कैबिनेट ने बदला ब्याजमुक्त ऋण का पूरा गणित
बैठकों का मैराथन जारी, अब नतीजों की बारी! 24 जून को अफसरशाही की असली परीक्षा
जीवाजी यूनिवर्सिटी को हाईकोर्ट से झटका, स्थाई कर्मियों को देना होगा 7वें वेतनमान का लाभ
विधायक रामेश्वर शर्मा की सिंधी समाज पर टिप्पणी: हाईकोर्ट ने मांगा निचली अदालत का रिकॉर्ड
सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा में वर्षों से मेहनत करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की तुलना में प्रभावशाली नेताओं और दल बदलकर आए चेहरों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है?
नई कार्यसमिति में प्रदेश सरकार के 17 मंत्रियों को जगह दी गई है। वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए कई नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इससे संगठन के भीतर कार्यकर्ता बनाम प्रभावशाली नेताओं की चर्चा तेज हो गई है।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- भाजपा ने करीब 11 माह बाद प्रदेश कार्यसमिति घोषित की।
- प्रदेश सरकार के 17 मंत्रियों को कार्यसमिति में शामिल किया गया।
- कांग्रेस से भाजपा में आए कई नेताओं को भी अहम स्थान मिला।
- पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया।
- पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना को भी स्थायी आमंत्रित सदस्य की जिम्मेदारी मिली।
पूर्व कांग्रेसियों को मिली बड़ी जगह
पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे सुरेश पचौरी को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। वहीं छिंदवाड़ा के वरिष्ठ नेता और कमलनाथ के करीबी माने जाने वाले दीपक सक्सेना को भी यही जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन नेताओं को मिला स्थान
कार्यकर्ताओं के मन में क्या सवाल?
दूसरी ओर, दल बदलकर आए नेताओं को लगातार संगठन और सत्ता दोनों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती दिखाई दे रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का नेतृत्व चुनावी मजबूती और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है।
हालांकि, इससे उन कार्यकर्ताओं में असंतोष की भावना भी पैदा हो सकती है जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हैं।
निगम-मंडल की राजनीति भी चर्चा में
राजनीतिक संदेश क्या है?
पार्टी नेतृत्व उन्हें केवल चुनावी सहयोगी नहीं बल्कि संगठन का स्थायी चेहरा बनाने की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या भविष्य में संगठन उन जमीनी कार्यकर्ताओं को भी समान अवसर देगा, जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी पद के पार्टी का झंडा उठाया?
ये खबरें भी पढ़ें...
नई व्यवस्था: मोहन यादव कैबिनेट ने बदला ब्याजमुक्त ऋण का पूरा गणित
बैठकों का मैराथन जारी, अब नतीजों की बारी! 24 जून को अफसरशाही की असली परीक्षा
जीवाजी यूनिवर्सिटी को हाईकोर्ट से झटका, स्थाई कर्मियों को देना होगा 7वें वेतनमान का लाभ
विधायक रामेश्वर शर्मा की सिंधी समाज पर टिप्पणी: हाईकोर्ट ने मांगा निचली अदालत का रिकॉर्ड
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava