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BHOPAL. एमपी में मतदाता सूची पुनरीक्षण के काम ने बीएलओ पर जबरदस्त दबाव बना दिया है। सर की डेडलाइन पूरी करने के तनाव में एक सप्ताह में चार बीएलओ को हार्ट अटैक आया, जिनमें कई की मौत हो गई। लगातार फील्ड में ड्यूटी, तकनीकी दिक्कतें और ऑनलाइन काम का बोझ मुसीबत बना है।
एसआईआर सर्वे मध्य प्रदेश को 5 प्वाइंट में समझें👉मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम 4 नवंबर से चल रहा है। 👉बीएलओ अधिकारी घर-घर जाकर फॉर्म भरवा रहे हैं और डेडलाइन 4 दिसंबर है। 👉काम का दबाव और धीमा नेटवर्क अधिकारियों के लिए तनाव का कारण बन गया है। 👉एक सप्ताह में भोपाल, मंडीदीप और दमोह में हार्ट अटैक के कई मामले सामने आए हैं। 👉कर्मचारियों का कहना है कि “टारगेट पूरा करने” का प्रेशर सेहत बिगाड़ रहा है। |
मतदाता सर्वे बना कर्मचारियों की सेहत का चैलेंज
मध्य प्रदेश में चल रहा विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अब अधिकारियों के लिए सिरदर्द बन गया है। एसआईआर सर्वे की डेडलाइन नजदीक आते ही बीएलओ पर काम का प्रेशर बढ़ता जा रहा है। कई कर्मचारी अब शारीरिक तनाव और थकान की वजह से बीमार पड़ रहे हैं।
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महिला बीएलओ को हार्ट अटैक
एमपी बीएलओ हार्ट अटैक: शनिवार को भोपाल के टीटी नगर इलाके में बीएलओ कीर्ति कौशल पुनरीक्षण ड्यूटी पर थीं। अचानक सीने में दर्द हुआ और वे गिर पड़ीं। ड्यूटी टीम ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट अटैक के लक्षण तनाव और थकान की वजह से आए। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है।
मंडीदीप में एक दिन पहले बीएलओ की मौत
राजधानी से सटे मंडीदीप इंडस्ट्रियल क्षेत्र में बीएलओ रमाकांत पांडे की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। गुरुवार रात वे ऑनलाइन मीटिंग में शामिल हुए थे। थोड़ी देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और परिवार ने एम्स में भर्ती कराया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने इसे काम के दबाव से जुड़ा मामला बताया।
दमोह में भी ड्यूटी के दौरान बीएलओ की जान गई
दमोह जिले से भी इसी तरह की घटना सामने आई है। एसआईआर सर्वे ड्यूटी पर तैनात एक बीएलओ की अचानक तबीयत बिगड़ी और अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई। बीएलओ संघ ने कहा कि लगातार फील्ड विजिट और देर रात तक काम करने से कर्मचारियों की हालत बिगड़ रही है। बताया जा रहा है कि अब तक चार बीएलओ की हार्ट अटैक से मौत हो चुकी है।
तकनीकी दिक्कतें बढ़ा रहीं परेशानी
भोपाल जिले के 21 लाख 25 हजार 908 मतदाताओं में से लगभग 20 लाख 87 हजार तक फॉर्म पहुंच गए हैं। लेकिन वेबसाइट फेल होने से डाटा एंट्री में रुकावट आई। बैरसिया विधानसभा ही एकमात्र इलाका रहा जहां 100 फीसदी फॉर्म बंटे। औसत वितरण 98.19 फीसदी दर्ज हुआ है।
फॉर्म भरने में मतदाताओं के भी पसीने छूटे
कई परिवारों में मतदाता सूची से महिला और युवाओं के नाम गायब मिले। बीएलओ को बार-बार लोगों से बहस और शिकायतों का सामना करना पड़ा। कई जगह मतदाता 2003 की लिस्ट में अपने रिश्तेदारों को ढूंढने में परेशान हुए। बीएलओ को एप्लिकेशन से डेटा भेजने में भी मुश्किलें आईं।
काम ज्यादा, दिन कम-तनाव बढ़ता गया
मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए अधिकारियों को 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक समय मिला है। हर दिन घर-घर जाकर लोगों के नाम जोड़ने या हटाने का काम जारी है। लेकिन साइट ना चलने और टारगेट बढ़ने से दबाव लगातार बढ़ गया है। इससे कई कर्मचारी अनिद्रा और उच्च रक्तचाप की शिकायत कर रहे हैं।
अधिकारियों पर सवाल, फील्ड स्टाफ कर रहा अपील
बीएलओ संगठनों ने चुनाव आयोग और जिला प्रशासन से मांग की है कि डेडलाइन बढ़ाई जाए। कर्मचारियों का कहना है कि "काम की रफ्तार से सेहत पर असर पड़ रहा है"। कई जिलों में अधिकारियों ने राहत देने के लिए मीटिंग आवर्स को घटाने की बात कही है।
हेल्थ और टारगेट के बीच जूझते कर्मचारी
तकनीकी तौर पर यह काम जरूरी है ताकि वोटर लिस्ट अपडेट हो सके। लेकिन इसे पूरा करने के लिए पर्याप्त आराम और हेल्थ ब्रेक नहीं मिल पा रहे हैं। कई परिवार अब अपने बीएलओ रिश्तेदारों को ड्यूटी से छुट्टी लेने की सलाह दे रहे हैं।
लोगों में चिंता, सिस्टम पर सवाल
मतदाता सूची अपडेट का उद्देश्य पारदर्शिता है, लेकिन लगातार बढ़ते मौत के मामलों से सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या "सर का प्रेशर" अब कर्मचारियों की जान लेने लगा है? स्थानीय प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद रिपोर्ट दी जाएगी।
जिम्मेदारों की सफाई
प्रशासनिक अधिकारी कह रहे हैं कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। ड्यूटी के दौरान किसी भी परेशानी पर तत्काल मेडिकल मदद उपलब्ध करवाई जा रही है। साथ ही कर्मचारियों को रोजाना काम के बीच आराम करने की सलाह दी गई है।
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आगे क्या?
चुनाव आयोग ने संकेत दिए हैं कि सर्वे प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए कुछ ऑनलाइन तकनीकी बदलाव किए जा सकते हैं। बीएलओ के लिए हेल्थ गाइडलाइन और प्रशिक्षण जारी करने की भी तैयारी है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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