मोहन कैबिनेट की बैठक आज: सांदीपनि स्कूलों की मुफ्त बस सेवा पर हो सकता है बड़ा फैसला, इन मुद्दों पर होगी चर्चा

Sourabh Bhatnagar | Oct 12, 2026, 12:18 IST
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आज होगी मध्यपदेश की कैबिनेट बैठक।
आज होगी मध्यपदेश की कैबिनेट बैठक।

MP Cabinet Meeting: मध्यप्रदेश में आज मोहन कैबिनेट की अहम बैठक होने जा रही है। इसमें कई बड़े प्रस्तावों पर फैसला लिया जा सकता है। सबसे अहम मामला सांदीपनि विद्यालयों की मुफ्त बस सेवा से जुड़ा है। सरकार बच्चों से बस किराया लेने की व्यवस्था शुरू कर सकती है। इसका असर हजारों परिवारों पर पड़ेगा।

इसके अलावा नए जिलों में सरकारी कार्यालय खोलने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। आइए जानते हैं कि आज की बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। ये बैठक दोपहर 3 बजे भोपाल स्थित मंत्रालय में बुलाई गई है।

सांदीपनि स्कूलों की बस सेवा पर फैसला संभव

मध्यप्रदेश के सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बड़ी खबर है। अब तक इन स्कूलों में बच्चों को मुफ्त बस सुविधा दी जा रही है। सरकार इस व्यवस्था में बदलाव करने पर विचार कर रही है।

स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को आज होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जा सकता है। चर्चा के बाद इसे मंजूरी मिलने की संभावना है।

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो अभिभावकों को बस का किराया देना पड़ सकता है। इससे बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च में बढ़ोतरी होगी।

कलेक्टर तय कर सकेंगे बस का किराया

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव में कलेक्टरों को नई जिम्मेदारी देने की बात कही गई है। इसके तहत जिले में संचालित सांदीपनि विद्यालयों की बसों का किराया कलेक्टर तय कर सकेंगे।

कलेक्टर अपने जिले की परिस्थितियों के अनुसार किराया निर्धारित कर सकेंगे। अभिभावकों से शुल्क लेने की व्यवस्था भी बनाई जा सकती है।

फिलहाल सरकार ने किराए की कोई राशि तय नहीं की है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी बच्चों को भुगतान करना होगा या कुछ परिवारों को राहत मिलेगी।

School Bus Fee से जुड़ी पूरी तस्वीर कैबिनेट के फैसले के बाद ही साफ होगी।

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प्रदेश के 370 स्कूलों में मुफ्त बस सुविधा

मध्यप्रदेश में फिलहाल 370 सांदीपनि विद्यालयों में बसों से बच्चों को लाने और घर छोड़ने की व्यवस्था संचालित है। यह सुविधा अब तक मुफ्त दी जा रही है।

सरकार इस परिवहन व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई करना चाहती है। इसी वजह से मौजूदा नियमों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।

प्रस्ताव मंजूर होने पर बस सेवा का खर्च अभिभावकों को भी उठाना पड़ सकता है। खासकर उन परिवारों पर इसका असर पड़ेगा जिनके बच्चे रोज बस से स्कूल आते-जाते हैं।

हालांकि अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है। सरकार ने मुफ्त बस सुविधा खत्म करने का अंतिम फैसला नहीं लिया है।

19 जिलों में बच्चों को बस सुविधा नहीं

बस किराया तय करने के प्रस्ताव के बीच एक और समस्या सामने आई है। प्रदेश के 19 जिलों में सांदीपनि विद्यालयों के करीब डेढ़ लाख बच्चों को बस सुविधा नहीं मिल पा रही है।

जानकारी के मुताबिक कई विद्यालयों में बसें ही उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में हजारों बच्चे परिवहन सुविधा से वंचित हैं।

अब सवाल उठ रहा है कि जिन स्कूलों में बसें नहीं हैं वहां पहले परिवहन व्यवस्था शुरू होगी या सरकार किराया लेने की नई व्यवस्था लागू करेगी।

यह भी देखना होगा कि सरकार इन बच्चों के लिए क्या निर्णय लेती है।

Sandipani School Bus Service से जुड़ा यह मुद्दा अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है।

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चार जिलों में खुल सकते हैं नए सरकारी कार्यालय

मोहन कैबिनेट की बैठक में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। यह मामला महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा है।

प्रदेश के मैहर, पांढुर्णा, निवाड़ी और मऊगंज जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यालय खोलने की तैयारी है।

इन कार्यालयों के संचालन के लिए जिला स्तर पर नए पद भी बनाए जा सकते हैं।

प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर संबंधित जिलों में विभागीय कामकाज के लिए अलग कार्यालयों की व्यवस्था हो सकेगी।

MP Cabinet Meeting में इस प्रस्ताव पर भी निर्णय लिया जा सकता है।

सेवा संकल्प अभियान की समीक्षा भी संभव

कैबिनेट बैठक में सेवा संकल्प अभियान की प्रगति पर भी चर्चा हो सकती है। यह अभियान 17 सितंबर से शुरू हुआ था।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रियों के साथ अभियान के तहत हुए कार्यों की समीक्षा कर सकते हैं।

इस दौरान विभिन्न विभागों के कामकाज और अभियान की प्रगति को लेकर जानकारी ली जा सकती है।

आज की बैठक पर अभिभावकों की नजर

आज की कैबिनेट बैठक में कई जरूरी फैसले लिए जाने की संभावना है। इनमें सांदीपनि विद्यालयों की बस सेवा से जुड़ा प्रस्ताव सबसे ज्यादा चर्चा में रह सकता है।

यदि सरकार प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो बच्चों की मुफ्त परिवहन सुविधा के नियम बदल सकते हैं। इसके बाद किराया तय करने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को मिल सकती है।

फिलहाल अभिभावकों को अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा। कैबिनेट की मंजूरी और नए नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितना किराया देना पड़ेगा और किन परिवारों पर इसका असर होगा।
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