प्लॉट खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर: कॉलोनी वैध है या अवैध, एक क्लिक में करें चेक
Jitendra Shrivastava | Jul 13, 2026, 17:05 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश सरकार ने ABPAS 3.0 सिस्टम लागू किया है। अब लोग एक क्लिक में जान सकेंगे कि कॉलोनी वैध है या अवैध। रेरा रजिस्ट्रेशन और अन्य मंजूरियां भी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- अब कॉलोनी वैध है या अवैध, जानें एक क्लिक में।
- MP में घर खरीदने से पहले जरूर पढ़ें यह खबर।
- बिल्डर्स की पूरी कुंडली अब आपकी मुट्ठी में खुलेगी।
- नया डिजिटल सिस्टम बदलेगा घर खरीदने का पूरा तरीका।
- ABPAS 3.0 से मिलेगी सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति।
मकान या फ्लैट खरीदने से पहले लोग अक्सर परेशान रहते हैं। कॉलोनी वैध है या अवैध, यह पता लगाना मुश्किल होता था। अब मध्य प्रदेश सरकार ने इस समस्या का हल निकाला है। नगरीय निकायों में लागू सिस्टम को अपग्रेड कर दिया गया है।
प्लॉट खरीददारों के लिए बड़ी राहत
ABPAS 3.0 क्या है?
इस प्लेटफॉर्म पर कई बड़े विभाग जोड़े गए हैं। इनमें राजस्व विभाग, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और सम्पदा 2.0 शामिल हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी और राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से भी सीधा लिंक मिलेगा। इससे एनओसी (NOC – No Objection Certificate) लेने में देरी नहीं होगी।
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सिस्टम में क्या बदलेगा
अगर कोई कमी होगी तो सॉफ्टवेयर खुद कारण बताएगा। इससे आवेदकों को बार-बार दफ्तर नहीं जाना पड़ेगा। पहले फाइल कई स्तरों से गुजरती थी। एक आपत्ति पर महीनों का समय लग जाता था। अब आवेदन के साथ ही ऑटो स्क्रूटनी हो जाएगी।
जानें 5 बड़े बदलाव...
- पहला, पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल होगी। कागजी फाइलें जमा करने की जरूरत नहीं रहेगी।
- दूसरा, तकनीकी जांच सीधे सॉफ्टवेयर करेगा। सेटबैक, एफएआर (FAR – Floor Area Ratio), भवन की ऊंचाई और पार्किंग जैसे मानक जांचे जाएंगे।
- तीसरा, छोटे प्लॉटों को राहत मिलेगी। 186 वर्गमीटर यानी करीब 2000 वर्गफीट तक के प्लॉट पर शर्तें पूरी होने पर अपने आप मंजूरी मिल जाएगी। 300 वर्गमीटर तक के मामलों में आर्किटेक्ट या इंजीनियर के डिजिटल सर्टिफिकेट से काम शुरू हो सकेगा।
- चौथा, निर्माण के हर चरण की निगरानी ऑनलाइन होगी। प्लिंथ लेवल जांच से लेकर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट तक सब कुछ दर्ज होगा।
- पांचवां, गलत जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई होगी। ऐसे आर्किटेक्ट और इंजीनियरों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। गलत नक्शे पर मिली मंजूरी भी रद्द हो जाएगी।
इंजीनियरों की नई भूमिका
उनका मुख्य काम फील्ड निरीक्षण करना होगा। बड़े और जटिल मामलों की गहराई से जांच भी वे ही करेंगे। भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और गुणवत्ता पर भी उनकी निगरानी रहेगी।
आम लोगों को क्या फायदा
घर बनाने वालों को भी राहत मिलेगी। नक्शा पास कराने में महीनों नहीं लगेंगे। छोटे प्लॉट मालिकों के लिए प्रक्रिया और आसान हो गई है। इससे समय और पैसा दोनों की बचत होगी।
क्यों अहम है यह कदम
हालांकि, शुरुआती दौर में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। सर्वर से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। सरकार को इन्हें समय रहते ठीक करना होगा। तभी आम लोगों को इसका पूरा फायदा मिलेगा।
FAQ
- ABPAS 3.0 क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार का डिजिटल बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम है। इससे भवन निर्माण की मंजूरी पूरी तरह ऑनलाइन मिलेगी। कॉलोनी की वैधता भी इसी प्लेटफॉर्म पर पता चलेगी। - कॉलोनी वैध है या अवैध, यह कैसे पता चलेगा?
नए सिस्टम पर कॉलोनाइजर लाइसेंस और रेरा रजिस्ट्रेशन की जानकारी एक साथ मिलेगी। बस एक क्लिक में यह डेटा देखा जा सकेगा। इससे खरीदार को धोखाधड़ी से बचाव मिलेगा। - छोटे प्लॉट मालिकों को क्या फायदा होगा?
186 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर शर्तें पूरी होने पर अपने आप मंजूरी मिलेगी। इसे "डीम्ड अप्रूवल" कहा गया है। इससे समय की बड़ी बचत होगी।
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