एमपी में जल्द लागू हो सकता है महंगाई भत्ता, लाखों संविदा कर्मियों को मिलेगा लाभ!

Aman Vaishnav | Jan 25, 2026, 10:38 IST
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mp contract employees demand da equal regular staff
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मध्यप्रदेश के 2.50 लाख संविदा कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (डीए) देने की चर्चा चल रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय और वित्त विभाग के बीच इस मुद्दे पर बातचीत जारी है। कर्मचारियों की प्रमुख मांग यह है कि उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसा महंगाई भत्ता मिले।

News In Short

  • मध्यप्रदेश के 2.50 लाख संविदा कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देने की चर्चा चल रही है।
  • कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसा महंगाई भत्ता मिले।
  • 2023 में बनी नीति को विभागों ने लागू नहीं किया है, कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिला।
  • कर्मचारियों ने लंबे समय से चल रही कई मांगों को लेकर सरकार से फैसले की उम्मीद जताई है।

News In Detail

संविदा कर्मचारियों का DA मामला

मध्यप्रदेश के 2.50 लाख संविदा कर्मचारियों को महंगाई सूचकांक की बजाय महंगाई भत्ता (डीए) दिए जाने पर चर्चा चल रही है। मुख्यमंत्री सचिवालय और वित्त विभाग के बीच इस मामले में बातचीत जारी है। फिलहाल, सरकार इन कर्मचारियों को महंगाई सूचकांक (जो दिहाड़ी मजदूरों के लिए होता है) के हिसाब से पैसा देती है, जबकि उनकी ग्रेड-पे कर्मचारियों के बराबर तय की गई है।

संविदा कर्मचारियों की मांग

भारतीय मजदूर संघ से जुड़े संविदा कर्मचारी संघ के लोग सीएम के सचिव आलोक सिंह से बातचीत कर रहे हैं। एमपी संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के संयोजक दिनेश सिंह तोमर ने कहा है कि, संविदा कर्मचारियों की लंबित मांगों में एक सबसे बड़ी मांग है। वो ये है कि उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसा डीए दिया जाए।

इसके अलावा सिर्फ संविदा कर्मचारियों के लिए लागू की गई अप्रेजल प्रणाली को भी खत्म किया जाए। इसमें हर साल कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूवल की जगह कर्मचारी का मूल्यांकन किया जाता है।

30 जनवरी को संविदा कर्मियों का महासम्मेलन

एमपी संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर प्रदेश के संविदा कर्मियों का महासम्मेलन 30 जनवरी को होने जा रहा है। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। इस सम्मेलन में संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता दिए जाने की घोषणा हो सकती है।

ईएल और मेडिकल लीव मिले

सरकार ने 2023 में संविदा कर्मचारियों के लिए एक नीति बनाई थी। अब तक किसी भी विभाग ने इसे लागू नहीं किया है। संविदा कर्मचारियों की मांग है कि जो 10 साल या उससे ज्यादा समय से काम कर रहे हैं, उन्हें नियमित कर्मचारियों के साथ एक समान अधिकार मिलें। उनकी स्थायी नौकरी के लिए एक समिति बनाई जाए।

इसके अलावा, नियमित कर्मचारियों की तरह उन्हें भी अर्जित अवकाश (ईएल) और मेडिकल लीव मिलने चाहिए। 2018 की नीति में यह व्यवस्था थी। 2023 में इसे खत्म कर दिया गया था। साथ ही, सरकार की नीति के तहत संविदा कर्मचारियों को एनपीएस, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा जैसे फायदे भी मिलने चाहिए थे, लेकिन विभागों ने इन सुविधाओं को भी लागू नहीं किया है।



प्रमोशन अतिरिक्त चार्ज पात्रता

संविदा कर्मचारियों की मांगों में कुछ और बातें भी शामिल हैं।

  • बड़े पद खाली होने की स्थिति में अनुभवी संविदा कर्मचारी को पद प्रमोशन अतिरिक्त चार्ज पात्रता प्रदान की जाए।
  • कोई योजना समाप्त की जाती है तो उसके अंतर्गत संविदा कर्मचारियों को अन्य विभाग में अनुमति प्रदान की जाए।
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