आबकारी आरक्षक, सिपाही भर्ती नकल घोटाले ने ऐसे खोली पटवारी भर्ती घोटाले की जांच की पोल
Sanjay Gupta | Mar 23, 2026, 19:40 IST
mp esb recruitment scam ai investigation patwari bharti update
मध्य प्रदेश के पीएमटी घोटाले के बाद सबसे चर्चित घोटाला ईएसबी का पटवारी भर्ती परीक्षा का था, लेकिन इसे क्लीन चिट मिली और दागियों की ज्वाइनिंग हुई। आबकारी आरक्षक, सिपाही भर्ती में हुई शिकायत ने इसकी भी पोल खोल दी है।
कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) ने आबकारी आरक्षक भर्ती में 14 संदिग्ध उम्मीदवारों के खिलाफ नकल घोटाले में एफआईआर कराई। बताया गया कि इन्होंने परीक्षा देते समय अंतिम 20-25 मिनट में ही आंसर दिए और अधिकतम अंक हासिल किए। कम्प्यूटर कॉम्प्रोमाइज हुए और सेंटर से मदद दी गई।
इसी तरह सिपाही भर्ती में भोपाल सेंटर के 12 उम्मीदवारों के खिलाफ भी ऐसे ही मामले में सायबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। वहीं जेल प्रहरी में भी 109 संदिग्ध थे जिसके रिजल्ट रोके गए। अब इन तीनों ही भर्ती परीक्षा ने एक बार फिर पटवारी भर्ती घोटाला 2023 को ताजा कर दिया है।
ईएसबी ने एआई टूल, सीसीटीवी फुटेज व परीक्षा में उम्मीदवार द्वारा दिए जा रहे जवाब के पैटर्न से यह घोटाला स्थापित किया है। इसमें देखा जाता है कि उम्मीदवार कितनी देर में एक प्रश्न कर रहा है। इन मामलो में पाया गया कि अंतिम आधे घंटे में सभी प्रश्न संदिग्ध उम्मीदवारों द्वारा किए गए थे। इसमें सेंटर से ही मदद हुई थे। साथ ही कम्प्यूटर कॉम्प्रोमाइज हुए थे।
साल 2022 नंवबर के में पटवारी, सहायक ग्रेड 3 व अन्य नौ हजार 200 पदों के लिए भर्ती आई थी। 15 मार्च से 26 अप्रैल 2023 तक परीक्षा हुई थी। 30 जून को रिजल्ट आया था। इसमें 12 लाख उम्मीदवारों ने फॉर्म भरे और 9 लाख 78 हजार ने परीक्षा दी थी।
मेरिट सूची आठ हजार 617 उम्मीदवारें की जारी हुई थी। इसमें ग्वालियर के एनआरआई कॉलेज सेंटर से एक-दो नहीं मेरिट के टॉप टेन में से सात उम्मीदवार निकले थे। एक ही सेंटर से 114 उम्मीदवारों का चयन हुआ था।
वहीं टॉप टेन टॉपर्स में से पूजा शर्मा ने 200 में से 183.36 अंक हासिल किए थे। पूजा के साथ ही ग्वालियर के इस सेंटर से टॉप टेन में पूनम राजावत, कृष्णा कुशवाह, पूजा रावत, मधुलता गड़वाल, आकाश शर्मा और अंकिता मीना थे।
विवाद होने पर चुनावी साल के चलते तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जुलाई 2023 में रिटायर जस्टिस राजेंद्र वर्मा की कमेटी बना दी थी। इसकी जांच रिपोर्ट चुनाव नतीजों के बाद 30 जनवरी 2024 को जमा हुई थी। इसमें कहा गया था कि घोटाला नहीं हुआ क्लीन चिट दी गई। इसके बाद सभी को ज्वाइनिंग दे दी गई थी।
जस्टिस वर्मा की कमेटी अकेले विस्तृत जांच कर 74 पन्नों की रिपोर्ट जीएडी को सौंपी। आज तक यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। यहां तक सूचना के अधिकार में भी इसकी कॉपी नहीं दी गई।
कमेटी की रिपोर्ट में था कि जो भी टॉपर्स है उन्होंने अलग-अलग समय दस्तावेज भरे, परीक्षा दी। ऐसे में यह संदेह नहीं किया जा सकता है कि किसी गड़बड़ी से वह टॉपर बने हैं।
एक ही सेंटर से 114 चयन होने पर भी शंका नहीं की जा सकती है। क्योंकि उम्मीदवार लाखों में थे। कई सेंटर से 200-200 भी चयन हुए हैं।
एक ही सेंटर से टॉपर अधिक आने से पूरी परीक्षा पर संशय नहीं कर सकते हैं। जिन्होंने हिंदी में हस्ताक्षर किए और मेरिट में आए उन्हें अंग्रेजी में पूरे अंक नहीं आए हैं। इससे केवल हिंदी हस्ताक्षर के कारण चयन पर सवाल नहीं उठता।
इस मामले में सबसे बड़ी बात है कि जांच कमेटी एकल सदस्यीय थी। उन्हें टेक्निकल सुविधा और टीम नहीं मिली। ना ही संदिग्ध, दागियों के आंसर पैटर्न की विस्तृत रिपोर्ट ईएसबी द्वारा कमेटी को दी गई थी।
कमेटी के पास जांच के लिए केवल उम्मीदवारों के फार्म व अन्य दस्तावेज थे। ईएसबी द्वारा यही दस्तावेज उनके उपलब्ध कराए गए थे।
जिस तरह से आबकारी और सिपाही भर्ती में एआई टूल व आईटी किट के जरिए उम्मीदवारों का उनके कम्प्यूटर से डेटा लेकर आंसर देने का पैटर्न जांचा गया था। वह पटवारी भर्ती परीक्षा में हुआ ही नहीं था।
इसके चलते यह कभी जांचा ही नहीं गया कि इन संदिग्ध उम्मीदवारों ने क्या एकदम से आखिर में आंसर दिए थे। ना ही ये जांचा गया कि इन उम्मीदवारों ने फिर सही तरह से परीक्षा दी थी।
कमेटी केवल एक सदस्यीय थी। कमेटी को कभी भी वह तकनीकी संसाधन मुहैया ही नहीं कराए गए जिससे इस तरह की विस्तृत जांच की जा सके।
कमेटी ने मुख्य तौर पर एनआरआई सेंटर के दागियों के फॉर्म, उनके हस्ताक्षर देखे। साथ ही मूल अंक व नॉर्मलाइजेशन के बाद के अंक यही मोटे तथ्य देखे। इसे लेकर सार्वजनिक सूचना लेकर बयान लिए।
चूंकि बयान देने वालों के पास भी यह टेक्निकल जानकारी नहीं थी। ना ही आंसर देने का पैटर्न था। ऐसे में कमेटी के पास यह जानकारी कभी आई ही नहीं। केवल यही तरीका था जिससे यह साबित होता कि कम्प्यूटर कॉम्प्रोमाइज हुए और संदिग्ध उम्मीदवारों ने चीटिंग की है।
ये खबरें भी पढ़िए...
ईएसबी ने रोका पुलिस आरक्षक भर्ती का रिजल्ट, हाईकोर्ट से अभ्यर्थी को मिली राहत
मध्यप्रदेश न्यूज: ईएसबी की तीन परीक्षा में नकल घोटाले में अलग-अलग रवैया, कंपनी का नाम किसी में भी नहीं
ईएसबी की सिपाही, आबकारी परीक्षा के नकल घोटाले में FIR, लेकिन जेल प्रहरी में हुआ बड़ा खेल दबा दिया
एमपी न्यूज: व्यापमं आरक्षक भर्ती घोटाला: दोषियों को सजा सुनाने के लिए पहली बार रात 8 बजे तक चली सुनवाई
इसी तरह सिपाही भर्ती में भोपाल सेंटर के 12 उम्मीदवारों के खिलाफ भी ऐसे ही मामले में सायबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। वहीं जेल प्रहरी में भी 109 संदिग्ध थे जिसके रिजल्ट रोके गए। अब इन तीनों ही भर्ती परीक्षा ने एक बार फिर पटवारी भर्ती घोटाला 2023 को ताजा कर दिया है।
कैसे माना सिपाही आबकारी आरक्षक में घोटाला
पटवारी भर्ती में क्या हुआ था
मेरिट सूची आठ हजार 617 उम्मीदवारें की जारी हुई थी। इसमें ग्वालियर के एनआरआई कॉलेज सेंटर से एक-दो नहीं मेरिट के टॉप टेन में से सात उम्मीदवार निकले थे। एक ही सेंटर से 114 उम्मीदवारों का चयन हुआ था।
वहीं टॉप टेन टॉपर्स में से पूजा शर्मा ने 200 में से 183.36 अंक हासिल किए थे। पूजा के साथ ही ग्वालियर के इस सेंटर से टॉप टेन में पूनम राजावत, कृष्णा कुशवाह, पूजा रावत, मधुलता गड़वाल, आकाश शर्मा और अंकिता मीना थे।
mp esb recruitment scam ai investigation patwari bharti update
इसके बाद बनी जांच कमेटी
जांच कमेटी ने रिपोर्ट में यह माना
कमेटी की रिपोर्ट में था कि जो भी टॉपर्स है उन्होंने अलग-अलग समय दस्तावेज भरे, परीक्षा दी। ऐसे में यह संदेह नहीं किया जा सकता है कि किसी गड़बड़ी से वह टॉपर बने हैं।
एक ही सेंटर से 114 चयन होने पर भी शंका नहीं की जा सकती है। क्योंकि उम्मीदवार लाखों में थे। कई सेंटर से 200-200 भी चयन हुए हैं।
एक ही सेंटर से टॉपर अधिक आने से पूरी परीक्षा पर संशय नहीं कर सकते हैं। जिन्होंने हिंदी में हस्ताक्षर किए और मेरिट में आए उन्हें अंग्रेजी में पूरे अंक नहीं आए हैं। इससे केवल हिंदी हस्ताक्षर के कारण चयन पर सवाल नहीं उठता।
जांच कमेटी के पास यह जानकारी थी ही नहीं
कमेटी के पास जांच के लिए केवल उम्मीदवारों के फार्म व अन्य दस्तावेज थे। ईएसबी द्वारा यही दस्तावेज उनके उपलब्ध कराए गए थे।
जिस तरह से आबकारी और सिपाही भर्ती में एआई टूल व आईटी किट के जरिए उम्मीदवारों का उनके कम्प्यूटर से डेटा लेकर आंसर देने का पैटर्न जांचा गया था। वह पटवारी भर्ती परीक्षा में हुआ ही नहीं था।
इसके चलते यह कभी जांचा ही नहीं गया कि इन संदिग्ध उम्मीदवारों ने क्या एकदम से आखिर में आंसर दिए थे। ना ही ये जांचा गया कि इन उम्मीदवारों ने फिर सही तरह से परीक्षा दी थी।
कमेटी केवल एक सदस्यीय थी। कमेटी को कभी भी वह तकनीकी संसाधन मुहैया ही नहीं कराए गए जिससे इस तरह की विस्तृत जांच की जा सके।
कमेटी ने मुख्य तौर पर एनआरआई सेंटर के दागियों के फॉर्म, उनके हस्ताक्षर देखे। साथ ही मूल अंक व नॉर्मलाइजेशन के बाद के अंक यही मोटे तथ्य देखे। इसे लेकर सार्वजनिक सूचना लेकर बयान लिए।
चूंकि बयान देने वालों के पास भी यह टेक्निकल जानकारी नहीं थी। ना ही आंसर देने का पैटर्न था। ऐसे में कमेटी के पास यह जानकारी कभी आई ही नहीं। केवल यही तरीका था जिससे यह साबित होता कि कम्प्यूटर कॉम्प्रोमाइज हुए और संदिग्ध उम्मीदवारों ने चीटिंग की है।
द सूत्र ने इस मामले में जांच कमेटी के प्रमुख रिटायर जस्टिस राजेंद्र वर्मा जी भी बात की। उनसे यह पूछा कि क्या उन्हें जांच के लिए आंसर पैटर्न व अन्य टेक्निकल जानकारी हासिल हुई थी। इस पर उन्होंने कहा कि मामला बहुत पुराना हो चुका है। इस संबंध में अब डिटेल याद नहीं है।
ईएसबी ने रोका पुलिस आरक्षक भर्ती का रिजल्ट, हाईकोर्ट से अभ्यर्थी को मिली राहत
मध्यप्रदेश न्यूज: ईएसबी की तीन परीक्षा में नकल घोटाले में अलग-अलग रवैया, कंपनी का नाम किसी में भी नहीं
ईएसबी की सिपाही, आबकारी परीक्षा के नकल घोटाले में FIR, लेकिन जेल प्रहरी में हुआ बड़ा खेल दबा दिया
एमपी न्यूज: व्यापमं आरक्षक भर्ती घोटाला: दोषियों को सजा सुनाने के लिए पहली बार रात 8 बजे तक चली सुनवाई
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari