मध्य प्रदेश आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई: राजस्व लक्ष्य पूरा न करने पर दो जिला आबकारी अधिकारी निलंबित
Pawan Modiya | Apr 06, 2026, 21:43 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में राजस्व लक्ष्य पूरा न होने पर दो जिला आबकारी अधिकारी निलंबित। सरकार ने शराब दुकानों के निष्पादन और राजस्व संग्रह में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की।
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के आबकारी विभाग (Excise Department) ने वित्तीय वर्ष 2026–27 की शुरुआत में ही सख्त प्रशासनिक कदम उठाते हुए दो जिला आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि संबंधित अधिकारियों द्वारा राजस्व लक्ष्य (Revenue Target) की पूर्ति नहीं की जा सकी और शराब दुकानों के निष्पादन (Liquor Shop Allotment) में भी लापरवाही सामने आई।
आबकारी आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, बैतूल, अशोकनगर और गुना जिलों में राजस्व संग्रह और शराब दुकानों के संचालन से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम-1966 (MP Civil Services Rules) के तहत कार्रवाई करते हुए अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
यह कदम प्रदेश सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें शासकीय राजस्व (Government Revenue) की प्राप्ति और प्रशासनिक जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
राज्य सरकार के लिए मध्य प्रदेश आबकारी विभाग राजस्व का एक बड़ा स्रोत माना जाता है। शराब दुकानों के लाइसेंस, नीलामी और बिक्री से हर साल करोड़ों का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में यदि किसी जिले में शराब दुकानों के निष्पादन में देरी या अनियमितता होती है तो इसका सीधा असर सरकारी आय पर पड़ता है।
विभागीय जांच में पाया गया कि कुछ जिलों में समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण सरकार द्वारा तय किया गया राजस्व लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। इसी वजह से संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की गई।
आबकारी आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी दो अलग-अलग आदेशों में दो अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
बैतूल
बैतूल जिले के जिला आबकारी अधिकारी अंशुमन सिंह चिडार पर आरोप है कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में शराब दुकानों के निष्पादन में प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
इसके कारण निर्धारित समय पर शराब दुकानों का आवंटन नहीं हो सका। राजस्व संग्रह में गिरावट दर्ज हुई। शासन द्वारा तय राजस्व लक्ष्य अधूरा रह गया। इन परिस्थितियों को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के दौरान मुख्यालय कार्यालय उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता, संभाग भोपाल रहेगा।
दूसरी कार्रवाई गुरुप्रसाद केवट के खिलाफ की गई है, जो अशोकनगर और गुना जिलों के प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी थे।
जांच में पाया गया कि शराब दुकानों के निष्पादन में पर्याप्त तत्परता नहीं दिखाई गई। राजस्व हितों की सुरक्षा में लापरवाही बरती गई। प्रशासनिक निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ। इन कारणों से उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि में मुख्यालय कार्यालय उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता, संभाग ग्वालियर होगा।
दोनों अधिकारियों के निलंबन के आदेश आबकारी आयुक्त दीपक कुमार सक्सेना द्वारा 6 अप्रैल 2026 को जारी किए गए।
इस कार्रवाई से मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राजस्व संग्रह (Revenue Collection) और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नए वित्तीय वर्ष के पहले ही महीने में इतनी बड़ी कार्रवाई होने से प्रदेश के अन्य जिलों के अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में राजस्व से जुड़े विभागों में जवाबदेही और निगरानी और कड़ी की जा सकती है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार सरकार ने सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे मदिरा दुकानों के निष्पादन और राजस्व संग्रह की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाएं। यदि भविष्य में किसी भी जिले में इसी तरह की लापरवाही पाई जाती है तो वहां भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इस कदम को प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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आबकारी आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, बैतूल, अशोकनगर और गुना जिलों में राजस्व संग्रह और शराब दुकानों के संचालन से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम-1966 (MP Civil Services Rules) के तहत कार्रवाई करते हुए अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
यह कदम प्रदेश सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें शासकीय राजस्व (Government Revenue) की प्राप्ति और प्रशासनिक जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
आबकारी विभाग की कार्रवाई क्यों हुई?
विभागीय जांच में पाया गया कि कुछ जिलों में समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण सरकार द्वारा तय किया गया राजस्व लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। इसी वजह से संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की गई।
दो अधिकारियों पर गिरी गाज
बैतूल जिला आबकारी अधिकारी अंशुमन सिंह चिडार निलंबित
इसके कारण निर्धारित समय पर शराब दुकानों का आवंटन नहीं हो सका। राजस्व संग्रह में गिरावट दर्ज हुई। शासन द्वारा तय राजस्व लक्ष्य अधूरा रह गया। इन परिस्थितियों को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के दौरान मुख्यालय कार्यालय उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता, संभाग भोपाल रहेगा।
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अशोकनगर और गुना के प्रभारी अधिकारी गुरुप्रसाद केवट भी निलंबित
जांच में पाया गया कि शराब दुकानों के निष्पादन में पर्याप्त तत्परता नहीं दिखाई गई। राजस्व हितों की सुरक्षा में लापरवाही बरती गई। प्रशासनिक निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ। इन कारणों से उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि में मुख्यालय कार्यालय उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता, संभाग ग्वालियर होगा।
दोनों अधिकारियों के निलंबन के आदेश आबकारी आयुक्त दीपक कुमार सक्सेना द्वारा 6 अप्रैल 2026 को जारी किए गए।
शासन का कड़ा संदेश
नए वित्तीय वर्ष के पहले ही महीने में इतनी बड़ी कार्रवाई होने से प्रदेश के अन्य जिलों के अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में राजस्व से जुड़े विभागों में जवाबदेही और निगरानी और कड़ी की जा सकती है।
क्या अन्य जिलों में भी हो सकती है कार्रवाई?
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