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मध्यप्रदेश की सरकार अब सिर्फ मंत्रालय के बंद कमरों से नहीं, बल्कि खेतों और खलिहानों के बीच से काम करेगी। किसान कल्याण वर्ष-2026 के तहत एक ऐतिहासिक पहल हो रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 2 मार्च को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
आस्था के आंगन में विकास की रणनीति
एमपी कृषि कैबिनेट बैठक के लिए नागलवाड़ी का चुनाव खास है। यहां स्थित 800 साल पुराने भीलट देव मंदिर का जनजातीय समाज में बहुत महत्व है।
कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री सुबह 11:30 बजे इस अहम बैठक की शुरुआत करेंगे। कैबिनेट की बैठक के बाद, मुख्यमंत्री का जुलवानिया के भगोरिया हाट में शामिल होने का भी कार्यक्रम है।
सात जिलों के मुद्दों पर होगी चर्चा
जानकारी के अनुसार, यह पूरी बैठक विशेष रूप से निमाड़ और आसपास के सात जिलों पर केंद्रित रहेगी। इनमें खरगोन, खंडवा, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, झाबुआ और आलीराजपुर शामिल हैं।
इन आदिवासी बहुल जिलों के किसानों के लिए सिंचाई, उन्नत बीज, बेहतर बाजार और उनकी आय दोगुना करने जैसे गंभीर विषयों पर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
नई योजना की हो सकती है शुरुआत
सूत्रों के मुताबिक, उद्यानिकी विभाग इस दौरान मसाला फसलों को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना शुरू कर सकता है। इसके अलावा, पशुपालकों को आधुनिक तरीके सिखाने के लिए ब्राजील में प्रशिक्षण दिलाने का भी विचार है।
साथ ही, किसानों के खातों को समग्र आईडी से जोड़ने पर भी बड़ा फैसला हो सकता है। अब कृषि से जुड़ी सारी जानकारी सीधे किसानों के मोबाइल पर उपलब्ध कराने की योजना भी इस बैठक के एजेंडे में है।
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डेस्टिनेशन कैबिनेट का छठा पड़ाव
बड़वानी में होने वाली यह बैठक प्रदेश की छठी डेस्टिनेशन कैबिनेट होगी। सीएम मोहन यादव की सोच है कि सरकार जनता तक पहुंचे। इससे पहले जबलपुर (भेड़ाघाट), सिंग्रामपुर, महेश्वर, इंदौर और पचमढ़ी में ऐसी सफल बैठकें हो चुकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अब लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी 52 जिलों में ऐसी कैबिनेट बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि राजधानी भोपाल के बाहर भी प्रशासनिक फैसले जल्दी लिए जा सकें।
गांव-गांव तक पहुंचेगी सरकार
यह प्रयोग पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की जिला सरकार की सोच से एक कदम आगे माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सचिवालय एक ऐसी योजना पर काम कर रहा है, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जमीन पर लागू किया जा सके।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनता और किसानों का विश्वास जीतना व क्षेत्रीय विकास में आने वाली रुकावटों को मौके पर ही दूर करना है।
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