एमपी में 15 मार्च से होगी गेहूं खरीदी, 80 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य, SOP जारी

Aman Vaishnav | Mar 08, 2026, 10:47 IST
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mp wheat procurement 2026 targets millers protest
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मध्य प्रदेश सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं खरीदी की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार किसानों की सुविधा के लिए केंद्रों पर कई इंतजाम भी किए गए हैं। इसके लिए राज्य सरकार 20 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने वाली है।

मध्य प्रदेश के किसानों के लिए रबी सीजन की सबसे बड़ी खबर आ गई है। सरकार ने गेहूं की सरकारी खरीदी को लेकर अपनी पूरी तैयारी पुख्ता कर ली है। इस बार न केवल लक्ष्य बड़ा है, बल्कि केंद्रों की व्यवस्थाओं को भी आधुनिक बनाया गया है।

गेहूं खरीदी के लिए एसओपी जारी

रबी सीजन 2026-27 में गेहूं की खरीदी के लिए राज्य सरकार ने मानक संचालन प्रक्रिया एसओपी जारी कर दी है। इस बार राज्य में 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। ये पिछले साल से 5 लाख टन ज्यादा है।

इसके लिए प्रदेश में 3623 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 240 केंद्र सीहोर और 197 केंद्र उज्जैन जिले में बनें हैं। इस बार खास बात यह है कि पहली बार खरीदी केंद्रों की ग्रेडिंग भी की जाएगी।

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20 हजार करोड़ का कर्ज लेगी सरकार

सरकार ने गेहूं खरीदी के लिए 16 प्रकार की सुविधाओं का खाका तैयार किया है। इसमें तौल कांटे, शेड, बाउंड्री वाल, पेयजल, टेंट, बैठने की व्यवस्था, तौल मशीन, इंटरनेट जैसी कई जरूरी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके लिए एक पोर्टल तैयार किया गया है। इसमें सभी केंद्रों को इन सुविधाओं की जानकारी अपलोड करनी होगी।

15 मार्च से खरीदी की शुरुआत

इस बार गेहूं खरीदी खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के जरिए होगी। इसके लिए राज्य सरकार 20 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेगी। खरीदी इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 15 मार्च से 5 मई तक होगी। वहीं बाकी हिस्सों में ये 23 मार्च से 12 मई तक की जाएगी।

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गेहूं खरीदी के नियम

  • इस बार खराब स्थिति वाले गोदामों को गेहूं खरीदी केंद्र नहीं बनाया जाएगा।
  • अब गेहूं खरीदी केंद्र उन गोदामों में बनेंगे, जिनमें पिछले सालों में खराब गेहूं नहीं रखा गया हो।
  • खरीदी केंद्रों को इस तरह से रखा जाएगा कि किसानों को 25 किलोमीटर के दायरे में एक केंद्र मिल जाए।
  • गोदाम और समिति स्तर पर केंद्रों का आकार तीन हजार से पांच हजार टन तक होगा। जरूरत पड़ने पर 50 प्रतिशत बढ़ाया जा सकेगा।
  • जहां 500 टन से कम गेहूं खरीदी हुई है, वहां के केंद्रों को नजदीकी केंद्रों में मिला दिया जाएगा।
  • गेहूं की कुल खरीदी में केवल 1 प्रतिशत ही मानक से कम होगी।
  • सीहोर और उज्जैन के बाद विदिशा में 190, रायसेन में 189, सागर में 176, नर्मदापुरम में 171 और देवास में 136 केंद्र बनाए जाएंगे।

मिलर्स मिलिंग प्रक्रिया का बहिष्कार

मिलर्स और सरकार के बीच अपग्रेडेशन राशि को लेकर विवाद अभी भी बना हुआ है। नागरिक आपूर्ति निगम से अनुबंधित 492 मिलर्स ने अब तक कुल खरीदी गई धान का महज 4% मिलिंग किया है। यह आंकड़ा लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन धान के बराबर है।

मध्य प्रदेश में लगभग 850 राइस मिलर्स हैं। अपग्रेडेशन राशि न मिलने के कारण, मध्यप्रदेश चावल उद्योग महासंघ से जुड़े कई मिलर्स मिलिंग प्रक्रिया का बहिष्कार कर रहे हैं।

अपग्रेडेशन राशि को लेकर मिलर्स नाराज

इस साल 20 जनवरी तक सरकारी खरीद में 7.5 लाख किसानों ने करीब 52 लाख मीट्रिक टन धान बेचा है। पिछले साल की तरह इस साल भी सरकार ने धान खरीदने की नीति में कोई अपग्रेडेशन राशि नहीं दी है। इससे मिलर्स काफी नाराज हैं।

मिलर्स का कहना है कि जब वे धान को मिलिंग करके एफसीआई को भेजते हैं, तो उसमें 67% चावल जमा करना होता है। इसके बाद जो टूटे चावल निकलते हैं, उन्हें 20 रुपए किलो के हिसाब से एथेनॉल प्लांट को बेचते हैं। इस नुकसान को पूरा करने के लिए अपग्रेडेशन राशि दी जाती है।

49.93 लाख मीट्रिक टन धान की मिलिंग अब भी बाकी

नागरिक आपूर्ति निगम के आंकड़े बताते हैं कि, अभी तक 392 मिलर्स ने 5.5 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) धान की मिलिंग का अनुबंध किया है। इनमें से अब तक सिर्फ 2.25 लाख मीट्रिक टन धान की मिलिंग हो पाई है। ये कुल मिलिंग का सिर्फ 4% है। अभी भी 49.93 लाख मीट्रिक टन धान की मिलिंग बाकी है।

निगम के जीएम (मिलिंग) मनोज वर्मा ने कहा कि वो छुट्टी पर हैं। एजीएम (मिलिंग) रजनीश राय ने कहा कि वो इस बारे में कोई जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। मध्यप्रदेश चावल उद्योग महासंघ के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल का कहना है कि, पिछले साल 40% धान मिलर्स ने सीधे खरीद केंद्रों से उठा लिया था। अब उन्हें हर महीने करोड़ों रुपए परिवहन, ब्याज और किराए के रूप में खर्च करने पड़ रहे हैं।

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मिलर्स के नाराज होने का कारण?

सरकार के एक बड़े अधिकारी के अनुसार, कुछ साल पहले सरकार ने मिलर्स को उनकी मशीनों को अपग्रेड करने के लिए पैसे देना शुरू किया था। यह योजना कई सालों तक चलती रही थी। पिछले साल (2025) इसे बंद कर दिया गया था। साथ ही कैबिनेट ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया था। अब मिलर्स उसी राशि को लेकर विरोध कर रहे हैं। हालांकि अभी भी मिलिंग पर 10 रुपए और प्रोत्साहन राशि के रूप में 50 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहे हैं।

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मुख्य रूप से अनाज (जैसे गेहूं, मक्का या चावल) को पीसा जाता है। इसके बाद उसे आटे या अन्य उपयोगी उत्पादों में बदलते हैं। इस विधि को ही मिलर्स मिलिंग प्रक्रिया कहते हैं।

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