रद्दी से भी खेल गए MP के अफसर, सरकारी प्रेस में 3 टन दिखाकर 12 टन माल किया गायब
Amresh Kushwaha | Jul 22, 2026, 12:05 IST
रद्दी से भी खेल गए MP सरकारी प्रेस के अफसर
मध्य प्रदेश के गवर्नमेंट प्रेस में रद्दी कागज बेचने में बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच में पता चला है कि 15 टन रद्दी को कागजों में सिर्फ 3 टन दिखाया गया है। धर्मकांटे की पर्चियों में हेराफेरी से सरकार को करीब 1.34 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेशके सरकारी प्रेस में रद्दी कागज बेचने में बड़ी गड़बड़ी मिली है।
- जांच में असली तौल और सरकारी रिकॉर्ड में बड़ा अंतर मिला है।
- ट्रकों में करीब 29.7 टन रद्दी थी, फाइल में सिर्फ 6.82 टन दिखाई गई।
- इस हेराफेरी से सरकार को करीब 1.34 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है।
- समिति अध्यक्ष के जवाबों में भी कई विरोधाभास सामने आए हैं।
दस्तावेजों की पड़ताल में सामने आया कि पूरे टेंडर के दौरान सरकार को करीब एक करोड़ 34 लाख रुपए का नुकसान हो सकता है। जांच के लिए टीम आधी रात रद्दी से भरे ट्रकों के पीछे गई। टीम उस धर्मकांटे तक पहुंची, जहां ट्रकों की तुलाई हुई थी। वहां से तस्वीरें और वीडियो जुटाए गए।
पड़ताल में पता चला कि असली तुलाई की पर्चियां सरकारी फाइल में मौजूद ही नहीं थीं। मूल रिकॉर्ड में दोनों ट्रकों में करीब 29.7 टन रद्दी दर्ज मिली। सरकारी फाइलों में यह मात्रा घटाकर सिर्फ 6.82 टन कर दी गई। यानी करीब 23 टन रद्दी का हिसाब गायब मिला। सवाल पूछने पर अधिकारियों ने रिकॉर्ड दोबारा जांचने की बात कही।
टेंडर की पूरी कहानी
यह ठेका भोपाल की फर्म मां ट्रेडर्स को मिला था। ठेकेदार को एक महीने में पूरी रद्दी उठानी थी। प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए मई 2026 में एक खास समिति भी बनाई गई। इस समिति के अध्यक्ष प्रभारी लेखा अधिकारी भवेशकांत सिन्हा को बनाया गया।
एग्रीमेंट के मुताबिक रद्दी की दर 32.55 रुपए प्रति किलो तय हुई थी। इसमें सारे टैक्स शामिल थे। परिवहन का खर्च ठेकेदार को खुद उठाना था। नियम के अनुसार 15 टन के ट्रक में कम से कम 12 टन रद्दी होनी जरूरी थी। कंपनी ने जून 2026 में दो चालानों से कुल दो लाख रुपए विभागीय खाते में जमा किए।
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आधी रात ट्रकों का पीछा
इस दौरान पूरी प्रक्रिया को कैमरे में कैद किया गया। वहीं, इस दौरान निगरानी समिति के सदस्य धर्मकांटे पर मौजूद रहने के बजाय पास खड़ी कार में बैठे रहे। कुछ देर बाद धर्मकांटे के कर्मचारी ने तौल पर्चियां कार में ही सदस्यों को थमा दीं। पूरी घटना सामान्य निगरानी प्रक्रिया से काफी अलग नजर आई।
तौल पर्चियों में गड़बड़ी
हैरानी की बात यह रही कि फाइल में संजय स्केल्स की पर्ची थी ही नहीं। इसकी जगह करीब पंद्रह किलोमीटर दूर मिसरौद स्थित भवानी धर्मकांटे की पर्चियां लगी मिलीं। इन पर्चियों पर निगरानी समिति के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर थे।
दोनों धर्मकांटों के आंकड़ों में भारी अंतर था। संजय स्केल्स के रिकॉर्ड में वजन 29 हजार 775 किलो था, जबकि भवानी धर्मकांटे की सरकारी पर्ची में सिर्फ छह हजार 820 किलो दर्ज मिला। यानी दोनों रिकॉर्ड में करीब 22 हजार 955 किलो यानी 23 टन का अंतर आया।
समय को लेकर उठे सवाल
इसके अलावा भवानी धर्मकांटे की दोनों पर्चियों के सीरियल नंबर अलग थे। वहीं, दोनों ट्रकों के नंबर का पहला हिस्सा एक जैसा दिखाया गया। सिर्फ आखिरी अंक अलग थे। इन तमाम बातों से दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सीधे सवाल खड़े होते हैं।
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कितना हुआ राजस्व नुकसान
दो ट्रकों के आधार पर हुई गणना के मुताबिक दोनों रिकॉर्ड के बीच वजन का अंतर लगभग तेईस हजार किलो निकला। बत्तीस रुपए पचपन पैसे प्रति किलो की दर से इन दो ट्रकों पर ही करीब सात लाख सैंतालीस हजार रुपए का नुकसान बनता है। अगर यही अनुपात बाकी अठारह ट्रकों में भी दोहराया गया हो, तो कुल संभावित नुकसान करीब एक करोड़ 34 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।
अफसर के जवाबों में झोल
तुलाई किस धर्मकांटे पर हुई, इस सवाल पर उन्होंने मिसरौद के धर्मकांटे का नाम लिया। वहीं, जब उन्हें बताया गया कि जांच में गोविंदपुरा के धर्मकांटे पर तुलाई मिली है, तो उन्होंने फिर मिसरौद का ही दावा दोहराया। साथ ही कहा कि वे समिति के बाकी सदस्यों से इस बारे में बात करेंगे।
फैक्ट चेक में हुआ खुलासा
सरकार ने दिया जांच का भरोसा
उन्होंने कहा कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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