ग्रामीण भारत में शिक्षा का संकट: 10 साल में बंद हुए 94 हजार सरकारी स्कूल

Manya Jain | Jul 10, 2026, 14:04 IST
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MP government schools closing niti aayog
MP government schools closing niti aayog

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 10 साल में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। इससे छात्रों की संख्या 2.26 करोड़ घटी है, जबकि प्राइवेट स्कूलों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है।

नीति आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। पिछले 10 साल में देश में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। इससे बच्चों के नामांकन में 2.26 करोड़ की कमी आई है।

सरकारी स्कूलों की संख्या 11.07 लाख से घटकर 10.13 लाख रह गई है। वहीं प्राइवेट स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। देश में सरकारी स्कूलों की हालत लगातार चिंताजनक होती जा रही है।

नीति आयोग (NITI Aayog – National Institution for Transforming India) की एक हालिया रिपोर्ट ने इस मुद्दे पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण भारत में स्कूली शिक्षा पर गहरा असर पड़ रहा है।

रोज बंद हो रहे 25 स्कूल

पिछले 10 वर्षों में भारत में हर दिन औसतन 25 स्कूल बंद हुए हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या सरकारी स्कूलों की है। इस वजह से स्कूलों में बच्चों के कुल नामांकन में भारी कमी आई है। यह कमी करीब 2.26 करोड़ की है, जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार देश में सरकारी स्कूलों की संख्या साल 2014-15 में 11.07 लाख थी। यह संख्या साल 2024-25 में घटकर 10.13 लाख रह गई। इसी दौरान सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या भी 83 हजार से घटकर 79 हजार पर आ गई।

दूसरी तरफ तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने आया है। इन्हीं 10 सालों में प्राइवेट स्कूलों की संख्या 2.88 लाख से बढ़कर 3.39 लाख हो गई है। यानी सरकारी स्कूल घटे हैं, लेकिन निजी स्कूलों का विस्तार लगातार हो रहा है।

बच्चों की संख्या क्यों घटी

नीति आयोग की इस रिपोर्ट का नाम है 'स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एनहांसमेंट'। इसके मुताबिक स्कूलों में कुल नामांकन साल 2014-15 के 26.95 करोड़ से घटकर साल 2024-25 में 24.69 करोड़ रह गया है।

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रिपोर्ट में इस गिरावट के पीछे कई वजहें बताई गई हैं। पहली वजह है घटती प्रजनन दर, जिससे स्कूल जाने की उम्र वाले बच्चों की आबादी ही कम हो रही है। दूसरी वजह स्कूलों का आपस में विलय है। तीसरी वजह ऊंची कक्षाओं में बच्चों को रोके रखने की चुनौती है।

स्कूलों का विलय, फायदा या नुकसान

केंद्र सरकार और नीति आयोग ने 'स्कूल कंसॉलिडेशन' यानी स्कूलों के विलय की नीति अपनाई है। इसके तहत कम छात्र संख्या वाले आस-पास के स्कूलों को आपस में मिला दिया गया है। मकसद था बिल्डिंग और टीचर्स जैसे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सके।

लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की राय अलग है। उनका कहना है कि इसी नीति की वजह से बच्चों के एडमिशन भी घटे हैं। जब पड़ोस का स्कूल बंद हो जाता है, तो कई बच्चे स्कूल जाना छोड़ देते हैं। इसमें भी लड़कियों की संख्या ज्यादा है, क्योंकि दूरी बढ़ने से उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ता है।

बड़ी कक्षाओं में छूट रही पढ़ाई

रिपोर्ट में प्राथमिक स्तर के बाद छात्रों के स्कूल छोड़ने पर गहरी चिंता जताई गई है। पहली से पांचवीं तक ड्रॉपआउट दर (Dropout Rate – स्कूल छोड़ने की दर) सिर्फ 0.3% है। लेकिन छठी से आठवीं तक पहुंचते-पहुंचते यह बढ़कर 3.5% हो जाती है।

नौवीं और दसवीं तक आते-आते यह दर 11.5% के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। इसके अलावा आठवीं से नौवीं कक्षा में जाने वाले छात्रों की दर भी घटी है। यह साल 2014-15 के 91.58% से घटकर साल 2024-25 में 86.6% रह गई है।

पुडुचेरी और केरल जैसे राज्यों में यह दर 99.6% जितनी ऊंची है। वहीं बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों में यह काफी कम है।

यूपी-एमपी में सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पिछले दशक में सबसे बड़े पैमाने पर स्कूलों का विलय हुआ है। दोनों राज्यों को मिलाकर करीब 40 हजार स्कूल बंद या मर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि इन दोनों राज्यों में स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा है।

नौवीं के छात्रों को बेसिक गणित में दिक्कत

रिपोर्ट ने माध्यमिक स्तर पर बच्चों की पढ़ाई के स्तर पर भी सवाल उठाए हैं। जांच में पाया गया कि कक्षा नौवीं के कई छात्र बीजगणित (Algebra) और ज्यामिति (Geometry) जैसे कठिन विषयों से जूझ रहे हैं।

इतना ही नहीं, इन छात्रों को प्रतिशत, भिन्न (Fractions) और अनुपात (Ratios) जैसी बुनियादी अवधारणाओं को समझने में भी दिक्कत आ रही है। इससे साफ है कि शुरुआती कक्षाओं की कमियां बड़ी कक्षाओं तक लगातार बनी रहती हैं। यह स्थिति आने वाले सालों में और गंभीर हो सकती है, अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए।

FAQ

  1. पिछले 10 साल में भारत में कितने सरकारी स्कूल बंद हुए हैं?
    नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 साल में भारत में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। इससे बच्चों के नामांकन में 2.26 करोड़ की कमी आई है।
  2. सरकारी स्कूल बंद होने की मुख्य वजह क्या है?
    रिपोर्ट के अनुसार घटती प्रजनन दर, स्कूलों का आपस में विलय और ऊंची कक्षाओं में बच्चों को रोके रखने की चुनौती इसकी मुख्य वजहें हैं। स्कूल कंसॉलिडेशन नीति के तहत कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को आपस में मिलाया गया है।
  3. किन राज्यों में सबसे ज्यादा स्कूल बंद हुए हैं?
    उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पिछले दशक में सबसे बड़े पैमाने पर स्कूलों का विलय और बंदी हुई है। दोनों राज्यों को मिलाकर करीब 40 हजार स्कूल बंद या मर्ज किए गए हैं।
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