वित्त संकट में सरकार का फिजूलखर्ची पर बड़ा फैसला, अफसरों की विदेश यात्रा पर बैन

Amresh Kushwaha | Jul 18, 2026, 11:58 IST
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सरकार का फिजूलखर्ची पर बड़ा फैसला
सरकार का फिजूलखर्ची पर बड़ा फैसला

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध से मध्य प्रदेश का वित्तीय प्रबंधन गड़बड़ा गया है। पांच लाख 61 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी सरकार ने अफसरों की विदेश यात्रा, फाइव स्टार होटल मीटिंग और उपहार खर्च पर सख्त रोक लगा दी है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • पश्चिम एशिया के युद्ध से सरकार का वित्तीय प्रबंधन गड़बड़ाया है।
  • सरकार पर कर्ज 5.61 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचा है।
  • वित्त विभाग ने फिजूलखर्ची पर सख्त रोक लगा दी है।
  • अफसरों की विदेश यात्रा और फाइव स्टार मीटिंग पर रोक है।
  • यह रोक दो वित्तीय वर्षों तक लागू रहेगी।

सरकार पर बढ़ा वित्तीय दबाव

मध्यप्रदेश सरकार का वित्तीय प्रबंधन इन दिनों गड़बड़ा गया है। पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध का असर सीधे खजाने पर पड़ा है। सरकार पहले से ही पांच लाख 61 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी है। बीते वित्तीय वर्ष में ही सरकार ने 17 हजार 400 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया था। इस हालात में विकास कार्यों के बजट पर भी असर पड़ने लगा है। आगे चलकर कर्मचारियों के वेतन पर भी दबाव बन सकता है। इसी वजह से सरकार ने खर्च घटाने का फैसला किया है। इस कदम को वित्तीय प्रबंधन सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

फिजूलखर्ची पर सख्त रोक

वित्त विभाग ने अब फिजूलखर्ची पर सख्त रोक लगाई है। यह रोक वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 दोनों साल लागू रहेगी। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। यह आगामी आदेश तक जारी रहेगा। यह नियम सभी सरकारी विभागों पर लागू होगा। इसमें विभागाध्यक्ष, संभाग आयुक्त और कलेक्टर भी शामिल हैं। साथ ही निगम, मंडल और सार्वजनिक उपक्रम भी इसके दायरे में आएंगे। विश्वविद्यालयों को भी इन नियमों का पालन करना होगा।

विदेश यात्रा पर पूरी तरह रोक

सरकार ने सबसे बड़ी रोक विदेश यात्राओं पर लगाई है। बेहद जरूरी मामलों को छोड़कर सभी विदेश यात्राएं अगले आदेश तक रोक दी गई हैं। यह रोक करीब 1000 अखिल भारतीय सेवा के अफसरों पर लागू होगी। इसके अलावा 150 सुपर क्लास-1 अफसर भी इसके दायरे में हैं।

साथ ही 30 हजार प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अफसर भी शामिल हैं। यदि यात्रा बेहद जरूरी हो तो सिर्फ इकॉनॉमी क्लास में ही हवाई सफर हो सकेगा। बिजनेस क्लास में यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अफसरों के वाहन और सुविधाएं सीमित

एमपी वित्त विभाग ने अफसरों की गाड़ियों पर भी नियंत्रण लगाया है। विभागों और उपक्रमों में किराए की गाड़ियों की संख्या सीमित होगी। इसके लिए वाहन पूलिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। दो वाहनों की जरूरत वाले अफसरों को अब एक ही गाड़ी दी जाएगी। विभागाध्यक्ष स्तर पर इसकी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कंसल्टेंसी सेवाएं लेने पर भी पाबंदी लगाई गई है। दफ्तरों की साज-सज्जा पर होने वाला खर्च भी रोक दिया गया है।

होटल की जगह वर्चुअल ट्रेनिंग

अब सरकारी बैठकें और ट्रेनिंग फाइव स्टार होटलों में नहीं होंगी। इसके बजाय ये कार्यक्रम शासकीय संस्थानों में ही आयोजित होंगे। बड़े और महंगे व्यावसायिक संस्थानों के इस्तेमाल पर भी रोक रहेगी। अफसरों को होटल जाने के बजाय वर्चुअल प्रशिक्षण और वेबिनार करने को कहा गया है। इससे सरकार का काफी खर्च बचने की उम्मीद है। नए साल पर छपने वाले कैलेंडर और डायरी पर भी रोक लगाई गई है। इनकी छपाई और खरीद अब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

उपहार और स्वागत समारोह पर भी अब खर्च नहीं होगा। निगम, मंडल और उपक्रम अब भव्य स्वागत समारोह नहीं कर सकेंगे। सरकारी बंगलों और दफ्तरों की साज-सज्जा पर भी खर्च रुक जाएगा।

निगम-मंडलों को भी निर्देश

वित्त विभाग ने सरकारी उपक्रमों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। निगम, मंडल और उपक्रमों को अपने लाभांश की अधिकतम योग्य राशि जल्द जमा करानी होगी। यह राशि सीधे राज्य शासन के खाते में जमा करानी होगी। इससे सरकार को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है। यह कदम खजाने की स्थिति सुधारने के मकसद से उठाया गया है।

यह किफायत क्यों जरूरी हुई

राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। सरकार अपने खर्च और विकास कार्यों के लिए बाजार से कर्ज लेती रहती है। यह कर्ज अब पांच लाख 61 हजार करोड़ रुपए के पार पहुंच चुका है। ऐसे हालात में हर बड़ा खर्च सरकार के लिए बोझ बन जाता है। इसीलिए वित्त विभाग ने पहले फिजूलखर्ची पर रोक लगाने का फैसला किया। जरूरी योजनाओं और विकास कार्यों पर असर न पड़े, इसके लिए यह कदम जरूरी माना गया। सरकार का मानना है कि छोटे छोटे खर्च जोड़ने से बड़ी राशि बचाई जा सकती है।

कब तक रहेगी यह रोक

फिलहाल यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि हालात सुधरने पर आगे समीक्षा की जाएगी। यह पूरा फैसला वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए लिया गया है। सरकार चाहती है कि जरूरी खर्च पर असर न पड़े। इसीलिए फिजूलखर्ची वाले खर्चों पर ही सीधी रोक लगाई गई है।

आने वाले दिनों में सरकार और भी कदम उठा सकती है। फिलहाल सभी विभागों को इन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। इससे साफ है कि सरकार खर्च को लेकर अब पहले से ज्यादा सतर्क हो गई है। आम जनता की योजनाओं पर इसका सीधा असर न पड़े, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। आने वाले महीनों में इन नियमों के असर पर भी नजर रहेगी।

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