एमपी के पांच लाख सरकारी कर्मचारी करेंगे सेल्फ अप्रेजल, 30 अप्रैल तक मिलेंगे अप्रेजल फॉर्म

Aman Vaishnav | Mar 27, 2026, 11:55 IST
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mp govt employee self appraisal deadline april
mp govt employee self appraisal deadline april

मध्य प्रदेश सरकार ने अपने पांच लाख से ज्यादा कर्मचारियों के लिए सेल्फ-अप्रेजल (Self-Appraisal) की समय सीमा तय कर दी है। यह प्रक्रिया 30 अप्रैल से शुरू होकर 30 नवंबर तक चलेगी। देरी होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है।

मध्य प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारियों की सेल्फ-अप्रेजल (Self-Appraisal) प्रक्रिया का शेड्यूल जारी किया है। सरकार ने 30 अप्रैल तक सभी कर्मचारियों को अप्रेजल फॉर्म देने का आदेश दिया है।

कर्मचारी 30 जून तक अपना सेल्फ-अप्रेजल फॉर्म जमा करेंगे। इसके बाद रिपोर्टिंग और रिव्यूइंग अधिकारी क्रमशः 31 अगस्त और 30 सितंबर तक अपनी समीक्षा पूरी करेंगे। समय पर काम न करने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

MP में कॉर्पोरेट स्टाइल अप्रेजल

मध्य प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों के मूल्यांकन का तरीका बदल दिया है। अब यह प्रक्रिया कॉर्पोरेट ऑफिसों जैसी होगी। प्रदेश में पांच लाख से ज्यादा नियमित सरकारी कर्मचारी हैं। इन सभी के लिए सेल्फ-अप्रेजल अनिवार्य किया गया है।

इस व्यवस्था में कर्मचारी पहले खुद अपना मूल्यांकन करेंगे। फिर उनके रिपोर्टिंग ऑफिसर उस पर अपनी राय देंगे। उसके बाद रिव्यूइंग अधिकारी पूरे मूल्यांकन को देखेंगे। यह पूरी प्रक्रिया 30 नवंबर तक चलेगी।

डेडलाइन और पूरा शेड्यूल

सरकार ने हर स्तर के लिए अलग-अलग तारीखें तय की हैं। 30 अप्रैल तक सभी कर्मचारियों को अप्रेजल फॉर्म मिल जाने चाहिए। कर्मचारियों को अपना सेल्फ-अप्रेजल 30 जून तक जमा करना होगा।

रिपोर्टिंग ऑफिसर को 31 अगस्त तक अपना मूल्यांकन पूरा करना होगा। रिव्यूइंग ऑफिसर की समीक्षा 30 सितंबर तक पूरी होनी चाहिए। एसीआर (ACR - Annual Confidential Report) स्वीकार करने वाले अधिकारी की आखिरी तारीख 30 नवंबर है। अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की तारीख 31 दिसंबर तय की गई है।

डेडलाइन चूकी तो क्या होगा?

सरकार ने देरी के लिए जवाबदेही भी तय की है। यदि कोई कर्मचारी 30 जून तक सेल्फ-अप्रेजल नहीं देता, तो रिपोर्टिंग ऑफिसर बिना उसके ही मूल्यांकन पूरा करेगा।

अगर कर्मचारी ने समय पर फॉर्म दे दिया, लेकिन किसी स्तर पर मूल्यांकन नहीं हुआ तो डीपीसी (DPC - Departmental Promotion Committee) उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर फैसला करेगी। यह प्रावधान कर्मचारी के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है।

रिपोर्टिंग, रिव्यूइंग या स्वीकार करने वाले अधिकारी यदि तय समय पर काम नहीं करते तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। यह चूक उनकी खुद की गोपनीय रिपोर्ट में भी दर्ज की जाएगी। यानी लापरवाही की कीमत उन्हें अपने करियर में चुकानी पड़ सकती है।

एक्सटेंशन और आपत्ति का हक

अगर सेल्फ-अप्रेजल जमा करने की तारीख बढ़ती है तो बाकी सभी स्तरों की तारीखें भी उसी अनुपात में बढ़ेंगी, लेकिन अंतिम रिपोर्ट की तारीख यानी 31 दिसंबर नहीं बदलेगी। यह नियम सुनिश्चित करता है कि पूरी प्रक्रिया साल के अंत तक जरूर पूरी हो।

कर्मचारी (government employees) को यह भी अधिकार है कि यदि वह अपने मूल्यांकन से सहमत नहीं है तो वह आपत्ति दर्ज करा सके। यदि उसकी ग्रेडिंग बाद में सुधरती है तो उसके कारण भी रिकॉर्ड में लिखने होंगे। यह व्यवस्था पारदर्शिता के लिए जरूरी मानी जा रही है।

कैबिनेट फेरबदल के बीच यह कदम

दिलचस्प बात यह है कि यह आदेश ऐसे वक्त आया है जब प्रदेश में कैबिनेट फेरबदल को लेकर अटकलों का दौर चल रहा है। उस सस्पेंस के बीच सरकार ने प्रशासनिक सुधार की दिशा में यह ठोस कदम उठाया है। इससे साफ है कि सरकार कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर है।

FAQ

  1. मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को सेल्फ-अप्रेजल कब तक जमा करना होगा?
    मध्य प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सेल्फ-अप्रेजल जमा करने की आखिरी तारीख 30 जून 2025 तय की है। कर्मचारियों को 30 अप्रैल तक फॉर्म मिल जाएंगे। अगर कोई कर्मचारी 30 जून तक फॉर्म नहीं देता, तो रिपोर्टिंग ऑफिसर बिना सेल्फ-अप्रेजल के ही मूल्यांकन पूरा कर देगा।
  2. अगर कोई अधिकारी तय समय पर मूल्यांकन पूरा नहीं करता तो क्या होगा?
    अगर रिपोर्टिंग, रिव्यूइंग या एसीआर (Annual Confidential Report) स्वीकार करने वाले अधिकारी तय तारीख तक काम नहीं करते, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह चूक उनकी अपनी गोपनीय रिपोर्ट में भी दर्ज होगी, जो उनके प्रमोशन को प्रभावित कर सकती है।
  3. मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की अप्रेजल प्रक्रिया कॉर्पोरेट से कैसे अलग या मिलती-जुलती है?
    मध्य प्रदेश सरकार ने अब कॉर्पोरेट कंपनियों की तर्ज पर अप्रेजल सिस्टम अपनाया है। इसमें कर्मचारी पहले खुद अपना मूल्यांकन करता है, फिर रिपोर्टिंग ऑफिसर और रिव्यूइंग ऑफिसर उसकी समीक्षा करते हैं। यह बहु-स्तरीय (Multi-level) प्रक्रिया पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित करती है।
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