एमपी में नई तबादला नीति 2026 लागू, मंत्रियों और कलेक्टरों के हाथ में कमान! जानें ट्रांसफर के नए नियम
Sanjay Dhiman | May 20, 2026, 18:12 IST
Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश सरकार ने मोहन कैबिनेट की बैठक में 2026 की नई तबादला नीति मंजूर की। 1 जून से 15 जून तक विभागीय और जिला स्तर पर ट्रांसफर होंगे। गंभीर बीमारी, पति-पत्नी और सेवानिवृत्ति के करीब मामलों में विशेष छूट दी गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में साल 2026 की नई स्थानांतरण नीति (Transfer Policy 2026) को हरी झंडी मिल गई है। इस फैसले के बाद प्रदेश के लाखों अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने इसके लिए बाकायदा तारीखों का ऐलान भी कर दिया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो यह नीति चुनावी समीकरणों और प्रशासनिक कसावट दोनों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। सरकार का मुख्य फोकस जमीनी स्तर पर काम को रफ्तार देना और शिकायतों का निपटारा करना है। इस नीति में मंत्रियों और कलेक्टरों को काफी अधिकार दिए गए हैं।
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अगर आप भी सरकारी नौकरी में हैं और ट्रांसफर का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है। सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य में 1 जून 2026 से लेकर 15 जून 2026 तक ही तबादले किए जाएंगे। इस 15 दिन की छोटी सी खिड़की में ही सारे विभागों को अपने-अपने यहां फेरबदल की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता यानी A+ श्रेणी वाले तबादलों के लिए तो और भी कम वक्त मिला है। सीएम के निर्देश हैं कि ऐसे सभी ट्रांसफर हर हाल में 31 मई 2026 तक निपटा लिए जाएं। इसके बाद विभागीय स्तर पर आम कर्मचारियों की फाइलें आगे बढ़ेंगी।
राजनीति में अक्सर कड़क फैसलों की चर्चा होती है, लेकिन इस बार मोहन सरकार ने मानवीय चेहरा भी दिखाया है। नई नीति में साफ कहा गया है कि जो कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार हैं, उन्हें ट्रांसफर में बड़ी राहत दी जाएगी। कैंसर, लकवा, किडनी की खराबी और दिल की बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को नीति के कड़े नियमों से बाहर रखा गया है।
"पति-पत्नी को एक ही शहर या स्थान पर पदस्थ करने वाले मामलों को भी तबादला सीमा से अलग रखा गया है, ताकि परिवार बिखरने से बच सकें।"
इसके साथ ही, जो कर्मचारी अपने खुद के खर्च पर (स्वयं के व्यय पर) ट्रांसफर चाहते हैं, उनके लिए भी नियमों को थोड़ा लचीला बनाया गया है। सरकार की कोशिश है कि जेन्युइन केस वाले लोगों को बिना किसी राजनीतिक सिफारिश के आसानी से राहत मिल सके।
हर सरकारी फैसले की तरह इस ट्रांसफर पॉलिसी के भी कुछ अपवाद हैं। मोहन सरकार ने साफ कर दिया है कि यह नई तबादला नीति मध्यप्रदेश न्यायिक सेवा के अधिकारियों पर बिल्कुल लागू नहीं होगी। इसके साथ ही राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) और राज्य पुलिस सेवा (SPS) के बड़े अफसरों पर भी यह नियम काम नहीं करेंगे।
इस नई नीति में जिला स्तर पर प्रभारी मंत्रियों को असली 'बॉस' बनाया गया है। जिले के अंदर होने वाले तृतीय (Class 3) और चतुर्थ श्रेणी (Class 4) कर्मचारियों के तबादले अब जिला कलेक्टर तभी कर पाएंगे, जब उन्हें जिले के प्रभारी मंत्री की लिखित स्वीकृति मिलेगी। यानी बिना राजनीतिक सहमति के तबादले नहीं होंगे।
वहीं राज्य संवर्ग के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर सीधे मंत्रालय यानी विभागीय स्तर पर होंगे, लेकिन वहां भी प्रभारी मंत्री की मंजूरी को अनिवार्य किया गया है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए थोड़ी राहत है, उनके तबादले का पूरा जिम्मा विभागाध्यक्ष (HoD) को सौंप दिया गया है।
पुलिस महकमे में ट्रांसफर को लेकर हमेशा से काफी खींचतान मची रहती है। इस बार गृह विभाग के लिए सरकार ने एक बिल्कुल अलग और साफ व्यवस्था तैयार की है। उप पुलिस अधीक्षक (DSP) स्तर से लेकर नीचे के जितने भी पुलिसकर्मी या अधिकारी हैं, उनके ट्रांसफर का फैसला पुलिस स्थापना बोर्ड (Police Establishment Board) करेगा।
जिले के भीतर किसी थानेदार या सिपाही को इधर से उधर करना है, तो यह काम पुलिस अधीक्षक (SP) साहब करेंगे। लेकिन रुकिए, एसपी साहब भी अपनी मर्जी से सब कुछ नहीं कर पाएंगे, उन्हें भी जिले के प्रभारी मंत्री से इस पर सहमति लेनी ही होगी।
सरकार ने इस बार यह भी ध्यान रखा है कि ट्रांसफर के चक्कर में पूरे विभाग का काम ही न ठप हो जाए। इसीलिए कर्मचारियों की कुल संख्या के आधार पर एक सख्त कोटा तय कर दिया गया है।
इस नीति में बुजुर्ग कर्मचारियों का खास ख्याल रखा गया है। जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति (Retirement) में एक साल या उससे कम का वक्त बचा है, उनका ट्रांसफर सामान्य तौर पर नहीं किया जाएगा। उन्हें उनके वर्तमान स्थान पर ही काम करने की पूरी छूट मिलेगी, ताकि वे आराम से रिटायर हो सकें।
राजस्व विभाग (Revenue Department) के लिए भी विशेष प्रावधान हैं। जिले के भीतर डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के हलके या अनुभाग बदलने का फैसला प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।
भले ही 15 जून के बाद ट्रांसफर पर पूरी तरह बैन लग जाएगा, लेकिन कुछ इमरजेंसी हालात में तबादले फिर भी हो सकेंगे। अगर कोर्ट का कोई सीधा आदेश आता है, तो ट्रांसफर करना पड़ेगा। इसके अलावा गंभीर शिकायत, अनुशासनात्मक कार्रवाई, लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू (EOW) के मामलों में आरोपी कर्मचारियों को तुरंत हटाया जा सकेगा।
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mp transfer policy 2026
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो यह नीति चुनावी समीकरणों और प्रशासनिक कसावट दोनों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। सरकार का मुख्य फोकस जमीनी स्तर पर काम को रफ्तार देना और शिकायतों का निपटारा करना है। इस नीति में मंत्रियों और कलेक्टरों को काफी अधिकार दिए गए हैं।
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1 जून से होंगे तबादले, जानें क्या है डेडलाइन
इसके अलावा, मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता यानी A+ श्रेणी वाले तबादलों के लिए तो और भी कम वक्त मिला है। सीएम के निर्देश हैं कि ऐसे सभी ट्रांसफर हर हाल में 31 मई 2026 तक निपटा लिए जाएं। इसके बाद विभागीय स्तर पर आम कर्मचारियों की फाइलें आगे बढ़ेंगी।
बीमारी और पति-पत्नी के मामलों में विशेष छूट
"पति-पत्नी को एक ही शहर या स्थान पर पदस्थ करने वाले मामलों को भी तबादला सीमा से अलग रखा गया है, ताकि परिवार बिखरने से बच सकें।"
इसके साथ ही, जो कर्मचारी अपने खुद के खर्च पर (स्वयं के व्यय पर) ट्रांसफर चाहते हैं, उनके लिए भी नियमों को थोड़ा लचीला बनाया गया है। सरकार की कोशिश है कि जेन्युइन केस वाले लोगों को बिना किसी राजनीतिक सिफारिश के आसानी से राहत मिल सके।
जानिए किन विभागों पर लागू नहीं होगी यह नई नीति
इन सेवाओं को मिली है छूट
- मध्यप्रदेश न्यायिक सेवा (Judicial Services)
- राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS)
- राज्य पुलिस सेवा (SPS)
- राज्य वन सेवा (SFS) और मंत्रालय कैडर
कलेक्टर और प्रभारी मंत्री की अनुशंसा जरूरी
वहीं राज्य संवर्ग के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर सीधे मंत्रालय यानी विभागीय स्तर पर होंगे, लेकिन वहां भी प्रभारी मंत्री की मंजूरी को अनिवार्य किया गया है। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए थोड़ी राहत है, उनके तबादले का पूरा जिम्मा विभागाध्यक्ष (HoD) को सौंप दिया गया है।
गृह विभाग और पुलिस महकमे के लिए क्या हैं नए नियम?
जिले के भीतर किसी थानेदार या सिपाही को इधर से उधर करना है, तो यह काम पुलिस अधीक्षक (SP) साहब करेंगे। लेकिन रुकिए, एसपी साहब भी अपनी मर्जी से सब कुछ नहीं कर पाएंगे, उन्हें भी जिले के प्रभारी मंत्री से इस पर सहमति लेनी ही होगी।
संख्या के हिसाब से तय हुई ट्रांसफर की सीमा
- 200 तक कर्मचारी वाले विभाग: कुल स्टाफ के अधिकतम 20% तक ही तबादले संभव हैं।
- 200 से 1000 कर्मचारी वाले विभाग: अधिकतम 40 कर्मचारियों के साथ एक्स्ट्रा 15% की छूट मिलेगी।
- 1000 से 2000 कर्मचारी वाले विभाग: अधिकतम 160 कर्मचारियों के साथ एक्स्ट्रा 10% तक ट्रांसफर होंगे।
- 2000 से अधिक कर्मचारी वाले विभाग: अधिकतम 260 कर्मचारियों के साथ सिर्फ 5% तक ही फेरबदल की सीमा तय है।
बुजुर्ग कर्मचारियों और राजस्व विभाग के लिए विशेष राहत
राजस्व विभाग (Revenue Department) के लिए भी विशेष प्रावधान हैं। जिले के भीतर डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के हलके या अनुभाग बदलने का फैसला प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।
प्रतिबंध के बावजूद विशेष परिस्थितियों में हो सकेंगे तबादले
FAQ
- मध्यप्रदेश तबादला नीति 2026 के तहत ट्रांसफर की अवधि क्या है?
मध्यप्रदेश तबादला नीति 2026 के तहत सूबे में सभी विभागों के कर्मचारियों के तबादले 1 जून 2026 से लेकर 15 जून 2026 तक किए जाएंगे। सीएम के A+ श्रेणी वाले तबादले 31 मई तक पूरे होंगे। - क्या नई ट्रांसफर पॉलिसी 2026 के तहत बीमार कर्मचारियों को कोई राहत दी गई है?
हां, इस नई ट्रांसफर पॉलिसी 2026 में कैंसर, लकवा, और किडनी खराब जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को मेडिकल बोर्ड की सिफारिश पर तबादलों में विशेष छूट और राहत दी गई है। - जिला स्तर पर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले कौन करेगा?
जिला स्तर पर इन कर्मचारियों के तबादले जिला कलेक्टर द्वारा किए जाएंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें जिले के प्रभारी मंत्री की पूर्व स्वीकृति और मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया है।
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