ओरछा रामराजा मंदिर खजाना केस 9 साल बाद भी अधूरा, पूर्व क्लर्क की FIR रद्द
Aman Vaishnav | Jun 21, 2026, 09:58 IST
ओरछा रामराजा मंदिर खजाना केस
ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर में कैश और गहनों की हेराफेरी की जांच 9 साल बाद भी अधूरी रही। इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व क्लर्क के खिलाफ FIR रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि जांच में 9 साल की देरी न्याय के अधिकार का उल्लंघन है।
समझें क्या है पूरा मामला
- ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर में कैश और गहनों की हेराफेरी का मामला है।
- यह गड़बड़ी 2017 में सामने आई थी।
- मंदिर के तत्कालीन क्लर्क मुन्नालाल तिवारी के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी।
- 9 साल में भी जांच पूरी नहीं हो पाई।
- जबलपुर हाईकोर्ट ने अब यह FIR रद्द कर दी है।
जांच में पता चला था कि मंदिर के नकद बही-खातों, गहनों और स्टॉक रजिस्टर में गड़बड़ी हुई है। मंदिर की चल-अचल संपत्तियों में भी अनियमितता मिली थी। इसके बाद एक संयुक्त जांच समिति बनाई गई थी।
रामराजा मंदिर ओरछा कीसमिति की रिपोर्ट के आधार पर 10 सितंबर 2017 को FIR दर्ज की गई थी। यह FIR कई धाराओं के तहत हुई। इसमें मंदिर क्लर्क मुन्नालाल तिवारी का नाम सामने आया था।
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9 साल की जांच अधूरी
जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इसी देरी को गंभीरता से लिया। न्यायमूर्ति हिमांशू जोशी ने 15 जून को यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक कठिनाई या अधिकारियों के तबादले जांच में इतनी देरी का बहाना नहीं हो सकते।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आपराधिक कानून किसी नागरिक के सिर पर हमेशा लटकती तलवार नहीं बन सकता। संविधान के तहत हर नागरिक को त्वरित और निष्पक्ष न्याय का अधिकार है। 9 साल तक मामला लंबित रखना इस अधिकार का उल्लंघन है।
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हाईकोर्ट का फैसला
याचिकाकर्ता मुन्नालाल तिवारी का कहना था कि वह सिर्फ लिपिकीय यानी क्लर्क का काम करते थे। ओरछा रामराजा सरकारके बड़े वित्तीय फैसले तहसीलदार और वरिष्ठ राजस्व अधिकारी लेते थे। कोर्ट में यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ गबन या धोखाधड़ी का कोई सीधा सबूत नहीं मिला।
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निवाड़ी जिले के गठन से पहले का मामला
इस जांच में तत्कालीन तहसीलदार गुलाब सिंह बघेल की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। प्रमुख राजस्व आयुक्त और उप राजस्व आयुक्त ने उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
साथ ही विभागीय जांच के आदेश भी हुए थे। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और जांच रिपोर्ट भी आगे नहीं भेजी गई। इसके उलट गुलाब सिंह का तबादला हो गया। वहीं मुन्नालाल तिवारी की सेवा समाप्त कर दी गई थी।
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एसपी करेंगे अपील
राय सिंह नरवरिया के मुताबिक मामला बेहद गंभीर है। विवेचना में कई प्रशासनिक बाधाएं आई थीं। निवाड़ी जिला बनने से पहले की यह FIR है, इसलिए रिकॉर्ड जुटाने में भी समय लगा। संबंधित विभागों से बार-बार पत्राचार के बाद भी जरूरी दस्तावेज नहीं मिल पाए। यही वजह जांच लंबी खिंचने की रही।
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क्लर्क का पक्ष
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