एमपी में इलाज के लिए तरस रहे ग्रामीण, अस्पतालों में पद खाली पर आने को तैयार नहीं डॉक्टर
Aman Vaishnav | May 31, 2026, 11:06 IST
mp healthcare crisis specialist doctors shortage
मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा तो तैयार हो गया है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 91% पद खाली पड़े हैं। इससे मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश के कई इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है।
- स्वास्थ्य केंद्रों के नेटवर्क के मामले में एमपी देश के टॉप 5 राज्यों में शामिल है।
- राज्य के 327 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 91% पद खाली पड़े हैं।
- ग्रामीण मरीजों को इलाज के लिए भी 100 से 200 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
- कम वेतन और ग्रामीण अस्पतालों में आधुनिक उपकरणों व स्टाफ की कमी इस समस्या की मुख्य वजह है।
गांवों तक नहीं मिल रहा डॉक्टरों का साथ
इसका सबसे बुरा असर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में रहने वाले गरीब मरीजों पर पड़ रहा है। जब किसी महिला को जटिल प्रसव की जरूरत होती है, या किसी नवजात बच्चे का गंभीर इलाज करना होता है, तो उन्हें स्थानीय स्तर पर डॉक्टर नहीं मिलते हैं। नतीजा यह होता है कि मरीजों को जिला अस्पतालों या बड़े मेडिकल कॉलेजों की तरफ भागना पड़ता है।
स्वास्थ्य केंद्रों के मामले में एमपी
प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति
- उपस्वास्थ्य केंद्र: 10 हजार 256 (इस मामले में बिहार और राजस्थान के बाद एमपी पूरे देश में तीसरे नंबर पर है)
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: एक हजार 442
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र: 327
जिला अस्पतालों से दूरी और रेफर होने की मजबूरी
वहीं ऐसी स्थिती में इन केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होते हैं। इस कारण से डॉक्टरों के पास मरीजों को बड़े अस्पताल रेफर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है।
इस मजबूरी के कारण मरीजों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
- रेफर होने के बाद बड़े अस्पताल पहुंचने में काफी समय बर्बाद हो जाता है।
- गरीब परिवारों को गाड़ी किराए पर लेने और बड़े शहरों में रहने-खाने पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता है।
- कई मामलों में समय पर सही इलाज न मिल पाने के कारण मरीज की जान पर बन आती है।
- जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में क्षमता से ज्यादा मरीज पहुंचने से वहां की व्यवस्था भी चरमरा जाती है।
डॉक्टरों की कमी का सच
एमपी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की स्थिति
| स्वास्थ्य केंद्र का पैमाना | कुल आंकड़े और स्थिति |
| कुल संचालित सीएचसी | 327 |
| विशेषज्ञों के कुल जरूरी पद | एक हजार 320 |
| वर्तमान में कार्यरत विशेषज्ञ | 113 |
| खाली पड़े पद | एक हजार 207 |
| खाली पदों का प्रतिशत | 91% |
| डॉक्टरों की उपलब्धता | सिर्फ 8.5% |
| औसतन एक सीएचसी पर डॉक्टर (Average Per CHC) | 0.35 विशेषज्ञ |
कहां बेहतर है स्थिति?
- आंध्र प्रदेश: यहां 551 स्वीकृत पदों में से 460 विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
- तमिलनाडु: यहां 509 पदों में से 398 पदों पर डॉक्टर तैनात हैं।
- कर्नाटक: यहां 439 पदों में से 295 विशेषज्ञ काम कर रहे हैं।
राजस्थान में एक हजार 98 और बिहार में एक हजार 48 पद खाली हैं।
वहीं प्रतिशत के हिसाब से देखें तो मध्यप्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की यह कमी सबसे ज्यादा गंभीर रूप ले चुकी है।
क्यों ग्रामीण इलाकों में नहीं जाना चाहते डॉक्टर?
- ज्यादातर डॉक्टर भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों या फिर प्राइवेट अस्पतालों में काम करना पसंद करते हैं।
- निजी क्षेत्र में डॉक्टरों को बढ़िया सैलरी मिलती है। अच्छी सुविधाएं और करियर में आगे बढ़ने के बेहतर मौके मिलते हैं।
- दूरदराज और आदिवासी इलाकों के सीएचसी में ब्लड बैंक और एनेस्थेटिस्ट की कमी होती है। साथ ही प्रशिक्षित स्टाफ और आधुनिक मेडिकल उपकरणों की भी भारी कमी होती है। ऐसे में डॉक्टर वहां काम करने से कतराते हैं।
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