हाईकोर्ट की सुनवाई में अजीब नजारा! बिस्तर पर लेटे और अंडरपैंट में दिखे TNCP के संयुक्त संचालक
Neel Tiwari | Oct 28, 2026, 10:27 IST
यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान TNCP भोपाल के संयुक्त संचालक अमित कुमार गजभिए बिस्तर पर लेटे नजर आए। उन्होंने अंडरपैंट पहन रखी थी। कोर्ट ने उनके इस व्यवहार को अदालत की गरिमा के खिलाफ माना। अब कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही अधिकारी से आपराधिक अवमानना के मामले में भी जवाब मांगा है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बिस्तर पर लेटे दिखे अधिकारी
जस्टिस दीपक खोट ने उनके इस व्यवहार को अदालत की गरिमा के खिलाफ माना। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी का यह रवैया अवमाननापूर्ण है। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही अधिकारी से जवाब मांगा कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।
कोर्ट ने पहले भी मांगी थी अनुपालन रिपोर्ट
याचिका में बताया गया कि हाई कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को एक रिट याचिका का निपटारा किया था। कोर्ट ने कंपनी के अभ्यावेदन पर 90 दिनों के भीतर फैसला लेने का आदेश दिया था। कंपनी का आरोप है कि संबंधित अधिकारी को आदेश की कॉपी दे दी गई थी। कई बार याद दिलाने के बावजूद तय समय में उचित फैसला नहीं लिया गया। इसके बाद कंपनी ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को अधिकारी से अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी। आदेश का पालन नहीं होने पर कोर्ट ने उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया था।
कंपनी ने गलत नक्शा दर्ज होने का उठाया मुद्दा
विवाद इस बात पर था कि मास्टर प्लान में जमीन आवासीय इस्तेमाल के लिए तय थी। वहीं सरकारी रिकॉर्ड में इसे औद्योगिक जमीन के रूप में दर्ज कर दिया गया था। कंपनी ने इसी गलती को सुधारने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान 3 अक्टूबर 2025 के एक पत्र का भी जिक्र हुआ। इस पत्र में जमीन की प्रविष्टि सुधारने की सिफारिश पहले ही भेजे जाने की बात थी। हाई कोर्ट ने 27 अक्टूबर के आदेश में कहा कि ऐसी स्थिति में कंपनी के अभ्यावेदन पर जारी किया गया आदेश सिर्फ दिखावा था।
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चार सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट
इसके अलावा अमित कुमार गजभिए से भी जवाब मांगा गया है। उन्हें बताना होगा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उनके व्यवहार के लिए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इस सवाल पर भी चार सप्ताह के भीतर जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होगी।
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