जहां से निकले हो वहीं घुसेड़ दूंगा: हाईकोर्ट जज पर वकील ने लगाए आरोप, X पर किया पोस्ट
Neel Tiwari | Feb 12, 2026, 23:34 IST
Photograph: (THESOOTE)
MP हाईकोर्ट के जज पर वकील ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर आरोप लगाए। जज ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे बार-बेंच के रिश्ते में तनाव बढ़ गया।
ग्वालियर/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के प्रतिष्ठित मंच पर एक ऐसा वाकया सामने आया है जिसने बार–बैंच के रिश्तों और न्यायपालिका की गरिमा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
अधिवक्ता ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर किए गए पोस्ट पर आरोप लगाए हैं कि जज ने अनुचित भाषा का प्रयोग किया है। जो पेशेवर एवं संवैधानिक मानदंडों के विपरीत है। अब यह मामला चीफ जस्टिस तक पहुंच चुका है।
ग्वालियर बेंच में बीते सोमवार को सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता के मामले के ठीक पहले लाइव स्ट्रीमिंग बंद कर दी गई थी। इसी बीच न्यायधीश राजेश कुमार गुप्ता ने कथित रूप से अनुशासनहीन वाक्यांश का उपयोग किया- “जहां से निकले हो, वहीं घुसेड़ दूंगा।” इस टिप्पणी को कई वरिष्ठ कानूनी पेशेवरों ने अपमानजनक और असंसदीय बताया है।
वयोवृद्ध अधिवक्ता रिषिकेश कुमार ने अपने एक्स (X) पोस्ट में आरोप लगाते हुए लिखा कि 16 साल के अपने पेशेवर अनुभव में उन्होंने ऐसा “अभूतपूर्व” व्यवहार कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा एक संवैधानिक न्यायालय की गरिमा के अनुरूप नहीं है। अब इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा को रिप्रेजेंटेशन भी दिया गया है।
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सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाते हुए अपने अनुभवी पेशे के 16 वर्षों का हवाला देते हुए कहा कि यह अनुभव “न केवल निराशाजनक है बल्कि न्यायपालिका की गरिमा पर भी सवाल उठाता है”। पोस्ट में यह भी उल्लेख था कि न्यायधीश से शालीनता की अपेक्षा करना “बुनियादी अधिकार” है।
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इन आरोपों के बारे में जिला बार के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि यदि जज और अधिवक्ता के बीच मतभेद सामने आते हैं तो उसे भी उचित रूप से संभाला जाना चाहिए। बढ़ती तल्खी और अनुचित टिप्पणियां अदालत के वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं। एक अन्य अधिवक्ता ने बताया कि इस घटना की जानकारी अदालत के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है और वे उचित कारवाई पर विचार कर रहे हैं।
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पहले भी विवादों में रह चुके हैं
यह कोई पहली बार नहीं है जब जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता का नाम विवादों में आया है। जुलाई 2025 में शहडोल की एक महिला सिविल जज, अदिति शर्मा, ने उनके खिलाफ उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव और व्यवहारगत टिप्पणियों के आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
जज अदिति शर्मा ने अपने इस्तीफे में लिखा था कि न्यायपालिका में उनकी सेवा के दौरान उन्हें मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और उनकी शिकायतों पर कोई उचित सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि न्यायिक संस्थान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप न्याय और गरिमा की रक्षा नहीं की गई। हालांकि बाद में उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया था और वह अभी भी जज पद पर कार्यरत हैं।
अधिवक्ता के आरोपों के बाद सामने आया यह विवाद न केवल एक टिप्पणी तक सीमित है, बल्कि यह न्यायपालिका के भीतर शालीनता, अनुशासन और पेशेवर व्यवहार पर बड़े सवाल खड़े करता है। जब संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की भाषा और व्यवहार सार्वजनिक आचार संहिता के अनुरूप नहीं होते, तो इससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है और बार–बैंच के बीच विश्वास को चोट पहुंच सकती है।
अधिवक्ता ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर किए गए पोस्ट पर आरोप लगाए हैं कि जज ने अनुचित भाषा का प्रयोग किया है। जो पेशेवर एवं संवैधानिक मानदंडों के विपरीत है। अब यह मामला चीफ जस्टिस तक पहुंच चुका है।
News in short
- ग्वालियर बेंच में जज राजेश कुमार गुप्ता द्वारा कथित रूप से कहा गया- “जहां से निकले हो, वहीं घुसेड़ दूंगा।”
- वरिष्ठ अधिवक्ता ने एक्स (X) पर पोस्ट कर लगाए आरोप।
- अब इस घटना के बारे में चीफ जस्टिस और रजिस्ट्रार जनरल को औपचारिक रूप से रिप्रेजेंटेशन भेजा गया है।
- जस्टिस गुप्ता पिछले साल भी विवादों में रहे हैं, जब एक महिला सिविल जज ने उनके खिलाफ उत्पीड़न के आरोप लगाकर इस्तीफा दिया था।
- इस घटना ने हाईकोर्ट में अनुशासन, भाषा की मर्यादा और पेशेवर व्यवहार पर बहस तेज कर दी है।
News in Detail
वयोवृद्ध अधिवक्ता रिषिकेश कुमार ने अपने एक्स (X) पोस्ट में आरोप लगाते हुए लिखा कि 16 साल के अपने पेशेवर अनुभव में उन्होंने ऐसा “अभूतपूर्व” व्यवहार कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा एक संवैधानिक न्यायालय की गरिमा के अनुरूप नहीं है। अब इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा को रिप्रेजेंटेशन भी दिया गया है।
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सोशल मीडिया पर अधिवक्ता का तीखा बयान
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बार-बैंच रिश्तों में तल्खी के संकेत
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पहले भी विवादों में रह चुके हैं जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता
जज अदिति शर्मा ने अपने इस्तीफे में लिखा था कि न्यायपालिका में उनकी सेवा के दौरान उन्हें मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और उनकी शिकायतों पर कोई उचित सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि न्यायिक संस्थान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप न्याय और गरिमा की रक्षा नहीं की गई। हालांकि बाद में उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया था और वह अभी भी जज पद पर कार्यरत हैं।
अधिवक्ता के आरोपों के बाद सामने आया यह विवाद न केवल एक टिप्पणी तक सीमित है, बल्कि यह न्यायपालिका के भीतर शालीनता, अनुशासन और पेशेवर व्यवहार पर बड़े सवाल खड़े करता है। जब संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की भाषा और व्यवहार सार्वजनिक आचार संहिता के अनुरूप नहीं होते, तो इससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है और बार–बैंच के बीच विश्वास को चोट पहुंच सकती है।
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