साहब की संपत्ति पर राज बरकरार, आधे से अधिक IAS-IPS-IFS ने दी प्रॉपर्टी की अधूरी जानकारी!
Amresh Kushwaha | Mar 18, 2026, 10:44 IST
mp ias ips ifs officers property returns 2026 analysis
मध्य प्रदेश के 58% अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों ने अपनी अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा नहीं दिया है। 810 अफसरों में से कई ने संपत्ति को अज्ञात या शून्य बताया है। विस्तार से जानें क्या कहते हैं आंकड़े...
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा है- साहब की संपत्ति। नियम के मुताबिक, हर साल अधिकारियों को अपनी चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा सार्वजनिक करना होता है।
वहीं, एक जनवरी 2026 तक के आंकड़ों का विश्लेषण एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करता है। राज्य के 810 अखिल भारतीय सेवा (All India Services) अधिकारियों में से लगभग 58% प्रशासनिक अधिकारियों की संपत्ति की सही कीमत आज भी एक पहेली बनी हुई है।
आंकड़ों की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि हर 10 में से 6 अफसरों ने या तो अपनी संपत्ति को Nil बताया है या फिर उसकी बाजार कीमत स्पष्ट नहीं की है।
दिलचस्प बात यह है कि 400 से अधिक अधिकारियों ने खुद को अचल संपत्ति विहीन घोषित किया है। यह रुझान विशेष रूप से नए बैच के अधिकारियों में देखा जा रहा है, जो करियर के शुरुआती चरण में हैं।
जैसे-जैसे अफसरों की कुर्सी सीनियरिटी (Seniority) की ओर बढ़ती है, संपत्ति का 'निल' वाला कॉलम भरने लगता है। इसके बावजूद यहां एक नया पेच सामने आता है।
प्रदेश के 50 से अधिक सीनियर अफसर ऐसे हैं जिनके पास 15 से अधिक संपत्तियां हैं। वहीं, कीमत के कॉलम में उन्होंने मूल्यांकन नहीं (Not Valued) या ज्ञात नहीं (Not Known) लिख रखा है।
यानी साहब के पास जमीन-जायदाद तो है, लेकिन आज के बाजार में उसकी क्या वैल्यू है, इससे वे अनजान बने हुए हैं।
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, अफसर इसके लिए दो मुख्य कारणों का हवाला देते हैं:
रिटर्न का विश्लेषण बताता है कि नौकरी जितनी पुरानी, उतनी ही ज्यादा संपत्ति। 1989-95 बैच के वरिष्ठ अधिकारी सबसे समृद्ध हैं।
अधिकारियों के निवेश करने के तरीके में भी उनकी सेवा का प्रभाव साफ दिखता है। भोपाल की अरेरा कॉलोनी, इंदौर का विजय नगर और दिल्ली-एनसीआर इनके पसंदीदा निवेश केंद्र (Investment Hubs) बने हुए हैं।
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वहीं, एक जनवरी 2026 तक के आंकड़ों का विश्लेषण एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करता है। राज्य के 810 अखिल भारतीय सेवा (All India Services) अधिकारियों में से लगभग 58% प्रशासनिक अधिकारियों की संपत्ति की सही कीमत आज भी एक पहेली बनी हुई है।
हर 10 में से 6 अधिकारी सटीक जानकारी से दूर
दिलचस्प बात यह है कि 400 से अधिक अधिकारियों ने खुद को अचल संपत्ति विहीन घोषित किया है। यह रुझान विशेष रूप से नए बैच के अधिकारियों में देखा जा रहा है, जो करियर के शुरुआती चरण में हैं।
संपत्तियां तो दिखीं, पर कीमत हुई लापता
प्रदेश के 50 से अधिक सीनियर अफसर ऐसे हैं जिनके पास 15 से अधिक संपत्तियां हैं। वहीं, कीमत के कॉलम में उन्होंने मूल्यांकन नहीं (Not Valued) या ज्ञात नहीं (Not Known) लिख रखा है।
यानी साहब के पास जमीन-जायदाद तो है, लेकिन आज के बाजार में उसकी क्या वैल्यू है, इससे वे अनजान बने हुए हैं।
कीमत न बताने के पीछे के दो बड़े तकनीकी पेच
- पुश्तैनी और एचयूएफ संपत्ति: कई संपत्तियां हिंदू संयुक्त परिवार (एचयूएफ) के नाम पर हैं। कानूनी बंटवारा न होने के कारण अधिकारी अपने हिस्से का सटीक मूल्य बताने में असमर्थता जताते हैं।
- मूल्यांकन में तकनीकी छूट: नियमों में यह प्रावधान है कि यदि सटीक मूल्यांकन संभव न हो, तो अनुमानित मूल्य दिया जा सकता है। इसी लचीलेपन का फायदा उठाकर कई अधिकारी अज्ञात लिख देते हैं।
अमीरी में भी कायम है पदानुक्रम की परंपरा
आईएएस अफसरों की संपत्ति : एक औसत आईएएस के पास 6 से 7 करोड़ की संपत्ति है।- IPS
अफसरों की संपत्ति : औसत संपत्ति 3 से 5 करोड़ रुपए के बीच है। - IFS: इनके पास औसतन 2 से 4 करोड़ रुपए की संपत्ति है। मध्यम स्तर (2000-2012 बैच) के पास 1 से 5 करोड़ की संपत्ति है, जबकि 2013 के बाद वाले 80% नए अफसरों ने अपनी संपत्ति शून्य दिखाई है।
निवेश की पसंद: पद के हिसाब से बदला पोर्टफोलियो
- IAS (प्रीमियम चॉइस): इनका झुकाव कमर्शियल ऑफिस स्पेस और प्राइम लोकेशन के हाई-एंड अपार्टमेंट्स की ओर है, जहां रेंटल इनकम (Rental Income) अच्छी मिलती है।
- IPS (जमीन से लगाव): पुलिस अधिकारियों का निवेश पैटर्न कृषि भूमि और बड़े प्लॉट्स पर केंद्रित है। इनका बड़ा एसेट अक्सर पुश्तैनी या बड़े रकबे वाली जमीन होती है।
- IFS (प्रकृति के करीब): वन सेवा के अधिकारियों का निवेश अक्सर उनके कार्यक्षेत्र यानी ग्रामीण इलाकों और जंगल के आसपास के भूखंडों में अधिक देखा गया है।
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