आईएएस ट्रांसफर की जल्द आएगी नई सूची, किसी को काम का ओवरलोड, तो कोई बैठा है खाली!

Amresh Kushwaha | Jul 26, 2026, 10:50 IST
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आईएएस ट्रांसफर की जल्द आएगी नई सूची
आईएएस ट्रांसफर की जल्द आएगी नई सूची

मध्यप्रदेश में नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने पद संभालते ही प्रशासनिक फेरबदल किया। उमाकांत उमराव इसी महीने रिटायर होंगे। कुछ सीनियर अफसरों पर काम बढ़ गया है, वहीं कुछ अभी भी बिना विभाग के हैं। जल्द एक और सूची आ सकती है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में नए मुख्य सचिव ने प्रशासनिक फेरबदल किया है।
  • यह फेरबदल पद संभालने के 24 घंटे के भीतर ही हुआ है।
  • अभी एक और सूची जल्द आने की संभावना बन गई है।
  • कुछ सीनियर अफसरों पर काम का बोझ बढ़ गया है।
  • कुछ अधिकारी अभी भी बिना विभाग के खाली बैठे हैं।

24 घंटे में बड़ा फेरबदल

मध्यप्रदेश में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने पद संभालते ही एक्शन लिया। उन्होंने पद संभालने के महज 24 घंटे के भीतर प्रशासनिक फेरबदल कर दिया। लेकिन यह फेरबदल यहीं नहीं रुकेगा। एक और सूची जल्द आने की संभावना बन गई है। यह सूची भी जल्द जारी हो सकती है।

इस फेरबदल के पीछे एक बड़ी वजह सामने आई है। कुछ सीनियर अफसरों के पास काम काफी बढ़ गया है। एक अफसर के पास कई विभाग की जिम्मेदारी आ गई है। वहीं दूसरी तरफ कुछ अधिकारी अभी भी बिना काम के बैठे हैं। इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए नई सूची की तैयारी है।

उमाकांत का रिटायरमेंट तय

पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव (आईएएस उमाकांत उमराव) जुलाई में रिटायर हो रहे हैं। वे 1996 बैच के आईएएस अफसर हैं। उनके रिटायर होने से एक अहम पद खाली होगा। इस वजह से भी नई सूची की जरूरत महसूस हो रही है।

इसी तरह मुख्यमंत्री के सचिव चंद्रशेखर वालिंबे का भी रिटायरमेंट तय है। वे 2010 बैच के आईएएस अफसर हैं। उनका रिटायरमेंट नवंबर 2026 में होगा। हालांकि अभी इसमें कुछ महीने बाकी हैं।

कमिश्नर स्तर पर भी बदलाव संभव

शहडोल कमिश्नर सुरभि गुप्ता का कार्यकाल भी लगभग पूरा होने वाला है। उनका करीब दो साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इस वजह से उन्हें भोपाल बुलाया जा सकता है। हालांकि अभी इस पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।

पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है। इसी वजह से उन्हें भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग का अतिरिक्त प्रभार मिला है। साथ ही उन्हें खाद्य सुरक्षा आयुक्त का जिम्मा भी दिया गया है। यानी अब उनके पास कई अहम जिम्मेदारियां एक साथ हैं।

हालांकि अगली सूची में उनका एक विभाग वापस भी लिया जा सकता है। इससे उनका कामकाज थोड़ा हल्का हो सकता है।

रमेश कुमार को नई जिम्मेदारी

आईएएस अफसर ई. रमेश कुमार के पास पहले से ही राजस्व विभाग की जिम्मेदारी थी। इसके साथ उनके पास घुमंतु व पिछड़ा वर्ग विभाग भी था। अब उन्हें एक और बड़ा विभाग सौंपा गया है। उन्हें नर्मदा घाटी विकास विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई है। इससे साफ है कि उन पर भरोसा बढ़ा है।

मनीष सिंह के पास ऊर्जा विभाग भी

प्रमुख सचिव मनीष सिंह सीनियर अफसरों में गिने जाते हैं। उनके पास पहले से तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी थी। इसके साथ कौशल विकास व रोजगार विभाग भी उनके पास था। अब उन्हें ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है। यानी उनके पास अब तीन बड़े विभाग हैं।

अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। उनके पास सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही उनके पास संस्कृति विभाग भी है। वे कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष पद पर भी हैं। यानी उनके पास भी एक साथ कई अहम काम हैं।

अगली सूची में इनके प्रभार में भी बदलाव संभव माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर चर्चा तेज है।

सुदाम खाड़े को मिलेगा विभाग

सीएम के नए सचिव बने सुदाम पी. खाड़े को अभी कोई विभाग नहीं मिला है। यह बात थोड़ी हैरान करने वाली है। सीएम सचिव जैसे अहम पद पर होने के बाद भी उनके पास फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं है। माना जा रहा है कि उन्हें जल्द ही कोई महत्वपूर्ण विभाग सौंपा जाएगा। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यह फैसला अगली सूची में हो सकता है।

कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ अफसरों पर जिम्मेदारी बढ़ी है, तो कुछ अभी भी इंतजार में हैं। अगली सूची से यह साफ हो जाएगा कि किसे कौन सा विभाग मिलेगा। तब तक प्रशासनिक गलियारों में हलचल बनी रहेगी।

यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर प्रदेश के प्रशासनिक कामकाज से जुड़ी है, इसलिए आम जनता के लिए मायने रखती है। किसी भी अफसर पर काम का बोझ ज्यादा होने से सरकारी कामकाज की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। वहीं कुछ अफसरों के पास काम न होना भी प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी माना जाता है।

भारतीय प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इससे सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से हो पाता है। यह खबर पूरी तरह सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है और किसी की निजता का उल्लंघन नहीं करती। यह जनता को अपने क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को समझने में मदद करती है। यह लोकतांत्रिक जवाबदेही और सुशासन को भी बढ़ावा देती है।

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