जनकल्याण में फर्जी आंकड़ों का खेल: जन विश्वास से पहले सरकारी शिविरों पर उठे सवाल

Neel Tiwari | Aug 08, 2026, 18:53 IST
Share
जनकल्याण शिविरों में फर्जी आंकड़ों का खेल
Photograph: (THESOOTR)

JABALPUR. मध्य प्रदेश में सरकारी शिविरों के आंकड़ों की पड़ताल में कई सवाल सामने आए हैं। रेंडम 200 नंबरों का चुनाव हुआ। करीब 73 लोगों से बात हुई। किसी ने शिविर में जाने की बात नहीं मानी। सीहोर के लखपति दीदी डेटा पर भी सवाल हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए शिविर लगाए गए।
  • इन शिविरों के सरकारी आंकड़ों में कई सवाल सामने आए हैं।
  • पड़ताल में करीब 200 मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया गया।
  • करीब 73 लोगों से बात हुई, लेकिन किसी ने शिविर नहीं माना।
  • अब जन विश्वास शिविर के बीच पुराने आंकड़ों की जांच जरूरी है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में संकल्प से समाधान योजना शुरू की। जनकल्याण कीइस योजना के जरिए प्रदेश के 55 जिलों में अलग-अलग ब्लॉक में शिविर लगाए गए। सरकार का मकसद सरकारी योजनाओं से जुड़े लोगों को लाभ देना था।

लोगों की समस्याएं सुनना और योजनाओं का लाभ दिलाना भी इसका हिस्सा था। इसके बाद 12 जून से 18 जून तक जन कल्याण शिविर लगाए गए। नाम बदल गया, लेकिन इन शिविरों का मकसद फिर वही रहा।

लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना और उनका काम आसान करना इसका लक्ष्य बताया गया। लेकिन अब इन दोनों अभियानों के आंकड़े ही सवालों के घेरे में हैं।

jan vishwas shivir fake data (3)
jan vishwas shivir fake data (3)


सरकारी आंकड़ों में मोबाइल नंबरों पर सवाल

द सूत्र की पड़ताल में सरकारी आंकड़ों में दर्ज मोबाइल नंबरों की जांच की गई। इसमें सामने आया कि करीब 60 से 70 प्रतिशत मोबाइल नंबर सही नहीं थे। बड़ी संख्या में नंबर बंद मिले। कुछ नंबर ऐसे भी मिले, जिनकी जानकारी आंकड़ों में दर्ज लोगों से नहीं मिली।

पड़ताल के दौरान रेंडमली करीब 200 लोगों को फोन करने की कोशिश की गई। इनमें से करीब 73 लोगों से बात हो सकी। हैरानी की बात यह रही कि बातचीत में एक भी व्यक्ति ने शिविर में जाने की बात नहीं मानी। किसी ने यह भी नहीं माना कि उसे बताए गए शिविर से किसी योजना का लाभ मिला।

jan vishwas shivir fake data (4)
jan vishwas shivir fake data (4)


करीब 73 लोगों से हुई बात, लेकिन शिविर की कहानी नहीं मिली

सरकारी आंकड़ों में दर्ज मोबाइल नंबरों पर संपर्क करना इस पड़ताल का अहम हिस्सा रहा। करीब 200 लोगों को फोन किया गया। इनमें अधिकतर नंबर बंद मिले।

करीब 73 लोगों से बातचीत हो सकी। इन लोगों से पूछा गया कि क्या वे सरकारी शिविर में गए थे। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन्हें शिविर के जरिए किसी योजना का लाभ मिला।

पड़ताल के अनुसार किसी एक व्यक्ति ने भी शिविर में जाने की बात नहीं मानी। इससे सरकारी आंकड़ों की सही जांच और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

छतरपुर के गयादीन को चार योजनाओं का लाभ दिखा

छतरपुर के गयादीन का नाम एक साथ चार योजनाओं के हितग्राही के रूप में बताया गया। पड़ताल में उनसे संपर्क किया गया। गयादीन ने बताया कि वह कभी सरकारी शिविर में नहीं गए। उन्होंने बताया कि कुछ दस्तावेज उन्होंने एक अधिवक्ता के जरिए निकलवाए थे।

जिन योजनाओं का लाभ उनके नाम पर दिखाया गया, उनका उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। इसके बाद पड़ताल में इंदौर, जबलपुर और भोपाल संभाग के आंकड़ों में भी ऐसे लोगों से संपर्क किया गया। वहां भी लोगों ने शिविर में जाने या लाभ मिलने की बात नहीं मानी।

एक व्यक्ति को कई योजनाओं का लाभ तो हुई पड़ताल

सरकारी आंकड़ों में कुछ लोगों को कई योजनाओं का लाभ मिला हुआ दिखाया गया। पहली नजर में यह संभव लगा कि कोई व्यक्ति एक से ज्यादा योजनाओं का लाभ ले सकता है।

इसी बात को समझने के लिए ऐसे लोगों से संपर्क किया गया। बातचीत में अलग जानकारी सामने आने का दावा है। कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने एमपी ऑनलाइन के जरिए आवेदन किया था। कुछ लोगों ने अधिवक्ता के जरिए अपने दस्तावेज निकलवाए थे।

इनमें खसरा, खतौनी और जन्म प्रमाण पत्र जैसी जानकारी शामिल थी। पड़ताल के अनुसार ऐसे लोगों को भी शिविर का हितग्राही दिखाया गया।



सरकारी आंकड़ों में सचिवों के मोबाइल नंबर

पड़ताल में मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान एक और बात सामने आई। सरकारी आंकड़ों में बड़ी संख्या में ऐसे नंबर भी मिले, जो उसी ब्लॉक के सचिवों के बताए गए। इससे आंकड़े तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

बड़ी संख्या में नंबर 9999999999 और 1000000000 भी दर्ज हैं। अगर किसी अधिकारी या सचिव का नंबर किसी हितग्राही के नाम पर दर्ज है, तो इसकी जांच जरूरी है।

सवाल यह भी है कि आंकड़े तैयार करने के बाद हितग्राहियों से दोबारा संपर्क किया गया या नहीं। अगर सत्यापन नहीं हुआ, तो ऐसे आंकड़े सरकार को सही तस्वीर कैसे बताएंगे।

सीहोर में लखपति दीदी के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

पड़ताल का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा लखपति दीदी योजना से जुड़ा बताया गया। भोपाल संभाग के सीहोर में हजारों लखपति दीदी आवेदन स्वीकार दिखाए गए। लेकिन इन आंकड़ों में किसी भी हितग्राही की समग्र आईडी नहीं मिली।

इसके बाद सूची में दर्ज मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया गया। बातचीत में कई महिलाओं ने आवेदन करने से इनकार किया। कई महिलाओं ने यह भी कहा कि उन्हें किसी योजना का लाभ नहीं मिला। यही वजह है कि सीहोर के लखपति दीदी आंकड़ों पर सबसे ज्यादा सवाल उठे।

jan vishwas shivir fake data
jan vishwas shivir fake data


उषा जैसी कई महिलाओं का आवेदन से ही इनकार

सीहोर की कथित लखपति दीदी उषा से भी फोन पर संपर्क किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने लखपति दीदी योजना के लिए आवेदन किया था। पड़ताल के अनुसार उषा ने आवेदन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सीहोर में ऐसे किसी शिविर में जाने की बात भी नहीं मानी।

इसके बाद सूची में दर्ज हाजरा बी के नंबर पर फोन किया गया। जिस व्यक्ति ने फोन उठाया, उसने नंबर गलत बताया। इससे सूची में दर्ज नाम और नंबर की जांच को लेकर सवाल और गंभीर हो गए।

हैरानी वाली बात यह रही कि किसी ने यह भी नहीं माना कि वह सीहोर में रहते हैं। जिससे इस बात की भी आशंका पैदा हो रही है कि यह नंबर रेंडमली मनमर्जी से डाले गए थे।

सुनीता, अबनति और कमला के नाम पर भी सवाल

पड़ताल में सुनीता, अबनति और कमला जैसे नाम भी सामने आए। इन नामों के साथ दिए गए मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया गया। बातचीत में योजना का लाभ मिलने की बात सामने नहीं आई।

किसी ने यह भी नहीं माना कि उन्होंने शिविर में जाकर आवेदन किया था। एक कथित लखपति दीदी ऐसी भी मिली, जो भोपाल में रहकर पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने भी सीहोर जाकर योजना के लिए आवेदन करने से इनकार किया। इससे सवाल उठता है कि सूची में नाम और मोबाइल नंबर किस आधार पर दर्ज हुए।

जनपद सीईओ नमिता बघेल से भी मांगा गया जवाब

फर्जी आंकड़ों के आरोपों की पड़ताल के लिए जनपद सीईओ नमिता बघेल से बात की गई। उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी गई। उनसे मोबाइल नंबरों, हितग्राहियों और लखपति दीदी के आंकड़ों पर सवाल किए गए। उन्होंने इस मामले में अपडेट देने की बात कही। लेकिन पड़ताल के अनुसार करीब 15 दिन बाद भी कोई अपडेट नहीं मिला।

विभागीय सूत्रों ने भी आंकड़ों की जांच पर उठाए सवाल

विभागीय सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री की योजनाओं को अधिकारी ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि शिविरों के आंकड़ों की सही जांच नहीं होती।

कई लोगों के नाम हितग्राही सूची में जोड़ दिए जाते हैं। इनमें ऐसे लोग भी शामिल बताए जाते हैं, जो एमपी ऑनलाइन से दस्तावेज बनवाते हैं। कुछ लोग अधिवक्ता के जरिए भी अपने दस्तावेज निकलवाते हैं।

खसरा, खतौनी या जन्म प्रमाण पत्र लेने वाले लोगों को भी शिविर का हितग्राही बताया जा सकता है। अगर ऐसा हो रहा है, तो आंकड़े वास्तविक लाभार्थियों की संख्या नहीं बताएंगे।

अब जन विश्वास शिविर के सामने सबसे बड़ा सवाल

संकल्प से समाधान और जन कल्याण शिविरों के बाद अब जन विश्वास शिविर शुरू हो रहा है। यह अभियान 7 अगस्त से शुरू किया जा रहा है। सरकार का मकसद जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। लेकिन पुराने आंकड़ों पर उठे सवाल नए अभियान के लिए बड़ी चुनौती हैं।

अब सबसे जरूरी है कि हर हितग्राही की पहचान की जांच हो। हर मोबाइल नंबर की पुष्टि होनी चाहिए। हर योजना का लाभ किसे मिला, यह भी साफ होना चाहिए। इससे ही पता चलेगा कि शिविर जमीन पर सफल हैं या सिर्फ आंकड़ों में।

जागो मोहन, क्योंकि जन विश्वास आंकड़ों से नहीं बनेगा

मुख्यमंत्री मोहन यादव की योजनाओं का मकसद जनता को लाभ देना है। इसके लिए शिविर लगाना अच्छी पहल हो सकती है। लेकिन शिविर की सफलता सिर्फ आंकड़ों से तय नहीं होनी चाहिए। सफलता तब मानी जाएगी, जब असली लोगों को असली लाभ मिले।

अगर किसी व्यक्ति का नाम बिना लाभ के हितग्राही सूची में जुड़ता है, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठता है। अब सरकार को पुराने आंकड़ों की जांच करनी चाहिए। साथ ही नए शिविरों में हर नाम का सही सत्यापन होना चाहिए। आखिर जनता को बढ़े हुए आंकड़े नहीं, बल्कि योजनाओं का वास्तविक लाभ चाहिए।

ये खबरें भी पढ़ें...

ट्विशा केस: पूर्व जज गिरिबाला अब इस आधार पर मांगेंगी बेल, सुनवाई 10 अगस्त को

एम्स भोपाल को मिले नए डायरेक्टर, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोटवाल को कमान

उज्जैन यूनिवर्सिटी में अनोखा मामला: छात्र को 1600 में से दे डाले 1604 नंबर

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष आ रहे इंदौर, निगम चुनाव के लिए पार्षदों को देंगे टिप्स

Tags:
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव
  • जनकल्याण
  • लखपति दीदी
  • एमपी ऑनलाइन
  • संकल्प से समाधान
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा