जीतू पटवारी बोले, सीएम राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं, एमपी के 7669 करोड़ कहां गए बताएं

Sanjay Dhiman | Jul 09, 2026, 16:32 IST
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सरदार सरोवर समझौते पर जीतू पटवारी ने मोहन सरकार से पूछा, एमपी के 7669 करोड़ रुपए के दावे का क्या हुआ। श्वेत पत्र और विधानसभा चर्चा की मांग की।

सरदार सरोवर बांध को लेकर चार राज्यों के बीच पुराना पैसों का विवाद था। दिल्ली में इस विवाद का वन टाइम सेटलमेंट हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस समझौते पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एमपी के 7669 करोड़ रुपए के दावे को बिना बताए छोड़ दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री से इसका जवाब मांगा है।

पटवारी का बड़ा हमला

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सीधी चुनौती दी है। भोपाल स्थित अपने निवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कहा, मुख्यमंत्री जी आप राजा हरिश्चंद्र नहीं हो कि जो कह देंगे जनता उसे सच मान लेगी।

पटवारी ने सीधा सवाल पूछा। मध्यप्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना में हुए नुकसान के आधार पर 7669 करोड़ रुपए का दावा किया था। यह दावा आखिर क्यों छोड़ दिया गया। उन्होंने इस पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। साथ ही विधानसभा में चर्चा कराने की भी मांग रखी।

नर्मदा एमपी की जीवन रेखा

पटवारी ने कहा कि नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है। सरदार सरोवर बांध बनने से सबसे ज्यादा नुकसान मध्यप्रदेश को ही हुआ। सबसे अधिक कृषि भूमि और वन क्षेत्र प्रदेश में डूबा। सबसे ज्यादा आदिवासी परिवारों का विस्थापन भी यहीं हुआ। पुनर्वास का सबसे बड़ा बोझ भी मध्यप्रदेश ने ही उठाया। इसी आधार पर पहले 7669 करोड़ रुपए का दावा किया गया था।

पटवारी ने आरोप लगाया कि अब सरकार इस दावे का जिक्र ही नहीं कर रही। सरकार यह बता रही है कि गुजरात की करीब 1500 करोड़ रुपए की देनदारी को 231 करोड़ रुपए में निपटाया गया। इससे 1268 करोड़ रुपए की बचत हुई। लेकिन सरकार यह नहीं बता रही कि एमपी के हजारों करोड़ के दावे का क्या हुआ।

किस आधार पर हुआ फैसला

पटवारी ने पूछा कि यह फैसला किस कानूनी और वित्तीय आधार पर लिया गया। क्या इस पर कैबिनेट में चर्चा हुई। क्या विपक्ष को विश्वास में लिया गया। क्या पर्यावरणविदों और विषय विशेषज्ञों से राय ली गई।

पटवारी ने बताया कि दिल्ली जाते समय विमान में उनके साथ अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि लगभग 7500 करोड़ रुपए की देनदारियों को लेकर पूरी तैयारी के साथ बैठक में जा रहे हैं। अब सवाल है कि इतना बड़ा दावा आखिर कैसे समाप्त हो गया।

पटवारी ने मुख्यमंत्री पर सीधा हमला बोला। उनका कहना है कि सरकार में प्रदेश की मूलभूत समस्याओं को समझने की क्षमता ही नहीं दिखती। ढाई साल में सरकार कोई स्पष्ट विजन पेश नहीं कर सकी।

एमपी पर साढ़े पांच लाख करोड़ का कर्ज

पटवारी ने प्रदेश की आर्थिक हालत का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक राज्य पर 5.61 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो चुका है। सरकार लगातार नया कर्ज लेकर आयोजनों और प्रचार पर खर्च कर रही है। हाल ही में 3600 करोड़ रुपए का नया कर्ज भी लिया गया।

पटवारी ने मांग की कि सरकार समझौते का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक करे। साथ ही यह भी बताए कि चार राज्यों के बीच किन शर्तों पर सहमति बनी। अगर दावा उचित था तो उसे क्यों छोड़ा गया, और अगर उचित नहीं था तो पहले वह किस आधार पर किया गया था।

जीतू पटवारी के सरकार से सवाल

  • मध्यप्रदेश के 7669 करोड़ रुपए के दावे का क्या हुआ
  • मुख्यमंत्री ने किस आधार पर समझौते को मंजूरी दी
  • क्या कैबिनेट और विधानसभा में इस पर चर्चा हुई
  • चार राज्यों के समझौते की शर्तें सार्वजनिक क्यों नहीं हुईं
  • सरकार श्वेत पत्र कब लाएगी

पूरे विवाद की पृष्ठभूमि

नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध को लेकर एमपी, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच करीब तीन दशक से पैसों का विवाद चल रहा था। मध्यप्रदेश का दावा था कि बांध से उसकी सबसे ज्यादा जमीन, जंगल और गांव डूबे हैं। इसलिए गुजरात को उसे 7669 करोड़ रुपए का मुआवजा देना चाहिए। दूसरी ओर गुजरात परियोजना की बढ़ी लागत का हिस्सा बाकी राज्यों से मांग रहा था।

मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों ने वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही पुराना विवाद खत्म हो गया।

समझौते में क्या तय हुआ

मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान गुजरात को 550-550 करोड़ रुपए देंगे। तीनों राज्यों से गुजरात को कुल 1650 करोड़ रुपए मिलेंगे। केंद्र की मध्यस्थता में चारों राज्यों ने पुराने वित्तीय दावे खत्म करने पर सहमति बनाई। वर्षों से लंबित विवाद का स्थायी हल निकल आया।

मध्यप्रदेश को सबसे ज्यादा नुकसान क्यों

डूब क्षेत्र की कुल 37,533 हेक्टेयर जमीन में 55.5 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश का है। 178 गांव जलमग्न हुए थे, बाद में यह संख्या 192 तक पहुंच गई। 2014 में बांध की ऊंचाई बढ़ने से 5000 हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन डूब गई। बड़ी मात्रा में खेती की जमीन, जंगल और सरकारी ढांचे इससे प्रभावित हुए।

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