एमपी मनरेगा में खुलासा, 1 करोड़ मजदूरों में सिर्फ 2% को मिला 100 दिन का काम
Aman Vaishnav | Jul 23, 2026, 12:00 IST
एमपी मनरेगा फर्जीवाड़ा
कैग रिपोर्ट में मध्य प्रदेश मनरेगा में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। 2019-2024 के बीच सिर्फ 2% लोगों को ही 100 दिन का रोजगार मिला जबकि करोड़ों का फर्जी भुगतान हुआ।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में मनरेगा की 100 दिन रोजगार गारंटी पूरी नहीं हो सकी।
- 2019 से 2024 के बीच सिर्फ 2% पंजीकृत मजदूरों को 100 दिन काम मिला।
- 30% से 47% मजदूरों को चार दिन तक भी काम नहीं मिला।
- कई जिलों में फर्जी जॉब कार्ड से डेढ़ करोड़ रुपए का गलत भुगतान हुआ।
- मजदूरों को तय मजदूरी से 20% से 25% तक कम भी मिली।
रिपोर्ट पांच साल के आंकड़ों पर आधारित है। इस दौरान राज्य में एक करोड़ से ज्यादा मजदूर पंजीकृत रहे, लेकिन इनमें से बेहद कम लोगों को कानून के मुताबिक पूरा रोजगार मिल सका। यह आंकड़ा योजना की मूल भावना पर सवाल खड़े करता है।
कैग रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े
कैग ने इसे गारंटीशुदा रोजगार देने की मंशा में कमी बताया है। यह टिप्पणी योजना के क्रियान्वयन पर सीधा सवाल है।
वहीं 31 मार्च 2024 तक मजदूरी और सामग्री लागत मिलाकर 1217 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित था। इसमें से करीब 55 करोड़ रुपए सिर्फ मजदूरी के बकाया थे। इतनी बड़ी राशि का अटकना मजदूरों के लिए सीधा आर्थिक नुकसान है।
फर्जी भुगतान का खुलासा
इसके अलावा कई मजदूरों को तय दर से कम मजदूरी दी गई। यह कमी 20% से 25% तक रही। यानी मेहनत करने के बावजूद मजदूरों को पूरा हक नहीं मिला।
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मजदूरों को नुकसान कैसे
रोजगार गारंटी योजना का मकसद ही यही है कि गांव के लोगों को स्थानीय स्तर पर काम मिले। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह मकसद बड़े पैमाने पर अधूरा रह गया।
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