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Photograph: (the sootr)
मध्यप्रदेश के पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में गंभीर अपराधों की जांच में सुधार और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए एक नई मानक कार्यप्रणाली (Standard Operating Procedure - SOP) लागू की है।
इस एसओपी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्तर पर जांच में कोई भी देरी या लापरवाही न हो, और हर अधिकारी अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदार हो। इस नई प्रक्रिया में हर स्तर के पुलिस अफसरों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जिससे अपराधों की जांच अधिक प्रभावी और समयबद्ध तरीके से हो सके।
किसे कितनी मिलेगी जिम्मेदारी?
नए एसओपी के तहत, पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारियां अपराधों के प्रकार और गंभीरता के आधार पर तय की गई हैं। विशेष रूप से ध्यान दिया गया है कि गंभीर अपराधों की जांच में किसी भी प्रकार की चूक न हो।
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एसपी की जिम्मेदारी
एसओपी के तहत, जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को हर महीने कम से कम चार गंभीर अपराधों की जांच खुद करनी होगी। यदि इस प्रकार के मामलों की संख्या कम है तो अन्य गंभीर अपराधों को चुनकर उनकी जांच की जाएगी। एसपी जांच के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहेंगे और जांच की निगरानी भी करेंगे, जिससे जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।
ऐसे समझिए पुलिस विभाग की इस एसओपी योजना कोनई एसओपी लागू:एमपी पुलिस के भोपाल पुलिस मुख्यालय ने गंभीर अपराधों की जांच में सुधार और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए नई मानक कार्यप्रणाली (SOP) तैयार की है। अधिकारियों की जिम्मेदारी: जांच के विभिन्न स्तरों पर पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है, जैसे कि धोखाधड़ी के मामलों में राशि के आधार पर जिम्मेदारी बांटी गई है। एसपी की जिम्मेदारी: हर जिले के एसपी को हर माह कम से कम 4 गंभीर अपराधों की जांच स्वयं करनी होगी और अन्य मामलों की निगरानी करनी होगी। जांच प्रक्रिया में सुधार: साक्ष्य संग्रह, संदिग्धों की जांच, और रिपोर्ट समय पर सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा, ताकि कोई भी निर्दोष व्यक्ति फंस न सके। कानूनी दिशा-निर्देश: इंदौर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर, एसओपी का उद्देश्य अपराधों की त्वरित और सही जांच करना है। |
धोखाधड़ी के मामलों में जिम्मेदारी
5 से 20 लाख तक की धोखाधड़ी के मामलों की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की होगी।
20 लाख तक की धोखाधड़ी के मामलों की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक की होगी।
5 लाख तक की धोखाधड़ी के मामलों की जिम्मेदारी अनुविभागीय पुलिस अधिकारी की होगी।
अन्य अपराधों के मामलों की जिम्मेदारी थाना प्रभारी पर डाली जाएगी।
एसओपी के तहत महत्वपूर्ण बिंदु
पर्यवेक्षण अधिकारी को विवेचना में किसी भी प्रकार की गलती के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
साक्ष्यों का संग्रह और संदिग्धों की जांच समय पर की जाएगी।
किसी निर्दोष व्यक्ति पर आरोप न लगे, इसके लिए विशेष ध्यान रखा जाएगा।
एफआईआर (First Information Report) को केवल शुरुआत मानकर, चालान पेश करने में जल्दबाजी न की जाएगी।
विवेचना पूरी होने के बाद, केस डायरी में स्पष्ट अभिमत दर्ज करना अनिवार्य होगा।
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क्यों बनी एसओपी?
यह कदम तब उठाया गया जब इंदौर हाईकोर्ट ने गंभीर अपराधों की जांच में चूक को रोकने के लिए हर जिले में पुलिस अफसरों को जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया था। इसके बाद, पुलिस मुख्यालय ने सुप्रीम कोर्ट से सहमति प्राप्त की और पूरे प्रदेश में एसओपी को लागू किया।
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