बैठे-बैठे ही बेहोश हुआ कांस्टेबल,जवान ने ऐसे बचाई साथी पुलिसकर्मी की जान

मध्यप्रदेश के शाजापुर में अनुसूचित जाति कल्याण थाने में कांस्टेबल जीतेंद्र चंद्रवंशी को अचानक दिल का दौरा पड़ा। साथी पुलिसकर्मी ने सीपीआर देकर उनकी जान बचाई। घटना गुरुवार सुबह आजाक थाने में हुई, जब कांस्टेबल साथी से बातचीत करते समय जमीन पर गिर पड़े।

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Sanjay Dhiman
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Photograph: (the sootr)

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देश में अचानक आने वाले हार्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। आए दिन सुनने और देखने को मिलता है कि किसी व्यक्ति को अचानक अटैक आता है और उसकी मौत हो जाती है। हालांकि, कई लोग इस मामले में खुशकिस्मत भी होते हैं कि उन्हें आसपास के लोग सीपीआर देकर उनकी जान बचा लेते हैं।

ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के शाजापुर में सामने आया। यहां अनुसूचित जाति कल्याण थाने में पदस्थ एक कांस्टेबल को बैठे-बैठे ही अचानक दिल का दौरा पड़ गया। उसके साथ बैठे एक अन्य पुलिसकर्मी ने तत्काल कांस्टेबल को सीपीआर देकर उसकी जान बचाई।

घटना गुरुवार सुबह शाजापुर स्थित आजाक थाने में घटी, जब कॉन्स्टेबल जीतेंद्र चंद्रवंशी अपने साथी से बातचीत कर रहे थे। अचानक उनकी सीने में तेज दर्द हुआ और वह जमीन पर गिर पड़े।

सुबह से ही अस्वस्थ आरक्षक जीतेंद्र

आरक्षक जीतेंद्र चंद्रवंशी सुबह से ही अस्वस्थ महसूस कर रहे थे, उन्हें सीने और हाथ-पैर में दर्द था। इसके बावजूद उन्होंने ड्यूटी की, जो बाद में उनकी हालत और बिगाड़ने का कारण बनी। साथी पुलिसकर्मियों ने अटैक के दौरान उन्हें सीपीआर देने के साथ ही पास के अस्पताल में दाखिल करवाया हैै।  

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CPR का महत्व और सफलता

साथी पुलिसकर्मियों ने तुरंत हार्ट अटैक के दौरान जीतेंद्र को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू किया, जिससे उनकी जान बच गई। डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें इंदौर रेफर किया, और उनकी हालत में सुधार आया। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि जीतेंद्र को हार्ट अटैक आया था।

यह पुलिसकर्मी भी हुए अटैक का शिकार 

शाजापुर के कांस्टेबल जीतेंद्र रघुवंशी के साथ ही बीते कुछ दिनों की बात की जाए तो कई पुलिसकर्मी व अन्य लोग काम के दौरान अटैक का शिकार हुए है। इनमें से कुछ तो खुशकिस्मत रहे कि उन्हें तत्काल सीपीआर मिल गया, लेकिन जिन्हें समय पर मदद नहीं मिली उनकी मौत हो गई।

हार्ट अटैक के बाद सब इंस्पेक्टर ने जान बचाई

ग्वालियर में एक एक्टिवा सवार को हार्ट अटैक आने के बाद सब इंस्पेक्टर राजकुमार बौद्ध ने त्वरित प्रतिक्रिया दिखाई। वह मौके पर पहुंचे और CPR(Cardiopulmonary Resuscitation) देकर व्यक्ति की जान बचाई।

पुलिसकर्मी को आए ऐसे समझें हार्ट अटैक के इस मामले को 

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  1. शाजापुर के लालघाटी स्थित आजाक थाने में ड्यूटी के दौरान एक पुलिसकर्मी को हार्ट अटैक आया।
  2. पुलिसकर्मी जीतेंद्र चंद्रवंशी सुबह से ही अस्वस्थ महसूस कर रहे थे, फिर भी ड्यूटी पर थे।
  3. हार्ट अटैक के बाद उन्होंने सोफे पर गिरकर बेहोश हो गए, तब साथी पुलिसकर्मियों ने त्वरित रूप से सीपीआर दिया।
  4. पुलिसकर्मियों ने उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की पुष्टि की।
  5. डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें इंदौर रेफर किया, जहां उनकी स्थिति में सुधार हुआ।

बाइक पर हार्ट अटैक से पुलिसकर्मी की मौत

रायसेन जिले में एक सब इंस्पेक्टर को बाइक चलाते वक्त हार्ट अटैक आया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है, जहां बाइक चलाते समय वह अचानक गिर गए थे। बाइक पर अटैक का शिकार हुए सब इंस्पेक्टर सुभाष सिंह बताया जा रहा है, वो वाराणसी के रहने वाले थे व बरेली थाने में तैनात थे। 

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काम का दवाब और अनियमित दिनचर्या है कारण 

चिकित्सकों की मानें तो अचानक आने वाली घटनाओं के बढ़ने का कारण काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या और खानपान है। पुलिसकर्मियों को लगातार दस-दस घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है और काम का समय निश्चित नहीं होता। इसके अलावा, लगातार काम के दौरान उनका खानपान भी ठीक नहीं रहता। इसी तरह अन्य लोग भी बेतरतीब खानपान के कारण अपना रूटीन बिगाड़ लेते हैं। वसा युक्त भोजन, जंक फूड और शराब का लगातार सेवन भी दिल के दौरे का कारण बनता है।

आखिर क्यों आता है अचानक हार्ट अटैक 

अचानक हार्ट अटैक कारण मुख्य रूप से कोरोनरी धमनियों में प्लाक (वसा, कोलेस्ट्रॉल आदि का जमाव) के कारण होने वाली एथेरोस्क्लेरोसिस से आता है, जिसमें प्लाक टूटकर रक्त का थक्का बनाता है और हृदय की मांसपेशियों तक रक्त प्रवाह को रोक देता है, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान और निष्क्रिय व अनियमित जीवनशैली इसका कारण बनते है। 

हार्ट अटैक क्यों होता है?

धमनियों में प्लाक का जमाव:

हृदय की मांसपेशियों को ऑक्सीजन पहुँचाने वाली कोरोनरी धमनियों में धीरे-धीरे वसा, कोलेस्ट्रॉल, प्रोटीन और अन्य पदार्थों का जमाव होता है, जिसे प्लाक कहते हैं. इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है।

प्लाक टूटना और थक्का बनना:

जब प्लाक की बाहरी परत कठोर हो जाती है, तो वह अचानक टूट सकती है. इसके टूटने पर, इसके चारों ओर रक्त का थक्का बन जाता है।

रक्त प्रवाह का रुकना:

यह थक्का धमनी को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देता है, जिससे हृदय की मांसपेशियों तक रक्त और ऑक्सीजन पहुँचने में रुकावट आ जाती है।

मांसपेशियों का क्षतिग्रस्त होना:

रक्त प्रवाह के रुकने से हृदय की मांसपेशियों के उस हिस्से को क्षति पहुँचती है या वह मरने लगती है, जिसके कारण हार्ट अटैक आता है।

मुख्य जोखिम कारक

उच्च कोलेस्ट्रॉल:
रक्त में कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर धमनियों में प्लाक बनने में मदद करता है।

उच्च रक्तचाप:
यह हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालता है और धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है। 

मधुमेह:
यह हृदय रोग का एक प्रमुख जोखिम कारक है, खासकर टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में। 

धूम्रपान:
यह धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और रक्त के थक्के बनने के जोखिम को बढ़ाता है।

मोटापा:
यह हृदय रोग के जोखिम को काफी बढ़ा देता है।

निष्क्रिय जीवनशैली:
शारीरिक गतिविधि की कमी से धमनियों में वसा जमा हो सकता है।

पारिवारिक इतिहास:
परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।

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