हाईकोर्ट की निगरानी में खुला नर्सिंग कॉलेज घोटाला, 800 में से 200 ही निकले पात्र
Jitendra Shrivastava | Aug 21, 2026, 24:01 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्यप्रदेश नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े में हाईकोर्ट की सख्ती से बड़ा खुलासा हुआ है। 800 में से करीब 600 कॉलेज अपात्र पाए गए। जांच में सीबीआई के इंस्पेक्टर ही निकले आरोपी...
समझें क्या है पूरा मामला...
- 800 में से 600 नर्सिंग कॉलेज निकले फर्जी।
- हाईकोर्ट की सख्ती से खुली बड़ी फर्जीवाड़े की परत।
- जांच में फंसे सीबीआई के अपने ही इंस्पेक्टर।
- गैराज और एटीएम में चल रहे थे नर्सिंग कॉलेज।
- मान्यता प्राप्त कॉलेज घटकर रह गए सिर्फ 200।
नर्सिंग कॉलेज घोटाला केस 2021 में एक शिकायत से शुरू हुआ था। इसके बाद यह लगातार बड़ा होता चला गया। अब यह मामला राज्य में न्यायिक सक्रियता का एक बड़ा उदाहरण बन चुका है।
शिकायत से याचिका तक
इनमें भवन, लैब और अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाएं शामिल नहीं थीं। कोर्ट के आदेश पर जब रिकॉर्ड पेश हुआ, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
फाइलों में मिलीं बड़ी खामियां
इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। जांच में करीब 800 कॉलेजों में से लगभग 600 कॉलेज अपात्र या कमियों से भरे पाए गए। कई कॉलेज गैराज, एटीएम और स्कूल भवनों में चल रहे थे।
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रजिस्ट्रार पद पर भी गड़बड़ी
आरोप है कि हर बार राज्य शासन ने नियम विरुद्ध किसी अयोग्य नर्स को अस्थायी रूप से रजिस्ट्रार बना दिया। जबकि यह अधिकार अधिनियम के तहत काउंसिल का था, सरकार का नहीं।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन डॉ. एनएम श्रीवास्तव से जुड़ा रहा। आरोप है कि नर्सिंग काउंसिल के पदेन अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने ही 2014 में भोपाल में मात्र 3000 वर्गफीट के मकान में सविता नर्सिंग कॉलेज नाम से अपना निजी कॉलेज खोल लिया था। यह कॉलेज लगातार 7 साल तक मान्यता प्राप्त कर डिग्रियां बांटता रहा।
जांच में ही मिली रिश्वतखोरी
हाईकोर्ट ने इसके बाद भी लगातार निगरानी बनाए रखी। जांच के बीच ही जब 49 नए कॉलेज मान्यता पा गए, तो रजिस्ट्रार सुनीता सिजू को तुरंत निलंबित कर दिया गया।
बाद में पता चला कि निलंबन को कमजोर चार्जशीट और 24 घंटे के भीतर मंत्रालय-अटैचमेंट के जरिए बेअसर किया जा रहा था। कोर्ट की फटकार के बाद सरकार को तुरंत सुधार करना पड़ा।
फिर हुई नई नियुक्ति पर सवाल
इसके ठीक बाद काउंसिल दफ्तर से जांच से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज और हाई-लेवल कमेटी की मूल फाइलें गायब हो गईं। हाईकोर्ट ने पूरा मामला भोपाल पुलिस कमिश्नर और साइबर सेल को सौंप दिया। जुलाई 2025 में सुनवाई के दौरान खुद जजों ने काउंसिल की वेबसाइट से एक फर्जी मार्कशीट डाउनलोड कर अपनी आंखों से पुष्टि की।
नियमों में सेंधमारी पर भी लगी रोक
इसी तरह जांच में अपात्र पाए गए कॉलेजों के हजारों छात्रों को समय पर दूसरे संस्थानों में स्थानांतरित नहीं किया गया था। कोर्ट ने बार-बार निर्देश देकर आखिरकार हजारों छात्रों की शिफ्टिंग सुनिश्चित कराई। शिफ्ट हो चुके छात्रों के परीक्षा परिणाम भी दिलवाए गए।
अधिकारियों को नोटिस, पर कार्रवाई ठंडी
800 से घटकर 200 रह गए कॉलेज
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि हाईकोर्ट की सक्रियता के बिना यह फर्जीवाड़ा सामने नहीं आ पाता। लगातार निगरानी, दोषियों को पद से हटाने और नियमों में सेंधमारी रोकने से ही यह मामला उजागर हो सका।
FAQ
- मध्यप्रदेश नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामला क्या है?
जांच में सामने आया कि प्रदेश के करीब 800 नर्सिंग कॉलेजों में से 600 जरूरी सुविधाओं के बिना ही मान्यता प्राप्त कर चुके थे। हाईकोर्ट की सक्रियता से यह घोटाला उजागर हुआ। - नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले की जांच कब शुरू हुई थी?
जनवरी 2022 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच शुरू हुई थी। शिकायत सितंबर 2021 में की गई थी। - जांच के बाद कितने कॉलेजों की मान्यता बची?
जून 2025 में इस मामले को लीड केस घोषित किए जाने के बाद प्रदेश के मान्यता प्राप्त कॉलेजों की संख्या 700-800 से घटकर करीब 200 रह गई।
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