जजों ने कोर्ट में ही देखी एमपीएनआरसी पोर्टल पर फर्जी मार्कशीट, MPOnline को चेतावनी
Neel Tiwari | Jul 25, 2025, 22:00 IST
Photograph: (thesootr)
मध्यप्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों में फर्जी मान्यता और दस्तावेजों का मामला कोर्ट में खुला। जजों ने एमपीएनआरसी पोर्टल पर फर्जी मार्कशीट देखी और सीबीआई की दो जांचों के बावजूद फर्जीवाड़े पर सवाल उठाए। कोर्ट ने MP Online को चेतावनी दी।
मध्यप्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों में गड़बड़ियों का एक बार फिर हाईकोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों की फर्जी मान्यता और जालसाजी की इस चौंकाने वाली परत को कोर्ट के समक्ष उस वक्त प्रत्यक्ष देखा गया, जब सुनवाई के दौरान खुद जजों ने नर्सिंग काउंसिल (एमपीएनआरसी) के पोर्टल पर फर्जी मार्कशीट को लाइव देखा।
कोर्ट में लाइव खुला
गुरुवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता और लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की ओर से सेंधवा स्थित एक नर्सिंग कॉलेज के फर्जी दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत किए गए। याचिका में आरोप था कि यह कॉलेज दो बार की सीबीआई जांच में “सूटेबल” पाया गया और उसे 2024-25 की मान्यता मिल गई, जबकि कॉलेज के द्वारा आवेदन में दी गई फैकल्टी की मार्कशीट फर्जी पाई गई।
सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा जो मार्कशीट प्रस्तुत की गई है, वह उनके रिकॉर्ड में किसी और नाम से दर्ज है। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आखिर यह फर्जी मार्कशीट किस स्रोत से मिली।
अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट में उसी समय एमपी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (एमपीएनआरसी) की वेबसाइट खोली और जजों को पोर्टल पर उपलब्ध वही मार्कशीट लाइव दिखा दी। इस पर खुद जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला ने पोर्टल पर जाकर मार्कशीट डाउनलोड की और देखा कि याचिकाकर्ता की बात सही है।
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इस मामले में सीबीआई ने पहली बार जो जांच की थी उसमें सीबीआई के कुछ अधिकारी ही रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे जिसके बाद सीबीआई ने दोबारा जांच की लेकिन हैरत की बात या रही कि दोनों जांचों में यह फर्जी मार्कशीट और फैकल्टी पकड़ में नहीं आए।
यह देखकर कोर्ट ने भी आश्चर्य जताया और टिप्पणी की कि जब न्यायालय के समक्ष ही पोर्टल से फर्जी मार्कशीट देखी जा सकती है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है कि पूरे सिस्टम में किस स्तर तक गड़बड़ियां फैली हैं। कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि जो फाइल उन्होंने कोर्ट में पेश की है, उसकी एक प्रति याचिकाकर्ता को भी सौंपी जाए ताकि मामले की पारदर्शिता बनी रहे।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने MPOnline को विशेष निर्देश दिए हैं कि एमपी नर्सिंग काउंसिल के किसी भी ऑनलाइन डेटा से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाए। अगर आदेश का उल्लंघन होता है, तो भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज कराया जाएगा। इस निर्देश से स्पष्ट है कि कोर्ट इस पूरे मामले को अब डिजिटल सबूतों के आधार पर गंभीरता से देख रहा है।
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हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है। यह देखना दिलचस्प होगा कि CBI अपनी अगली रिपोर्ट में क्या नया खुलासा करती है, और क्या राज्य सरकार या नर्सिंग काउंसिल इस पूरे फर्जीवाड़े की जवाबदेही लेती है या नहीं।
बड़ी बात ये है कि यह मामला केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन का दावा है कि प्रदेश के कई पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में इसी तरह की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मान्यता प्राप्त की गई है। यदि यह सच है, तो यह मध्यप्रदेश के नर्सिंग शिक्षा क्षेत्र का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
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कोर्ट में लाइव खुला एमपीएनआरसी पोर्टल
सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा जो मार्कशीट प्रस्तुत की गई है, वह उनके रिकॉर्ड में किसी और नाम से दर्ज है। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आखिर यह फर्जी मार्कशीट किस स्रोत से मिली।
अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट में उसी समय एमपी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (एमपीएनआरसी) की वेबसाइट खोली और जजों को पोर्टल पर उपलब्ध वही मार्कशीट लाइव दिखा दी। इस पर खुद जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला ने पोर्टल पर जाकर मार्कशीट डाउनलोड की और देखा कि याचिकाकर्ता की बात सही है।
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CBI की दो जांचों से भी बच गई फर्जी मार्कशीट
यह देखकर कोर्ट ने भी आश्चर्य जताया और टिप्पणी की कि जब न्यायालय के समक्ष ही पोर्टल से फर्जी मार्कशीट देखी जा सकती है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है कि पूरे सिस्टम में किस स्तर तक गड़बड़ियां फैली हैं। कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि जो फाइल उन्होंने कोर्ट में पेश की है, उसकी एक प्रति याचिकाकर्ता को भी सौंपी जाए ताकि मामले की पारदर्शिता बनी रहे।
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सोमवार को क्या खुलेगा नया राज?
बड़ी बात ये है कि यह मामला केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन का दावा है कि प्रदेश के कई पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में इसी तरह की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मान्यता प्राप्त की गई है। यदि यह सच है, तो यह मध्यप्रदेश के नर्सिंग शिक्षा क्षेत्र का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
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