MP में ओबीसी आरक्षण पर कानूनी और सियासी लड़ाई तेज, सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार, तो कांग्रेस ने दिल्ली में बुलाई बैठक
Ramanand Tiwari | Oct 28, 2026, 22:02 IST
MP में OBC आरक्षण पर सरकार और कांग्रेस आमने-सामने आई।
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। वहीं, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आगे की रणनीति बनाने के लिए 2 नवंबर को दिल्ली में बैठक बुलाई है। इस बैठक में कांग्रेस की सात सदस्यीय समिति शामिल होगी। दूसरी तरफ सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है।
सबसे बड़ा सवाल 13 फीसदी रोके गए पदों को लेकर है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने साल 2019 में ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले कानून को रद्द कर दिया था।
हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी रखने का फैसला दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने 13 फीसदी रोके गए पदों को तीन महीने के भीतर अनारक्षित श्रेणी से भरने का आदेश दिया था।
इस फैसले के बाद ओबीसी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। संगठनों की मांग है कि प्रदेश में 27 फीसदी आरक्षण लागू किया जाए।
सरकार ने
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए उस पर रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही 13 फीसदी रोके गए पदों को लेकर भी राहत मांगी गई है।
हालांकि, सरकार की अपील में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन ने 22 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी थी। एसोसिएशन के मुताबिक सरकारी अपील में 10 तकनीकी आपत्तियां दर्ज हुई हैं। अब सवाल उठ रहा है कि सरकार इन कमियों को कब तक दूर करेगी।
यहां समझना जरूरी है कि तकनीकी आपत्तियां आने का मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी है। अपील पर आगे क्या होगा, यह कोर्ट की प्रक्रिया और आने वाले आदेशों से साफ होगा।
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस भी सक्रिय हो गई है। पार्टी ने 24 अक्टूबर को ओबीसी अधिकारों और भागीदारी को लेकर प्रदेश स्तरीय समिति बनाई है। इस समिति में कांग्रेस के छह नेताओं को नामित किया गया है। इनमें अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल, हिना कांवरे, राजकुमार पटेल, सिद्धार्थ कुशवाहा और दिनेश गुर्जर शामिल हैं।
इनके अलावा कांग्रेस ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष को भी पदेन सदस्य बनाया गया है। इस तरह समिति में कुल सात सदस्य हैं।
कांग्रेस ने 2 नवंबर को दिल्ली में समिति की बैठक बुलाई है। इसमें ओबीसी आरक्षण को लेकर आगे क्या करना है, इस पर चर्चा होगी। पार्टी इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक उठाने की तैयारी में है। हालांकि, अभी किसी आंदोलन की तारीख या पूरा कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।
बैठक में आंदोलन की रूपरेखा (Action Plan) और ओबीसी वर्ग की मांगों पर बातचीत होने की उम्मीद है। कांग्रेस सरकार से आरक्षण को लेकर जवाब भी मांग सकती है। हालांकि, पार्टी की आगे की रणनीति बैठक के बाद ही साफ होगी।
इस पूरे विवाद का सबसे ज्यादा असर उन युवाओं पर पड़ रहा है, जो सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने 13 फीसदी रोके गए पदों को अनारक्षित श्रेणी से भरने का आदेश दिया है। दूसरी तरफ राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
ऐसे में अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन पदों पर भर्ती कैसे होगी और उन्हें कब तक इंतजार करना पड़ेगा। जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई नया आदेश नहीं आता, तब तक भर्ती से जुड़ी स्थिति को लेकर उम्मीदवारों की चिंता बनी रह सकती है।
ओबीसी संगठन प्रदेश में 27 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग कर रहे हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनकी नाराजगी सामने आई है।
संगठनों का कहना है कि ओबीसी वर्ग को तय आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर प्रदेश में विरोध और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी कर रही है।
फिलहाल ओबीसी आरक्षण का मामला दो जगह चल रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में सरकार की अपील है। दूसरी तरफ कांग्रेस दिल्ली में बैठक कर आगे की रणनीति तैयार करेगी। अब देखना होगा कि सरकार अपनी अपील की तकनीकी कमियों को कब तक दूर करती है और सुप्रीम कोर्ट से क्या आदेश आता है।
इसके साथ ही 2 नवंबर की बैठक के बाद कांग्रेस का अगला कदम भी सामने आ सकता है। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल उन अभ्यर्थियों का है, जिनकी सरकारी नौकरी 13 फीसदी रोके गए पदों के कारण अधर में है। उन्हें अदालत के अगले फैसले और भर्ती प्रक्रिया (Recruitment Process) की स्थिति साफ होने का इंतजार है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा विवाद
हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी रखने का फैसला दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने 13 फीसदी रोके गए पदों को तीन महीने के भीतर अनारक्षित श्रेणी से भरने का आदेश दिया था।
इस फैसले के बाद ओबीसी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। संगठनों की मांग है कि प्रदेश में 27 फीसदी आरक्षण लागू किया जाए।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई अपील
हालांकि, सरकार की अपील में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई हैं। ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन ने 22 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी थी। एसोसिएशन के मुताबिक सरकारी अपील में 10 तकनीकी आपत्तियां दर्ज हुई हैं। अब सवाल उठ रहा है कि सरकार इन कमियों को कब तक दूर करेगी।
यहां समझना जरूरी है कि तकनीकी आपत्तियां आने का मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी है। अपील पर आगे क्या होगा, यह कोर्ट की प्रक्रिया और आने वाले आदेशों से साफ होगा।
कांग्रेस ने बनाई सात सदस्यीय समिति
इनके अलावा कांग्रेस ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष को भी पदेन सदस्य बनाया गया है। इस तरह समिति में कुल सात सदस्य हैं।
दिल्ली में 2 नवंबर को बनेगी आगे की रणनीति
बैठक में आंदोलन की रूपरेखा (Action Plan) और ओबीसी वर्ग की मांगों पर बातचीत होने की उम्मीद है। कांग्रेस सरकार से आरक्षण को लेकर जवाब भी मांग सकती है। हालांकि, पार्टी की आगे की रणनीति बैठक के बाद ही साफ होगी।
13 फीसदी रोके गए पदों का क्या होगा?
ऐसे में अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन पदों पर भर्ती कैसे होगी और उन्हें कब तक इंतजार करना पड़ेगा। जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई नया आदेश नहीं आता, तब तक भर्ती से जुड़ी स्थिति को लेकर उम्मीदवारों की चिंता बनी रह सकती है।
ओबीसी संगठनों की क्या मांग है?
संगठनों का कहना है कि ओबीसी वर्ग को तय आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर प्रदेश में विरोध और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी कर रही है।
अब आगे क्या होगा?
इसके साथ ही 2 नवंबर की बैठक के बाद कांग्रेस का अगला कदम भी सामने आ सकता है। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल उन अभ्यर्थियों का है, जिनकी सरकारी नौकरी 13 फीसदी रोके गए पदों के कारण अधर में है। उन्हें अदालत के अगले फैसले और भर्ती प्रक्रिया (Recruitment Process) की स्थिति साफ होने का इंतजार है।
चक्रवात अर्नब का खतरा: रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के 9 जिलों में स्कूल बंद, 29 अक्टूबर को छुट्टी
By VINAY VERMA
RSS के चरैवेति-एकत्रीकरण में 1 लाख स्वयंसेवक, पदाधिकारी बोले - कुछ शक्तियां विचारों को बदलने की कोशिश कर रही
By Sanjay Gupta
राजस्थान वन विभाग को 31 अक्टूबर तक मिलेगा नया मुखिया या चलेगा अतिरिक्त प्रभार? चयन समिति की दूसरी बैठक में भी फैसला नहीं
By Raghvendra Singh Rathore
Rajasthan TopNews: पंचायतीराज चुनाव के दूसरे चरण के मतदान संपन्न, बांसवाड़ा में सर्वाधिक 76 प्रतिशत
By Jageshwar Prasad
छत्तीसगढ़ में अगले साल कम मिलेंगी छुट्टियां! सरकारी कैलेंडर जारी, होली-दिवाली कब पड़ेगी?
By VINAY VERMA
आत्मानंद स्कूलों में 1812 पदों पर भर्ती, 31 अक्टूबर से परीक्षा; 34 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी आजमाएंगे किस्मत
By VINAY VERMA
डीजीपी कैलाश मकवाणा 30 नवंबर को होंगे रिटायर, 1 दिसंबर को एमपी को मिलेगा नया DGP, गृह विभाग ने जारी किया आदेश
By Amresh Kushwaha