एमपी में स्वच्छता दावों की खुली पोल, जनगणना में सामने आया सच, कई गांवों में आज भी शौचालय नहीं
Aman Vaishnav | May 22, 2026, 13:53 IST
mp odf claims vs reality census reports toilet shortage
मध्यप्रदेश में ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) के दावों के बीच जनगणना में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। सागर और बुंदेलखंड के कई इलाकों में 50% से अधिक घरों में शौचालय नहीं मिले हैं।
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- केंद्र सरकार ने 2018-19 में पूरे देश को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया था।
- इसके बावजूद मौजूदा जनगणना के दौरान कई इलाकों के घरों में शौचालय नहीं पाए गए हैं।
- यह मामला तब खुला जब सागर जिले के तहसीलदारों का एक पत्र सामने आया।
- कई जिलों की निचली बस्तियों और गांवों में सरकारी दावों के बिल्कुल उलट स्थिति देखने मिली है।
- इस गड़बड़ी को लेकर अफसर एक अलर ही तर्क दे रहे हैं।
सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
अब जो आंकड़े जनगणना के पहले चरण में निकलकर सामने आ रहे हैं, उन्होंने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। कई क्षेत्रों में आज भी 50% से ज्यादा ऐसे घर मिले हैं जहां शौचालय बने ही नहीं हैं।
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सागर और टीकमगढ़ में सबसे ज्यादा खराब हालात
सागर जिला: यहां हालात इतने बिगड़े हुए हैं कि तहसीलदारों को बकायदा एक पत्र जारी करना पड़ा है। इस पत्र में जनगणना करने वाले प्रगणकों को निर्देश दिए गए।
इसमें कहा गया कि वे फिर से जानकारी भरें और शौचालय के आंकड़ों को सुधारकर 50% से अधिक दिखाएं। यह पूरा काम 30 मई तक खत्म करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
टीकमगढ़ जिला: यहां के कई गांवों और निचली बस्तियों में शौचालय न होने की बात खुलकर सामने आ गई है। टीकमगढ़ के खरगापुर ब्लॉक में तो सबसे ज्यादा ऐसे घर मिले हैं, जिनमें शौचालय की सुविधा है ही नहीं।
अफसरों ने दिए दो बड़े तर्क
1. लोग डर के मारे सही जानकारी छिपा रहे
लोगों को डर है कि अपने घर की बिल्कुल सही स्थिति बता दी तो सरकार की तरफ से मिलने वाली योजनाओं का लाभ बंद हो जाएगा। इसी डर की वजह से लोग अपने घरों की बुनियादी सुविधाओं को बहुत कम करके बता रहे हैं।
2. मनमानी कर रहे प्रगणक
साथ ही अपने घर के कमरों की संख्या, कार, मोबाइल फोन, इंटरनेट, लैपटॉप-कंप्यूटर और एलपीजी गैस सिलेंडर जैसी सुख-सुविधाओं से जुड़े सवालों सही जवाब नहीं दे रहे।
इसके साथ ही जनगणना करने वाले प्रगणकों पर भी समय का बहुत ज्यादा दबाव है। इस दबाव के चक्कर में वे खुद अपने मन से भी कई जानकारियां फॉर्म में भर रहे हैं।
एमपी कांग्रेस ने भाजपा को घेरा
अब जनगणना के आंकड़ों ने विकास के उन झूठे पोस्टरों को फाड़कर रख दिया है। हकीकत यह है कि आज भी प्रदेश के कई इलाकों में आधे घरों में शौचालय तक नहीं हैं।
अब सरकार और अधिकारी अपनी नाकामी छिपाने के लिए कभी जनता पर गलत जानकारी देने का आरोप लगा रहे हैं, तो कभी प्रगणकों पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। सवाल यह है कि अगर सब कुछ आदर्श था तो फिर आंकड़ों में सच बाहर कैसे आ गया?
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