विधानसभा के सवाल का जवाब बनाने में अफसरों को छूट रहे पसीने

नर्मदापुरम के तवानगर वनमंडल में 1300 पेड़ों की अवैध कटाई का मामला विधानसभा में उठ सकता है। सत्ता पक्ष के ही एक विधायक ने इस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण लगाया है। विभागीय अफसरों को इसका जवाब तैयार करने में कठिनाई हो रही है।

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Ravi Awasthi
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Photograph: (The Sootr)

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BHOPAL. नर्मदापुरम के तवानगर वनमंडल से सागौन व सतकटा के करीब 13 सौ पेड़ों की अवैध कटाई का मामला मध्यप्रदेश विधानसभा में गूंजने के आसार हैं। खास बात यह कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के ही एक विधायक की ओर से ध्यानाकर्षण लगाया गया है। इसके जरिए सरकार को घेरने की तैयारी है।

जवाब बनाने में अफसरों को आया पसीना

आगामी एक दिसंबर से राज्य विधानसभा (MP ASSEMBLY) का विंटर सेशन शुरू हो रहा है। इसमें नर्मदापुरम के जंगल में हुई अवैध कटाई का मामला गर्माने के आसार है। सूत्रों के मुताबिक, इसे लेकर ध्यानाकर्षण क्षेत्रीय विधायक की ओर से ही दायर किया गया। विधानसभा ने विभाग से इस मामले में जवाब तलब किया है। इसे तैयार करने में विभागीय अफसरों को पसीना आ रहा है।

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छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, जिम्मेदारों का बख्शा

दरअसल, अवैध कटाई का मामला उजागर होने पर विभागीय अफसरों ने पहले तो इसे दबाने की पूरी कोशिश की। बाद में इसे छोटा मामला बताने की गरज सिर्फ 356 पेड़ कटाई को लेकर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया। इस मामले में ​करीब एक दर्जन छोटे कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस देकर मामले की इतिश्री कर ली,लेकिन वन वृत के वरिष्ठ अधिकारियों को बख्श दिया गया। 

शाखा प्रमुख के बदलने पर खुला राज

करीब दो साल तक चली इस अवैध कटाई का खुलासा उस वक्त हुआ जब वन मुख्यालय में पीसीसीएफ संरक्षण पद से मनोज अग्रवाल को हटाकर विभाष ठाकुर को पदस्थ किया। ठाकुर ने पद संभालते ही गत सितंबर में भोपाल से राज्य स्तरीय उड़न दस्ते को जांच के लिए भेजा। 

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जंगल में मिले सिर्फ ठूंठ

जांच में खुलासा हुआ कि यह अवैध कटाई जनवरी 2023 से अगस्त 2025 के बीच हुई। इस दौरान सागौन के 1242 और सतकटा के 38 पेड़ काट दिए गए। उड़नदस्ते को मौके पर सिर्फ काटे गए वृक्षों के ठूंठ मिले। काटे गए पेड़ों की कीमत करीब 2 करोड़ 82 लाख रुपए आंकी गई। 

कभी था सागौन का घना जंगल

नर्मदापुरम वन क्षेत्र उच्च श्रेणी के सागौन के जंगल के तौर पर जाना जाता है। विशेषकर तवानगर वनमंडल की छीपीखापा बीट में कभी इन वृक्षों की भरमार रही। यह जंगल बाघ और तेंदुओं की आवाजाही वाला भी रहा है। इसके चलते इसे प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया। इसी का लाभ विभागीय मिलीभगत से लकड़ी तस्करों ने उठाया।

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चार कर्मचारियों से लाखों की वसूली का नोटिस

प्रकरण में वन मंडल डीएफओ ने कार्रवाई के नाम पर चार छोटे कर्मचारियों वनपाल अजय श्रीवास्तव, वनरक्षक अजय गौर, राजेश सरियाम और राजेश यादव पर करोड़ों रुपए की वसूली थोप दी। उन्हें लाखों रुपए की वसूली का नोटिस जारी किया गया है।

अवैध कटाई पर सभी की जिम्मेदारी तय

वन विभाग के नियमों के अनुसार, 25 वृक्ष कटने पर रेंजर जिम्मेदार होता है, 50 पर एसडीओ और 100 पर डीएफओ। लेकिन 1242 वृक्षों के नुकसान के मामले में सीसीएफ भी जिम्मेदार होते हैं। इसके बावजूद, इस मामले में डीएफओ और सीसीएफ पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, केवल वनपाल और वनरक्षकों को जिम्मेदार ठहराया गया है।

पीसीसीएफ का आदेश भी किया नजरअंदाज

पीसीसीएफ व्ही एन अंबाडे ने डीएफओ पर कार्रवाई करने की सिफारिश की, लेकिन नर्मदापुरम सीसीएफ अशोक चौहान इससे बचते रहे। मामला बढ़ता देख, गत 29 अक्टूबर को डीएफओ को नोटिस जारी किया। हैरत की बात यह कि तवानगर वन सर्किल सीसीएफ कार्यालय से महज एक किमी की दूरी पर है,लेकिन दो साल तक चली इस अवैध कटाई से सीसीएफ अंजान बने रहे। 

अनुमति किसी कूप की, कट गया कोई और

नर्मदापुरम वन वृत में ही वन अधिकारी किस तरह काम कर रहे हैं। इटारसी के लालपानी वन क्षेत्र की बैलगड़ा बीट इसकी बानगी है। भारत सरकार ने इस बीट के कूप दो में इमारती लकड़ी को काटे जाने की अनुमति दी थी, लेकिन इसके विपरीत कूप तीन में यह कटाई हो गई। हैरत की बात यह कि ​इस पर पर्दा डालने वनमंडल अधिकारियों ने कूप दो में पौधरोपण की कार्ययोजना बनाकर इसका प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया। जबकि इस कूप में जंगल काटा ही नहीं गया।

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मध्यप्रदेश MP ASSEMBLY नर्मदापुरम पीसीसीएफ विंटर सेशन
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