भोपाल में आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, बोले नियमितीकरण नहीं तो घेरेंगे राजधानी
Sanjay Dhiman | Aug 02, 2026, 17:19 IST
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भोपाल में आउटसोर्स कर्मचारियों ने नियमितीकरण और वेतन सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। मांगें न मानने पर भोपाल घेराव की चेतावनी दी गई है।
भोपाल के अंबेडकर मैदान में रविवार को आउटसोर्स कर्मचारियों ने धरना दिया। भारतीय मजदूर संघ ने इसका नेतृत्व किया। प्रदेश में करीब 4.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। मांगें न मानने पर भोपाल घेराव की चेतावनी दी गई है।
रविवार को राजधानी भोपाल का अंबेडकर मैदान कर्मचारियों से भर गया। विभिन्न सरकारी विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारी बड़ी संख्या में पहुंचे। भारतीय मजदूर संघ ने इस एक दिवसीय धरने का आयोजन किया था।
संगठन का कहना है कि प्रदेश के अलग-अलग विभागों में लगभग 4.5 लाख कर्मचारी आउटसोर्स के जरिए काम कर रहे हैं। इन्हें न तो उचित वेतन मिलता है और न ही सेवा सुरक्षा। सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जातीं।
प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें 17 अलग-अलग मांगें शामिल की गई हैं।
धरने में मौजूद पदाधिकारियों ने सरकार से सीधी बात कही। उन्होंने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारी वर्षों से सरकारी योजनाओं को चलाने में मदद कर रहे हैं। इसके बावजूद उनके लिए कोई स्थायी नीति नहीं बनी है।
कर्मचारियों ने मांग की कि सरकार आउटसोर्स सर्विस सिक्योरिटी एक्ट बनाए। इसके अलावा आउटसोर्स निगम के गठन की भी मांग उठी। समान काम के लिए समान वेतन देने की बात कही गई।
श्रम कानूनों का सख्ती से पालन करने की मांग भी की गई। समय पर वेतन भुगतान और ईपीएफ (EPF – Employees' Provident Fund), ईएसआई (ESI – Employees' State Insurance) जैसी सुविधाएं देने की मांग रखी गई। भर्ती के दौरान अनुभव के आधार पर बोनस अंक देने की व्यवस्था लागू करने की भी अपील की गई।
मध्यप्रदेश बाह्य स्त्रोत विद्युत कर्मचारी संगठन ने ऊर्जा विभाग का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में कर्मचारी जोखिमभरे हालात में काम करते हैं।
अक्सर बिजली दुर्घटनाओं में कर्मचारियों की मौत हो जाती है या वे गंभीर रूप से घायल होते हैं। इसके बावजूद प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं मिलती।
संगठन का कहना है कि दुर्घटना बीमा और सही मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदेश सचिव राहुल मालवीय ने साफ शब्दों में सरकार को चेताया। उन्होंने कहा कि संगठन फिलहाल बातचीत से समाधान चाहता है।
उन्होंने आगे कहा कि यह आंदोलन का पहला संकेतिक चरण है। अगर सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो हालात बदल सकते हैं। अगले चरण में बड़ी संख्या में कर्मचारी भोपाल का घेराव करेंगे।
17 सूत्रीय ज्ञापन में कई अहम मांगें दर्ज हैं। इनमें आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाना शामिल है। सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी है।
हर महीने सात तारीख तक वेतन भुगतान करने की मांग रखी गई है। विभाग से सीधे भुगतान कर बिचौलिया व्यवस्था खत्म करने की बात कही गई है।
अनुभव के आधार पर वेतन बढ़ाने और भर्ती में प्राथमिकता देने की मांग है। बिना जांच किसी कर्मचारी की सेवा समाप्त न करने की मांग भी शामिल है। अतिरिक्त काम कराने पर नियम अनुसार भुगतान करने की अपील की गई है।
संगठन ने साफ कहा है कि यदि जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और व्यापक होता जाएगा।
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रविवार को उमड़ा जनसैलाब
संगठन का कहना है कि प्रदेश के अलग-अलग विभागों में लगभग 4.5 लाख कर्मचारी आउटसोर्स के जरिए काम कर रहे हैं। इन्हें न तो उचित वेतन मिलता है और न ही सेवा सुरक्षा। सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जातीं।
प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें 17 अलग-अलग मांगें शामिल की गई हैं।
ठेकेदारी प्रथा खत्म करने की मांग
कर्मचारियों ने मांग की कि सरकार आउटसोर्स सर्विस सिक्योरिटी एक्ट बनाए। इसके अलावा आउटसोर्स निगम के गठन की भी मांग उठी। समान काम के लिए समान वेतन देने की बात कही गई।
श्रम कानूनों का सख्ती से पालन करने की मांग भी की गई। समय पर वेतन भुगतान और ईपीएफ (EPF – Employees' Provident Fund), ईएसआई (ESI – Employees' State Insurance) जैसी सुविधाएं देने की मांग रखी गई। भर्ती के दौरान अनुभव के आधार पर बोनस अंक देने की व्यवस्था लागू करने की भी अपील की गई।
बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल
अक्सर बिजली दुर्घटनाओं में कर्मचारियों की मौत हो जाती है या वे गंभीर रूप से घायल होते हैं। इसके बावजूद प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं मिलती।
संगठन का कहना है कि दुर्घटना बीमा और सही मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संवाद चाहते हैं, आंदोलन भी होगा तेज
उन्होंने आगे कहा कि यह आंदोलन का पहला संकेतिक चरण है। अगर सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो हालात बदल सकते हैं। अगले चरण में बड़ी संख्या में कर्मचारी भोपाल का घेराव करेंगे।
ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें
हर महीने सात तारीख तक वेतन भुगतान करने की मांग रखी गई है। विभाग से सीधे भुगतान कर बिचौलिया व्यवस्था खत्म करने की बात कही गई है।
अनुभव के आधार पर वेतन बढ़ाने और भर्ती में प्राथमिकता देने की मांग है। बिना जांच किसी कर्मचारी की सेवा समाप्त न करने की मांग भी शामिल है। अतिरिक्त काम कराने पर नियम अनुसार भुगतान करने की अपील की गई है।
संगठन ने साफ कहा है कि यदि जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और व्यापक होता जाएगा।
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