हर साल तबादला आदेश, फिर भी पसंदीदा पंचायत में काबिज सचिव
Sanjay Sharma | Jun 16, 2026, 22:54 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्य प्रदेश में तबादला सीजन शुरू हो गया है। ग्राम पंचायत सचिवों के लिए भी तबादला नीति लेकर आई है। इसके अनुसार सचिवों को उनके गृह ग्राम और करीबी रिश्तेदारी वाली पंचायतों से विदा किया जाएगा।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- वर्षों से एक ही पंचायत में जमे सचिवों को हटाएगी नई तबादला नीति।
- अपने ही गांव और रिश्तेदारी वाली पंचायतों में भी नहीं रह पाएंगे सचिव।
- पूर्व के वर्षों में तबादला आदेशों को शिथिल कराने में कामयाब रहे सचिव।
- नई तबादला नीति के प्रावधानों पर अमल को लेकर ग्रामीणों में असमंजस।
- जीजा, साले, चाचा, ताऊ की पंचायतों से भी सचिवों की विदाई की तैयारी।
वर्तमान में ऐसी पंचायतों में जमे सचिवों की सूची तैयार कर ली गई है। उन्हें दूसरी पंचायतों में पदस्थ किया जाना है। हांलाकि नई तबादला नीति का यह नियम नया नहीं है।
यही वजह है कि ट्रांसफर की चर्चाओं के बाद भी सचिव बेफिक्र हैं। सचिव तबादले से पहले ही अपने राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों को साधने में जुट गए हैं। क्योंकि इससे पहले भी सचिव तबादला आदेशों को रद्द कराने में कामयाब होते रहे हैं।
सरकारी नीति के कमजोर नियम
पंचायत सचिवों पर अपने ही गांव या करीबी रिश्तेदार की पंचायत में सालों तक कार्यरत रहने के आरोप लगते रहे हैं। इस वजह से उनकी कार्यशैली और बढ़ते प्रभाव का खामियाजा ग्रामीणों को उठाना पड़ता है। जिसकी शिकायतें भी सरकार तक पहुंचती हैं। इसी वजह से सचिवों के ट्रांसफर की शुरूआत की गई थी। सरकार ने इसके लिए कड़े नियम भी बनाए हैं, लेकिन सचिव इन पर भारी पड़ जाते हैं।
तबादला नीति पर भारी रसूख
खासतौर से सचिव अपने ही गृह ग्राम, रिश्तेदारों के प्रभाववाली पंचायतों में सबसे मजबूत होते हैं। यही वजह है कि ऐसी पदस्थापना छोड़ना नहीं चाहते। कोई सचिव अपने जीजा की पंचायत में तो कोई साले के गांव में सालों से पदस्थ है।
वहीं कोई अपने चाचा, मौसा या फूफा की पंचायत में सचिव बना बैठा है। पिछले सालों में तबादला आदेश के बाद इनमें से ज्यादातर सचिव वापस उसी पंचायत में पोस्टिंग कराने में कामयाब रहे हैं।
पंचायतों में सालों से इनका कब्जा
छतरपुर की गौरीहार जनपद की बरहा पंचायत में सचिव अमर सिंह 5 साल से काम कर रहे हैं। ग्राम पंचायत चौफाल कोठार के सचिव जगदीश रजक हैं। यहां उनके मामा का घर है।
वहीं सहायक सचिव नीरज रजक 15 साल से पंचायत में तैनात हैं जो कि उनका अपना गांव है। सचिव और सहायक सचिव दोनों सगे रिश्तेदार हैं और इसी वजह से पंचायत के हर काम पर उनका प्रभाव है।
ये कहती है नई तबादला नीति...
- अगर पंचायत सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उप-सरपंच है
- एक ही ग्राम पंचायत में कार्यरत रहते हुए 10 साल या ज़्यादा समय हो गया है।
- भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ी या गंभीर शिकायतों से संबंधित प्रकरण लंबित हैं।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य जांच के दायरे में हैं तो पदस्थापना में बदलाव होगा।
रिश्तेदारों की पंचायत छोड़ने से परहेज
अधिकांश सचिव तबादला आदेश को चंद दिन बाद ही रद्द कराते हुए वापस उसी पंचायत में लौटने में कामयाब रहे हैं। दरअसल रिश्तेदारी वाली पंचायत में काम करने में आसानी और विरोध दब जाता है। इसके अलावा पंचायत के कामों में होने वाली गड़बड़ी पर भी उलझ खड़ी नहीं होतीं।
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