अंशकालीन-अस्थाई कर्मचारियों ने उठाई न्यूनतम वेतन की मांग, दिहाड़ी मजदूरों से बुरा हाल
Sanjay Sharma | Jan 19, 2026, 23:30 IST
Photograph: (thesootr)
अंशकालीन, अस्थायी कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन की मांग की। वेतन में असमानता, दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर हालात और श्रम नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया।
News in Short
2. कर्मचारी सालों से काम कर रहे हैं, लेकिन वेतन बहुत कम मिल रहा है।
3. कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और श्रम नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया।
4. मांग को कई सालों से अनसुना किया जा रहा है।
5. दिहाड़ी मजदूरों से भी बुरा हाल, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं।
News in Detail
प्रदेश के सैकड़ों चौकीदार, भृत्य, रसोइयों ने लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग के सामने प्रदर्शन कर अधिकारियों से न्यूनतम वेतन दिलाने की गुहार लगाई है। वहीं विभागों में सालों से चतुर्थ श्रेणी के खाली पदों पर नियमित करने मांग पत्र भी सौंपा है।
सालों से दे रहे कम वेतन
भृत्य, चौकीदार, रसोइए, माली जैसे चतुर्थ श्रेणी के पद खाली होने के बाद सरकार द्वारा अस्थायी व्यवस्था के तहत इन कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। ये कर्मचारी नियमित चतुर्थ कर्मचारी की तरह पूरे काम करते हैं, लेकिन उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही है। यही नहीं सरकार द्वारा तय कलेक्टर रेट के आधार पर उन्हें न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा है।
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सैंकड़ों कर्मचारियों का प्रदर्शन
आउटसोर्स कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग कार्यालय परिसर में सैंकड़ों कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने श्रम नियमों की अनदेखी और सरकारी विभागों में अधिकारियों द्वारा शोषण करने के आरोप लगाए।
कर्मचारियों का कहना था सरकार ने मजदूरों के लिए भी न्यूनतम वेतन तय कर रखा है। इसके लिए कलेक्टर रेट भी निर्धारित है लेकिन विभागों में काम करने वालों के लिए कोई नियम नहीं है।
स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग रसोइयों से 4000 हजार में काम करा रहे हैं तो भृत्य और चौकीदारों को वेतन के नाम पर 3000 से 5000 हजार ही मिल रहे हैं वहीं मालियों को तो 2000 से 3000 हजार ही दे रहे हैं। इतने कम वेतन में कर्मचारी जीवन निर्वाह भी नहीं कर पा रहे हैं।
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सालों से उठ रही मांग
सोमवार को डीपीआई और जनजातीय कार्य विभाग के सामने प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अधिकारियों से सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन दिलाने की मांग की है। उनका कहना था दिहाड़ी मजदूर भी हर दिन 500 रुपए से ज्यादा कमा रहे हैं, लेकिन सरकारी विभाग में उन्हें हक भी नहीं मिल रहा है।
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