पुलिस बैंड भर्ती के इंटरव्यू परिणाम पर रोक, सरकार को बतानी होगी पात्र सूची
Sanjay Gupta | Aug 24, 2026, 22:53 IST
पुलिस बैंड भर्ती
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस बैंड भर्ती के इंटरव्यू परिणाम पर रोक लगाई। एक उम्मीदवार ने तीन गुना अभ्यर्थी बुलाने का नियम टूटने का आरोप लगाया। सरकार को प्रक्रिया और पात्र सूची बतानी होगी। अगली सुनवाई सात सितंबर वाले सप्ताह में होगी।
समझें क्या है पूरा मामला...
- हाईकोर्ट ने पुलिस बैंड भर्ती का इंटरव्यू परिणाम रोक दिया।
- याचिकाकर्ता दो चयन चरण सफलतापूर्वक पार कर चुका था।
- फिर भी विभाग ने उसे इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया।
- विज्ञापन में तीन गुना उम्मीदवार बुलाने की बात थी।
- सरकार को प्रक्रिया और पात्र उम्मीदवारों की सूची बतानी होगी।
दो चरण बाद अटका रास्ता
यह विवाद उम्मीदवार निलेश सिंह की याचिका से सामने आया। उन्होंने भर्ती के शुरुआती दोनों चरण पूरे किए। उनके अनुसार, दोनों चरणों में उनका प्रदर्शन सफल रहा। फिर भी तीसरे चरण का बुलावा नहीं आया। तीसरा चरण इंटरव्यू का था।
निलेश ने 21 अगस्त 2026 को याचिका दाखिल की। उन्होंने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनकी मांग इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति थी। अदालत ने तुरंत नियुक्ति संबंधी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया।
रोक केवल इंटरव्यू परिणाम घोषित करने पर लागू है। इसलिए इसे भर्ती रद्द होना नहीं माना जाएगा। अदालत पहले सरकारी रिकॉर्ड और प्रक्रिया देखना चाहती है।
तीन गुना का नियम क्यों अहम
याचिका में अलग स्थिति का आरोप लगाया गया। दावा है कि केवल दो गुना उम्मीदवार बुलाए गए। निलेश के अनुसार, इसी कारण उनका अवसर छूटा। अदालत ने अभी इस आरोप को सही नहीं माना है।
सरकार का जवाब आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। सूची बताएगी कि कितने उम्मीदवार वास्तव में बुलाए गए। वह पात्रता तय करने वाला तरीका भी सामने लाएगी।
यह भर्ती 679 आरक्षक बैंड पदों के लिए शुरू हुई थी। इसमें संगीत कौशल की जांच प्रमुख हिस्सा है। सफल उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए चुना जाता है। इंटरव्यू चयन प्रक्रिया का अंतिम महत्वपूर्ण चरण है।
पात्र सूची सार्वजनिक नहीं
भर्ती में पारदर्शिता केवल अंतिम परिणाम तक सीमित नहीं रहती। हर चरण की जानकारी समान रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। कटऑफ और पात्रता का आधार भी स्पष्ट होना चाहिए। इससे विवाद और गलतफहमी दोनों घटते हैं।
याचिका का केंद्र व्यक्तिगत अवसर भी है। निलेश ने कहा कि उन्होंने जरूरी चरण पूरे किए। इसके बाद भी इंटरव्यू का मौका नहीं मिला। उन्होंने अदालत से वही अवसर दिलाने की मांग की।
अदालत ने फिलहाल उन्हें इंटरव्यू दिलाने का आदेश नहीं दिया। पहले सरकार से पूरा तरीका समझाने को कहा गया। इसी कारण परिणाम पर अस्थायी रोक लगाई गई।
सरकार ने क्या दलील दी
शासन की ओर से उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव उपस्थित हुए। याचिकाकर्ता के वकील गगन बजाड़ ने पक्ष रखा। वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई में जुड़े।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने रिकॉर्ड देखा। इसके बाद सरकारी वकील को आवश्यक निर्देश लेने को कहा। सरकार को उम्मीदवार चुनने का पूरा तरीका बताना होगा। पात्र उम्मीदवारों की सूची पर भी जानकारी देनी होगी।
अदालत ने इसके लिए एक सप्ताह दिया है। अगली सुनवाई सात सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी। तब तक इंटरव्यू परिणाम घोषित नहीं किया जा सकेगा।
स्टिंग से बढ़े भर्ती सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, इंस्पेक्टर सुनील कटारे कैमरे पर दिखाई दिए। उन पर डमी उम्मीदवार का क्रमांक लिखने का आरोप लगा। बातचीत में रकम के लिए कथित कोडवर्ड इस्तेमाल हुए। रिपोर्टर ने उनसे चार मुलाकातें होने का दावा किया। चौथी मुलाकात में अधिकारी वर्दी में दिखाई दिए। बातचीत में ट्रेन के समय जैसे शब्द सुनाई दिए। मीडिया रिपोर्ट ने इन्हें कथित कोड बताया।
निलेश की याचिका स्टिंग सामने आने के बाद दाखिल हुई। हालांकि अदालत में मुख्य सवाल चयन प्रक्रिया का है। कोर्ट ने अभी स्टिंग के आरोपों पर फैसला नहीं दिया।
विभाग का पहले का दावा
मौजूदा याचिका ने अलग सवाल उठाया है। सवाल संख्या आवंटन से ज्यादा बुलावे की प्रक्रिया पर है। अदालत जानना चाहती है कि इंटरव्यू सूची कैसे बनी।
जरूरी FAQ
नहीं, अदालत ने पूरी भर्ती रद्द नहीं की है। केवल इंटरव्यू परिणाम घोषित करने पर अंतरिम रोक लगी है। अगली सुनवाई तक परिणाम जारी नहीं हो सकेगा। अंतिम फैसला सरकारी जवाब और रिकॉर्ड देखने के बाद आएगा।
उम्मीदवार ने हाईकोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की?
निलेश सिंह ने शुरुआती दोनों चरण पार करने का दावा किया। फिर भी उन्हें इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया। उनका आरोप है कि तीन गुना उम्मीदवार बुलाने की शर्त टूटी। उन्होंने पात्र सूची सार्वजनिक नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।
अब राज्य सरकार को क्या जानकारी देनी होगी?
सरकार को इंटरव्यू उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया बतानी होगी। पात्र उम्मीदवारों की सूची संबंधी जानकारी भी देनी होगी। अदालत ने सरकारी पक्ष को एक सप्ताह दिया है। अगली सुनवाई सात सितंबर वाले सप्ताह में प्रस्तावित है।
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