फर्जी NDPS छापा: राजस्थान पुलिस ने दर्ज की MP के दो TI सहित 100 पर FIR
Jitendra Shrivastava | Jun 16, 2026, 17:53 IST
Photograph: (THESSOOTR)
जनवरी 2026 में राजस्थान के घाटाखेड़ी में एमपी पुलिस ने ड्रग्स छापे का दावा किया था। कोर्ट ने कार्रवाई को फर्जी पाया। अब दो TI समेत 100 लोगों पर FIR दर्ज हुई।
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी पुलिस की 'बड़ी कार्रवाई' निकली फर्जी, अब FIR।
- ड्रग्स फैक्ट्री छापे में झूठ की परत दर परत खुली।
- 80 पुलिसवाले गए, 30 मिनट में सब कुछ कर डाला?
- राजस्थान कोर्ट ने कहा, एमपी पुलिस ने झूठ बोला।
- दो TI समेत 100 पर FIR, ड्रग्स छापे का सच क्या था?।
ऐसे शुरू हुई ड्रग्स छापे की कहानी
28 जनवरी को 80 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम घाटाखेड़ी पहुंची। तत्कालीन एसपी विनोद कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ और ड्रग्स बनाने का सामान पकड़ा गया। दो भाई शाहिर खान और मुनव्वर उर्फ राजा को गिरफ्तार किया गया।
mp police fake drugs
पांच सवाल जिन्होंने छापे पर उठाई उंगली...
सामान नया क्यों था?
राजस्थान पुलिस को पता ही नहीं था
वीडियोग्राफी हुई या नहीं?
टाइमिंग का गणित नहीं मिला
30 मिनट में इतना सब कैसे?
परिवार तभी से कह रहा था, यह सब झूठ है
हमीद खान ने 21 फरवरी 2026 को चौमहला कोर्ट में शिकायती आवेदन दायर किया।
जांच में रिकॉर्ड ही नहीं मिले
मीणा ने थाना प्रभारी शशि उपाध्याय समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान लिए। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े कई जरूरी रिकॉर्ड ही नहीं मिले।
कोर्ट के आदेश पर 100 लोगों पर FIR
15 जून को राजस्थान के डग थाने में केस दर्ज हुआ। इसमें आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत, एसआई (Sub-Inspector) राखी गुर्जर, एएसआई (Assistant Sub-Inspector) अजय जाट, राहुल विश्वकर्मा, पुलिसकर्मी शुभम समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज हुआ।
आगे क्या होगा?
FAQ
- राजस्थान में एमपी पुलिस के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई?
जनवरी 2026 में आगर मालवा पुलिस ने राजस्थान के घाटाखेड़ी में ड्रग्स छापे का दावा किया था। जांच में वीडियोग्राफी, रिकॉर्ड और टाइमिंग सब झूठे पाए गए। चौमहला कोर्ट ने जांच रिपोर्ट के आधार पर FIR के आदेश दिए। - इस मामले में किन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई?
आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह राजपूत, SI राखी गुर्जर, ASI अजय जाट समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों पर केस दर्ज हुआ। जांच में और नाम सामने आ सकते हैं। - छापे को फर्जी साबित करने वाले सबूत क्या थे?
पांच अहम बिंदु सामने आए: राजस्थान पुलिस को छापे की जानकारी नहीं थी, वीडियोग्राफी नहीं हुई थी, टाइमिंग के रिकॉर्ड सीसीटीवी से मेल नहीं खाते थे, जब्त सामान नया था, और 30 मिनट में NDPS कानूनी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं था।
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