एमपी पुलिस का अपना पोलारिस क्लाउड सिस्टम, सिक्योर रहेगा पुलिस का डेटा

एमपी पुलिस अब अपना खुद का क्लाउड सिस्टम पोलारिस बना रही है। अब पुलिस के सरकारी दस्तावेज वाट्सएप या विदेशी एप पर नहीं दिखेंगे। इसके लिए डायल 100 के पुराने सेटअप का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें प्रदेश के एक लाख से अधिक पुलिसकर्मियों का डेटा रहेगा।

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Aman Vaishnav
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mp police polaris cloud system

News In Short

  • अब विदेशी एप्स और वाट्सएप पर सरकारी दस्तावेज साझा करना बंद होगा।

  • पोलारिस नाम का स्वदेशी क्लाउड सिस्टम पुलिस ने तैयार किया है।

  • डायल 100 योजना के पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर का इसमें उपयोग होगा।

  • प्रदेश के 986 थाने और 55 एसपी ऑफिस इससे जुड़ेंगे।

  • केस डायरी और एफआईआर अब सीधे क्लाउड पर अपलोड होंगी।

News In Detail

विदेशी एप्स पर लगेगी लगाम

मध्य प्रदेश पुलिस विभाग अब डेटा की सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर है। अब वाट्सएप के जरिए कोई भी सरकारी फाइल नहीं भेजी जाएगी। पुलिस विभाग ने निजी और विदेशी एप्स को पूरी तरह त्याग करने का फैसला लिया है। डेटा चोरी रोकने के लिए यह बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है नया पोलारिस सिस्टम

मध्य प्रदेश पुलिस ने अपना आंतरिक क्लाउड सिस्टम पोलारिस बनाया है। यह सिस्टम गूगल ड्राइव की तरह ही काम करने वाला है। इसके लिए अलग से कोई नया बजट खर्च नहीं हुआ है। डायल 100 के बंद होने के बाद उसका सेटअप लिया गया है। पुराने सर्वर और उपकरणों को पोलारिस के लिए इस्तेमाल किया है।

गूगल से भी तेज होगी रफ्तार

इस क्लाउड की स्पीड गूगल (Google) से भी तेज होने का दावा है। इस पर पुलिस के सभी आदेश और सर्कुलर रखे जाएंगे। लगभग एक लाख पुलिसकर्मियों का डेटा भी इस पर ही होगा्। डीजीपी ने 6 महीने पहले इस प्रोजेक्ट पर चर्चा की थी। अब यह प्रोजेक्ट लगभग पूरी तरह से तैयार हो चुका है।

थानों और दफ्तरों का होगा डिजिटलीकरण

प्रदेश के कुल 55 एसपी ऑफिस इससे सीधे जोड़े जाएंगे। लगभग 986 थाने भी इस नेटवर्क का हिस्सा बनने वाले हैं। एसडीओपी और एसीपी ऑफिस को भी लॉगिन आईडी दी जाएगी। अब फिजिकल फाइलों के बजाय डिजिटल रिकॉर्ड का जमाना होगा। पुलिस ने इसके लिए अपना एक डिजिटल रोडमैप बनाया है।

केस डायरी होगी ऑनलाइन अपलोड

जांच रिपोर्ट और केस डायरी सीधे क्लाउड पर अपलोड होंगी। पुराने दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करने का काम शुरू होगा। थानों में रखे पुराने रिकॉर्ड्स को अब चिन्हित किया जा रहा है। इससे केस की जांच में काफी पारदर्शिता और तेजी आएगी। फाइलों के खोने या जलने का डर खत्म हो जाएगा।

अन्य राज्यों और केंद्र की पहल

गृह मंत्रालय ने पहले ही सेंट्रल क्लाउड सर्वर बनाया है। केरल पुलिस ने अपना निजी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर लिया है। तेलंगाना पुलिस ने मई 2025 में गूगल के साथ समझौता किया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने योटा डेटा सेंटर का सहारा लिया है। एमपी पुलिस भी अब इसी आधुनिक राह पर चल पड़ी है।

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